Thailand Songkran Tragedy : थाईलैंड में ‘मौत का त्योहार’, सड़कों पर पार्टी करने निकले थे, 191 लोगों ने गंवाई जान

बैंकॉक: जब भारत में बैसाखी और बिहू की धूम होती है तब थाईलैंड में हर साल अप्रैल के बीच में एक त्योहार मनाया जाता है, जो होली से काफी मिलता-जुलता है. ये थाईलैंड का ‘सौंगक्रान’ त्योहार है. इसे दुनिया की ‘सबसे बड़ी वॉटर फाइट’ के रूप में जाना जाता है, जिसमें बड़े-बूढ़ों का आशीर्वाद लेने की परंपरा है लेकिन समय के साथ-साथ ये त्योहार ‘स्ट्रीट वॉटर पार्टी’ में तब्दील हो गया है. इस साल भी ये त्योहार सड़कों पर हुड़दंग के साथ मनाया जा रहा था लेकिन खुशियों के इन फुहारों के बीच मातम का सन्नाटा पसर गया है. जिस त्योहार को शांति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता था, वहां सड़कों पर पानी के साथ-साथ खून भी बहा.
थाईलैंड का जश्न जो ‘खूनी’ जंग में बदल गया
इस साल का सप्ताह भर चलने वाला जश्न थाईलैंड के लिए एक बड़ी त्रासदी बन गया है. सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्सव के दौरान हुए हादसों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. जश्न के शुरुआती कुछ दिनों में ही 951 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं.
इन हादसों में अब तक 191 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 900 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से कई ने अपने अंग खो दिए हैं.
वॉटर फेस्टिवल में आखिर क्यों बढ़ रहे हैं ये हादसे?
थाई अधिकारियों ने इस समय को ‘सेवन डेंजरस डेज’ का नाम दिया है. इन मौतों और दुर्घटनाओं के पीछे कई चौंकाने वाली वजहें सामने आई हैं-
ड्रंक ड्राइविंग : हादसों की सबसे बड़ी वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है. उत्सव के माहौल में लोग भारी मात्रा में शराब का सेवन करते हैं और फिर सड़कों पर तेज रफ्तार मोटरसाइकिलें दौड़ाते हैं.
वॉटर अटैक और बैलेंस बिगड़ना: सौंगक्रान में लोग चलती हुई मोटरसाइकिलों पर बाल्टी भर-भर कर पानी फेंकते हैं. पानी की तेज धार के कारण चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है और वे भीषण दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.
हेलमेट और सीटबेल्ट की अनदेखी: त्योहार के जोश में लोग सुरक्षा नियमों को ताक पर रख देते हैं. बाइक पर क्षमता से ज्यादा लोग बैठना और हेलमेट न पहनना जानलेवा साबित हो रहा है.
क्या है सौंगक्रान और क्यों है यह खास?
सौंगक्रान शब्द संस्कृत के ‘संक्रांति’ से निकला है, जिसका अर्थ है ‘बदलाव’ या ‘आगे बढ़ना’. यह थाईलैंड का पारंपरिक नव वर्ष है, जो चावल की फसल की कटाई के बाद मनाया जाता है. सदियों से इस त्योहार का स्वरूप बेहद आध्यात्मिक रहा है. लोग बौद्ध मंदिरों में जाते हैं, बुद्ध की मूर्तियों पर पवित्र जल छिड़कते हैं और अपने बुजुर्गों के हाथों पर पानी डालकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. समय के साथ, इस परंपरा ने एक विशाल ‘स्ट्रीट पार्टी’ का रूप ले लिया.
आज, बैंकॉक से लेकर फुकेत तक की सड़कें एक युद्ध के मैदान में बदल जाती हैं, जहां लोग वॉटर गन, बाल्टियों और पाइपों के साथ एक-दूसरे को सराबोर कर देते हैं. मान्यता है कि यह पानी पिछले साल की बुराइयों और दुर्भाग्य को धो देता है.



