फफक पड़े डॉक्टर, हाथ कांपे और गला भर आया… अपने ही गुरु का पोस्टमार्टम करते हुए भावुक हुई SMS अस्पताल की मोर्चरी!

Last Updated:July 10, 2026, 06:47 IST
Dr. Nandlal Disania Postmortem: जयपुर के एसएमएस अस्पताल में फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. नंदलाल डिसानिया के निधन के बाद एक मार्मिक घटना सामने आई. उनके शिष्यों को अपने ही गुरु का पोस्टमार्टम करना पड़ा. इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों के हाथ कांप रहे थे और वे भावुक होकर रो पड़े. शिष्यों ने गुरु के शरीर पर छुरी चलाने से पहले बेहद हिचकिचाहट महसूस की, लेकिन अंततः मेडिकल बोर्ड बनाकर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की गई. यह घटना डॉक्टर-गुरु के गहरे संबंध और उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत की याद दिलाती है.
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जयपुर: SMS अस्पताल में शिष्यों को करना पड़ा अपने ही गुरु का पोस्टमार्टम, भावुक हुई मोर्चरी
Jaipur: जयपुर के एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी का मंजर अत्यंत विचलित और भावुक करने वाला था. अक्सर निर्जीव शरीरों की जांच-परख करने वाले फॉरेंसिक विशेषज्ञों के लिए उस दिन का काम सामान्य नहीं था. दरअसल, पोस्टमार्टम टेबल पर लेटे हुए शव को देख वहां मौजूद सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की आंखें नम थीं. यह शव किसी और का नहीं, बल्कि उनके मार्गदर्शक और फॉरेंसिक विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. नंदलाल डिसानिया का था.
स्थिति इतनी असहज थी कि कोई भी डॉक्टर अपने गुरु के शरीर पर चीर-फाड़ करने के लिए तैयार नहीं हो पा रहा था. फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टर डी. के. शर्मा ने बताया कि शिष्यों के लिए यह एक बेहद कठिन घड़ी थी. सभी डॉक्टरों का यही कहना था कि वे अपने गुरु के पार्थिव शरीर पर कटर और छुरी चलाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं. एक समय तो ऐसा भी लगा कि शायद यह पोस्टमार्टम किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ेगा, क्योंकि भावनात्मक रूप से शिष्य इस जिम्मेदारी को निभाने में खुद को असमर्थ पा रहे थे.
नम आंखों से पूरी की गई प्रक्रियाविस्तृत चर्चा और आपसी समझाइश के बाद एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, ताकि गरिमापूर्ण तरीके से प्रक्रिया पूरी की जा सके. बोर्ड में शामिल डॉ. दीपाली ने उस पल को याद करते हुए साझा किया कि यह उनके पेशेवर जीवन का सबसे कठिन क्षण था. उन्होंने कहा, “जिस व्यक्ति ने हमें उंगली पकड़कर फॉरेंसिक विज्ञान की बारीकियां सिखाईं, आज उन्हीं के शरीर पर हमें यह प्रक्रिया निभानी पड़ रही थी.” पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों के हाथ कांप रहे थे और हर किसी का गला रुंधा हुआ था.
30 साल की साथी का सफर एक दर्दनाक अंत परडॉ. नंदलाल डिसानिया के लंबे समय तक सहयोगी रहे डॉ. सुमंत दत्ता ने याद किया कि वे 1996 से एक साथ काम कर रहे थे. उन्होंने बताया कि डॉ. डिसानिया केवल एक बेहतरीन विशेषज्ञ ही नहीं थे, बल्कि एक शानदार इंसान भी थे. उनकी मेहनत का ही परिणाम था कि एसएमएस अस्पताल में प्रदेश की पहली ‘पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल लैब’ स्थापित हो सकी. डॉ. दत्ता ने कहा, “हमने साथ मिलकर हजारों शवों की जांच की, लेकिन यह कल्पना से परे था कि मुझे अपने उसी साथी का पोस्टमार्टम अपनी आंखों के सामने देखना पड़ेगा.”
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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