Rajasthan

मेहर की रकम से शहजादी ने बनवाई थी यह 400 साल पुरानी मस्जिद, आज इसी नाम से जाना जाता है पूरा इलाका

Last Updated:May 04, 2026, 12:13 IST

Hyderabad Dharohar: यूं तो आपने कई ऐसी कहानियां और किस्से पढ़े होंगे जिनमें भव्य महल, दरबार और इमरातों की बातें रही होंगी, आज हम बात करेंगे इस देश की सबसे अनोखी मस्जिदी की और उससे भी अनोखी उसके बनने की कहानी. हैदराबाद के कारवान में 400 साल पुरानी मस्जिद-ए-कुलसुम बेगम शहजादी कुलसुम बेगम ने अपने मेहर की रकम से बनवाई धी. यह इलाका आज भी कुलसुमपुरा नाम से मशहूर है.

हैदराबाद. निजामों का शहर हैदराबाद अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक इमारतों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यहां एक मस्जिद है. इसका निर्माण कुतुबशाही वंश की शहजादी कुलसुम बेगम ने करवाया. ऐसा स्थानीय निवासी और इतिहास के जानकार सिबगतुल्लाह खान बताते हैं. और सबसे खास बात यह है कि यह किसी कोष या चंदे से नहीं कराया गया. यह मस्जिद बेगम ने अपने मेहर की रकम से बनवाई. बताया जाता है कि मस्जिद करीब 400 साल पुरानी है. यह एक इबादतगाह नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और त्याग की एक अनोखी मिसाल भी है, जिसे इतिहास में खास जगह मिली है.

कुलसुम बेगम, सुल्तान मोहम्मद कुतुब शाह की बेटी और सुल्तान अब्दुल्ला कुतुब शाह की बहन थीं. जिन्हें नहीं पता उनकी जानकारी के लिए बता दें कि इस्लाम में मेहर वह संपत्ति या धन होता है, जो शादी के समय शौहर यानी कि पति अपनी पत्नी को देता है और उस पर पत्नी का पूरा अधिकार होता है.

कभी इंटरनेशनल सेंटर हुआ करता था यह इलाकाजिस समय इस मस्जिद का निर्माण हुआ, उस दौर में कारवान इलाका अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र हुआ करता था. यहां देश और विदेश से आने वाले व्यापारियों के लिए कारवां सराय बनी हुई थी. धीरे-धीरे मस्जिद की भव्यता और उसकी पहचान बढ़ती गई. इसके साथ ही आसपास का पूरा इलाका भी शहजादी के नाम पर कुलसुमपुरा कहलाने लगा. आज भी सदियों बाद यह इलाका उसी नाम से जाना जाता है और अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है.

क्यों इस मस्जिद की नक्काशी को लोग कहते हैं सबसे खासमस्जिद कीबनावट कुतुबशाही काल की वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है. इसके ऊंचे और सजे हुए मीनार दूर से ही लोगों का ध्यान खींच लेते हैं. मीनारों पर की गई बारीक नक्काशी और पत्थरों पर उकेरी गई डिजाइन उस समय की उन्नत कारीगरी को दिखाती है. करीब 400 साल पुराने होने के बावजूद इस मस्जिद की मजबूती और संरचना आज भी लोगों को हैरान कर देती है. यह मस्जिद हैदराबाद की ऐतिहासिक मस्जिदों की श्रृंखला का एक अहम हिस्सा मानी जाती है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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