भरतपुर का यह गांव बना देसी जूतियों की फैक्ट्री, हाथों से तैयार हर जोड़ी की है डिमांड, पीढ़ियों से जिंदा है कला

Last Updated:June 23, 2026, 09:09 IST
Bharatpur Famous Lalpur Juttis: भरतपुर जिले का लालपुर गांव अपनी पारंपरिक देसी जूतियों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां जूती बनाना केवल रोजगार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक विरासत है. गांव के कई परिवार इस शिल्प से जुड़े हुए हैं और जूती निर्माण की पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है. उच्च गुणवत्ता वाले चमड़े से तैयार की जाने वाली ये जूतियां मजबूती, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक बनावट के लिए जानी जाती हैं. ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरों में भी इनकी मांग बढ़ रही है. यही वजह है कि लालपुर की जूतियां आज स्थानीय कारीगरों की पहचान और आजीविका का प्रमुख साधन बनी हुई है.
भरतपुर जिले का लालपुर गांव अपनी पारंपरिक हस्तकला के लिए खास पहचान रखता है. यहां बनाई जाने वाली देसी जूतियां न सिर्फ भरतपुर बल्कि पूरे राजस्थान के कई इलाकों में पसंद की जाती है. गांव की यह कला वर्षों पुरानी है, जिसे स्थानीय कारीगर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते आ रहे हैं. लालपुर की जूतियां अपनी मजबूती, सुंदरता और आरामदायक बनावट के कारण लोगों के बीच खास जगह बना चुकी है.
भरतपुर जिले के लालपुर गांव में जूती बनाना केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक पारंपरिक कला है. गांव के कई परिवार लंबे समय से इस शिल्प से जुड़े हुए हैं और घर के छोटे-बड़े सभी सदस्य इसमें अपनी भूमिका निभाते हैं. जूती निर्माण की पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है, जिससे हर जोड़ी में कारीगरों की मेहनत, बारीकी और हुनर झलकता है. पारंपरिक डिजाइनों और उत्कृष्ट कारीगरी के कारण यहां बनी जूतियां दूर-दूर तक पसंद की जाती हैं. यही कला आज भी गांव की पहचान और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है.
जूतियों के निर्माण में मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले चमड़े का उपयोग किया जाता है. सबसे पहले चमड़े का सावधानीपूर्वक चयन कर उसे साफ और मुलायम बनाया जाता है, ताकि वह उपयोग के लिए उपयुक्त हो सके. इसके बाद कारीगर पारंपरिक औजारों की सहायता से चमड़े को काटकर मनचाहे आकार और डिजाइन में ढालते हैं. फिर हाथ से बारीक सिलाई कर जूती को अंतिम रूप दिया जाता है. पूरी प्रक्रिया में मशीनों का बहुत कम उपयोग होता है. यही वजह है कि यहां तैयार होने वाली जूतियां मजबूत, टिकाऊ और अपनी पारंपरिक कारीगरी के लिए विशेष पहचान रखती है.
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लालपुर की जूतियों की सबसे बड़ी खासियत उनका हल्कापन, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक बनावट है. इन्हें पहनने पर पैरों में दर्द या किसी प्रकार की असुविधा महसूस नहीं होती, इसलिए लोग इन्हें लंबे समय तक आसानी से पहन सकते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. शादी-ब्याह, धार्मिक कार्यक्रमों और पारंपरिक आयोजनों में लोग इन्हें विशेष रूप से पसंद करते हैं. पारंपरिक राजस्थानी लुक के साथ आराम का बेहतरीन मेल होने के कारण लालपुर की जूतियां आज अपनी अलग पहचान बना चुकी है.
बाजार में लालपुर की पारंपरिक जूतियों की मांग लगातार बनी हुई है. भरतपुर के साथ-साथ आसपास के कई जिलों में भी इनकी अच्छी खपत देखने को मिलती है. इन जूतियों की गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन के कारण व्यापारी सीधे गांव पहुंचकर कारीगरों से जूतियां खरीदते हैं और उन्हें बड़े बाजारों में बेचते हैं. इससे स्थानीय कारीगरों को नियमित रोजगार मिलता है और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होती है. साथ ही उनकी पारंपरिक कला को नई पहचान और व्यापक बाजार मिल रहा है, जिससे यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रह सके.
अगर कीमत की बात करें तो लालपुर में बनने वाली जूतियों की कीमत उनके डिजाइन, आकार, कारीगरी और गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग होती है. सामान्य तौर पर ये जूतियां किफायती दामों में उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे हर वर्ग के लोग इन्हें आसानी से खरीद सकते हैं. साधारण जूतियों से लेकर आकर्षक डिजाइनों वाली पारंपरिक जूतियों तक कई विकल्प बाजार में मौजूद हैं. लालपुर की जूतियां पारंपरिक हस्तकला और आधुनिक जरूरतों का बेहतरीन संगम मानी जाती हैं. यही वजह है कि समय के साथ इनकी लोकप्रियता बढ़ रही है.
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