Rajasthan

राजस्थान की पारंपरिक गर्मी की सब्जियां | Traditional Rajasthani Summer Dishes | Ker Sangri and Gatte ki Sabzi |

होमफोटोलाइफ़फूड

राजस्थान की ‘सुपर’ सब्जियां: 50 डिग्री तापमान में भी नहीं बिगड़ता इनका जायका!

Last Updated:May 02, 2026, 14:03 IST

Traditional Rajasthani Summer Dishes: राजस्थान की भीषण गर्मी में भोजन को ताजा रखना एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन यहाँ की पारंपरिक सब्जियां इस समस्या का बेहतरीन समाधान पेश करती हैं. राजस्थान की रसोई में आज भी केर-सांगरी, गट्टे की सब्जी, दही वाले आलू, कड़ी और केरी-प्याज जैसे व्यंजन बेहद लोकप्रिय हैं. इन सब्जियों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये भीषण गर्मी में भी जल्दी खराब नहीं होतीं और स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी गुणकारी हैं. केर-सांगरी जहाँ लंबे समय तक सुरक्षित रहती है, वहीं दही वाले आलू और कड़ी अपनी ठंडी तासीर के कारण शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं. बेसन से बनी गट्टे की सब्जी हरी सब्जियों की कमी को पूरा करती है और केरी-प्याज का कॉम्बिनेशन लू से बचाने में मददगार साबित होता है. ये पारंपरिक पकवान न केवल राजस्थानी संस्कृति का हिस्सा हैं, बल्कि मौसम के अनुकूल वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए पौष्टिक विकल्प भी हैं, जो आज भी हर घर की शान बने हुए हैं.

राजस्थान के पारंपरिक जायके में ‘केर-सांगरी’ का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है, जिसे मरुधरा की शान और यहाँ की सबसे महंगी सब्जियों में शुमार किया जाता है. सूखे केर और सांगरी को विशेष मसालों के साथ पकाकर तैयार की जाने वाली यह डिश गर्मियों के मौसम में बेहद पसंद की जाती है. इस व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित रहती है, जिसकी वजह से यह जल्दी खराब नहीं होती और सफर के दौरान भी भोजन के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है. यह डिश न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि राजस्थानी संस्कृति और खान-पान की विशिष्ट पहचान भी है.

गर्मियों के मौसम में ‘दही वाले आलू’ का स्वाद हर घर में विशेष स्थान रखता है. उबले हुए आलू को गाढ़े दही और हल्के सुगंधित मसालों के साथ पकाकर तैयार किया जाता है, जो इसे एक बेहतरीन स्वाद देता है. इस सब्जी की खासियत यह है कि यह बेहद कम समय में बनकर तैयार हो जाती है और दही की मौजूदगी के कारण इसकी तासीर ठंडी होती है, जो चिलचिलाती गर्मी में शरीर को शीतलता और ठंडक प्रदान करती है. इसके साथ ही, दही के उपयोग की वजह से यह जल्दी खराब भी नहीं होती है, जिससे यह यात्रा या पिकनिक के लिए भी एक सुरक्षित और पसंदीदा व्यंजन बन जाता है. यह डिश सादगी और स्वाद का एक ऐसा मेल है जो सेहत के लिए भी हल्का और सुपाच्य रहता है.

राजस्थान में गर्मियों की दस्तक के साथ ही बढ़ता तापमान खान-पान की चीजों को सुरक्षित रखने की एक बड़ी चुनौती पेश करता है. भीषण गर्मी के कारण अक्सर सुबह की बनी सब्जियां दोपहर तक अपना स्वाद और ताजगी खोने लगती हैं. हालांकि, इस समस्या का समाधान राजस्थान की पारंपरिक रसोइयों में सदियों से मौजूद है. यहाँ के कुछ खास व्यंजन न केवल स्वाद और पौष्टिकता में लाजवाब होते हैं, बल्कि अपनी विशेष तासीर और बनाने के तरीके के कारण लंबे समय तक खराब भी नहीं होते. ये पारंपरिक सब्जियां रेगिस्तानी जलवायु के अनुकूल तैयार की जाती हैं, जो चिलचिलाती धूप और गर्मी के बीच भी अपनी गुणवत्ता बनाए रखती हैं.

Add as Preferred Source on Google

राजस्थान में कढ़ी भी गर्मियों के दौरान बनने वाली एक बेहद लोकप्रिय और पसंदीदा डिश मानी जाती है. दही और बेसन के मेल से तैयार होने वाली यह कढ़ी न केवल खाने में हल्की होती है, बल्कि अपने औषधीय गुणों के कारण पाचन के लिए भी बहुत फायदेमंद है. तपती गर्मी के दिनों में जब भारी या मसालेदार खाना खाने का मन नहीं होता, तब राजस्थान के हर घर में कढ़ी-चावल या कढ़ी-रोटी का कॉम्बिनेशन बड़े चाव से खाया जाता है. इसकी ठंडी तासीर शरीर को भीतर से राहत देती है और सादगी भरा यह व्यंजन सेहत और स्वाद दोनों के लिहाज से गर्मियों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है.

राजस्थानी खान-पान की परंपरा में ‘गट्टे की सब्जी’ एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे बेसन के गट्टों को दही और मसालों की चटपटी ग्रेवी में पकाकर तैयार किया जाता है. इस व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए किसी भी हरी सब्जी की आवश्यकता नहीं पड़ती, जो भीषण गर्मी के उन दिनों में एक बड़ा वरदान साबित होती है जब ताजी सब्जियों का मिलना मुश्किल होता है. गट्टे की सब्जी न केवल स्वाद में शाही और बेहतरीन होती है, बल्कि बनाने के खास तरीके और बेसन के उपयोग के कारण यह जल्दी खराब भी नहीं होती है. यही कारण है कि इसे न केवल घरों में बल्कि सफर और विशेष आयोजनों में भी मुख्य रूप से परोसा जाता है.

गर्मियों के मौसम में ‘केरी-प्याज’ की सब्जी भी राजस्थान के घरों में खूब चाव से बनाई जाती है. कच्चे आम यानी केरी की खटास और प्याज के तीखेपन के साथ तैयार होने वाली यह डिश अपने चटपटे और खट्टे-मीठे स्वाद के कारण भोजन का जायका बढ़ा देती है. स्वाद के साथ-साथ यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी है, क्योंकि केरी और प्याज दोनों की तासीर लू और भीषण गर्मी से शरीर को बचाने में मदद करती है. कई क्षेत्रों में इसे मुख्य सब्जी के अलावा सलाद या चटनी के रूप में भी परोसा जाता है, जो चिलचिलाती धूप में शरीर को ठंडक और ताजगी प्रदान करने का एक पारंपरिक तरीका है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj