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बिहार में सिंदूर की खेती का नया मॉडल, बनेंगे दो सिंदूर पार्क, जानें BAU का पूरा प्रोजेक्ट

Last Updated:June 19, 2026, 21:08 IST

Sindoor Cultivation Bihar: भागलपुर बिहार कृषि विश्वविद्यालय आम, लीची, परवल के बाद अब सिंदूर गांव और पार्क बनाने जा रहा है. गयाजी ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैम्प और दानापुर छावनी में सिंदूर पार्क विकसित करेगा. इससे किसानों को मुनाफेदार खेती, महिलाओं को रोजगार और प्राकृतिक सिंदूर व रंग उपलब्ध होंगे. जानिए बीएयू की क्या योजना है?

भागलपुर. बिहार कृषि विश्वविद्यालय अपने अलग-अलग रिसर्च के लिए जाना जाता है. आम, लीची, परवल के बाद अभ यहां हुए सिंदूर के पौधे पर रिसर्च के बाद इसका क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है. ऐसे में भागलपुर में सिंदूर ग्राम डेवलपमेंट के बाद अब बिहार के दो सैनिक छावणी में भी सिंदूर पार्क का विस्तार किया जाएगा. आइए जानते हैं इस योजना क्या है? कैसे इससे लाभ मिलेगा.

सिंदूर ग्राम के रूप में विकसित होगी ये सैनिक छावनीदरअसल, अब भागलपुर का सिंदूर पूरे बिहार में नजर आ सकता है. क्योंकि भागलपुर में सिंदूर ग्राम तो विकसित किया ही जा रहा है. अब इसके साथ साथ यह राज्य के दो सैनिक छावनियों में नजर आने वाला है. इसको लेकर बीएयू के कुलपति डॉ.दुनिया राम सिंह बताते हैं कि सबौर बिहार को सिंदूर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी में जुट गया है.

रामसी गांव बनेगा सिंदूर ग्राम, इन दो छावनी में विकसित होगा पार्क आपको बता दें कि भागलपुर में यह काम सबौर के रामसी गांव में सिंदूर ग्राम के रूप में विकसित होगा. बीएयू की इस पहल से गांव की तस्वीर बदल सकती है. वहीं बिहार के सैनिक छावनी की बात करें तो प्रथम चरण में ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैम्प गयाजी और ओटीसी दानापुर छावनी में सिंदूर पार्क विकसित किया जाएगा. जल्द ही दोनों जगहों पर विश्वविद्यालय की टीम जाएगी. स्थल चयन कर और जल्द ही वहां इसका कार्य शुरू होगा.कुलपति डॉ. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में पौधे तैयार किए जा चुके हैं. जल्द ही इसको लगाया जाएगा. इससे यहां का सिंदूर लगाने के साथ-साथ खाने वाले रंग के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. गांव की महिलाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें.

आप भी यहां से पौधा लेकर कर सकते हैं खेतीबिहार कृषि विश्वविद्यालय लगातार नई तरह की खेती को बढ़ावा दे रहा है. ऐसे में सिंदूर की खेती के प्रति किसानों को जागरूक किया जा रहा है. अगर आप भी सिंदूर की खेती करना चाहते हैं, तो बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए सिंदूर के बागान से संपर्क कर सकते हैं. यहां किसानों को पौधे के साथ-साथ खेती की पूरी जानकारी भी दी जाएगी. किस प्रकार खेती करनी है, कौन-सी किस्म का पौधा लगाना चाहिए, इसकी जानकारी विश्वविद्यालय देगा. इतना ही नहीं, पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल के लिए भी वैज्ञानिक मदद करेंगे.

सिंदूर से कमा सकेंगे भरपूर मुनाफाआपको बता दें कि सबौर में बिक्सा ओरेलाना नामक पौधे से प्राकृतिक और जैविक सिंदूर तैयार किया जा रहा है. यह एक ऐसी प्रजाति है, जिससे सिंदूर और लिपस्टिक दोनों बनाई जाती हैं. सिंदूर की खेती का दोहरा फायदा है. एक तरफ महिलाओं को रोजगार मिलेगा, दूसरी तरफ लोगों को पूरी तरह प्राकृतिक सिंदूर मिलेगा. इतना ही नहीं, इससे खाने वाले रंग भी तैयार किए जा सकते हैं. इसलिए यह खेती मुनाफेदार मानी जा रही है. किसान इसे कॉमर्शियल रूप में भी कर सकते हैं. खेत की मेड़ पर या पूरा बागान लगाकर इसकी खेती की जा सकती है.

About the AuthorAmit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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