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Udaipur News: सर्दी-बुखार से लेकर लिवर-किडनी तक, आरोग्य मंदिरों के हर्बल गार्डन में 25 पौधों में प्राकृतिक इलाज

Last Updated:June 19, 2026, 16:25 IST

Arogya Mandir : उदयपुर जिले के आरोग्य मंदिर अब उपचार के साथ-साथ लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पौधों की जानकारी भी दे रहे हैं. विभिन्न केंद्रों पर विकसित हर्बल गार्डनों में 25 प्रमुख औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जिनके उपयोग और स्वास्थ्य लाभों से मरीजों व ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है. इससे आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचार के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है.

उदयपुर. जिले के आरोग्य मंदिर अब सिर्फ उपचार केंद्र ही नहीं, बल्कि लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पौधों की जानकारी देने वाले जागरूकता केंद्र भी बनते जा रहे हैं. जिले के विभिन्न आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्रों और आरोग्य मंदिरों में विकसित किए गए हर्बल गार्डन लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. इन गार्डनों में 25 प्रमुख औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो सर्दी-बुखार जैसी सामान्य समस्याओं से लेकर लिवर, किडनी और त्वचा संबंधी कई बीमारियों में उपयोगी माने जाते हैं. वरिष्ठ वैद्य डॉ. शोभालाल औदीच्य ने बताया कि हर्बल गार्डनों में ऐसे पौधों का चयन किया गया है जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हैं और आसानी से विकसित हो सकते हैं.

इन पौधों का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. इनके माध्यम से मरीजों और आम लोगों को घरेलू स्तर पर प्राकृतिक उपचार की जानकारी भी दी जा रही है. हर्बल गार्डनों में अश्वगंधा, कालमेघ, एलोवेरा, नीम, सहजन, पुदीना और पत्थरचट्टा जैसे पौधे लगाए गए हैं. अश्वगंधा और कालमेघ को मानसिक तनाव, शारीरिक कमजोरी और लिवर संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी माना जाता है. वहीं एलोवेरा और नीम त्वचा रोगों के उपचार, घाव भरने और प्राकृतिक एंटीसेप्टिक के रूप में उपयोग किए जाते हैं. सहजन और पुदीना पोषक तत्वों से भरपूर हैं और कुपोषण और जोड़ों के दर्द में राहत पहुंचाने में मददगार माने जाते हैं.

पत्थरचट्टा का पौधा पथरी की समस्या में उपयोगी

आरोग्य मंदिर की प्रभारी डॉ. रचना मित्तल ने बताया कि अक्सर लोग अपने आसपास मौजूद औषधीय पौधों के गुणों से अनजान रहते हैं. इसी वजह से हर्बल गार्डन विकसित कर मरीजों और ग्रामीणों को इन पौधों की पहचान, उपयोग और उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी जा रही है. इससे लोगों में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति रुचि भी बढ़ रही है. डांगियों का गुड़ा आरोग्य मंदिर के प्रभारी डॉ. वी.पी. बंशीवाल ने बताया कि कई औषधीय पौधे सीधे उपयोग में लाए जा सकते हैं. उदाहरण के तौर पर पत्थरचट्टा का पौधा पथरी की समस्या में उपयोगी माना जाता है. उन्होंने बताया कि हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए शुरुआती चरण में प्रत्येक केंद्र को करीब 20 हजार रुपए का बजट उपलब्ध कराया गया था. जिले में इन हर्बल गार्डनों का विकास तीन चरणों में किया गया है. पहले चरण में 16, दूसरे चरण में 23 और तीसरे चरण में 32 केंद्रों पर हर्बल गार्डन तैयार किए गए.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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