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उदयपुर नगर निगम के क्या हैं राजनीतिक समीकरण, BJP के गढ़ को भेद पाएगी कांग्रेस?

Last Updated:August 20, 2026, 12:33 IST

Udaipur Municipal Corporation Chunav : राजस्थान में निकाय चुनाव घोषित हो चुके हैं. इसके साथ ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं. 80 वार्डों वाले उदयपुर नगर निगम के महापौर का पद अनारक्षित है. यह सभी वर्गों के लिए खुला है. उदयपुर शहर बीजेपी का गढ़ रहा है. यहां बीते 1994 से अब तक लगातार 6 बार से बीजेपी का बोर्ड बनता आ रहा है. बीजेपी इस बार भी अपने रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए तैयार है. वहीं कांग्रेस बीजेपी के विजयी रथ को रोकने में जुटी है. जानें क्या है उदयपुर शहर के राजनीतिक समीकरण. उदयपुर नगर निगम के क्या हैं राजनीतिक समीकरण, BJP के गढ़ को भेद पाएगी कांग्रेस?Zoomउदयपुर नगर निगम में 1994 से लगातार बीजेपी काबिज है.

उदयपुर. उदयपुर नगर निगम बीजेपी का गढ़ रहा है. इस नगर निगम में बीते छह बार से लगातार भाजपा अपना बोर्ड बना रही है. उदयपुर नगर निगम में इन छह बार में किरण माहेश्वरी, युधिष्ठिर कुमावत, रवींद्र श्रीमाली, रजनी डांगी, चंद्र सिंह कोठारी और गोविंद सिंह टांक उदयपुर नगर निगम के मुखिया रह चुके हैं. बीजेपी के जिला अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ का दावा है कि भाजपा इस बार सातवां बोर्ड बनाकर फिर से इतिहास रचेगी. वहीं कांग्रेस जमीनी स्तर पर शहरवासियों की विकास कार्यों के प्रति पक्षपात और अन्य मामलों की नाराजगी का मुद्दा बनाकर चुनावी मैदान में दमखम दिखाने को तैयार हो रही है. वह बीजेपी के विजय रथ को रोकने की कोशिश में जुटी है.

राजस्थान में नगरीय निकायों के चुनाव की घोषणा के बाद उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों की सियासत में हलचल तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में टिकट के दावेदार शक्ति प्रदर्शन करने में लगे हुए हैं. उदयपुर नगर निगम के महापौर का पद अनारक्षित होने से मेयर की दौड़ में शामिल नेताओं ने भी अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है. इस बार बीजेपी में महापौर की दौड़ के कई उम्मीदवार हैं. इससे पार्टी में खींचतान की स्थिति भी बनने की संभावना है.

ये दावेदार हैं इस बार मैदान मेंभाजपा में मेयर पद के प्रमुख दावेदारों पारस सिंघवी, रवीन्द्र श्रीमाली, प्रमोद सामर और अतुल चंडालिया के लिए लॉटरी राहत लेकर आई है. पारस सिंघवी की दावेदारी वाले वार्ड 24 और 29 अनारक्षित ओपन है. अतुल चंडालिया का वार्ड 78 और रवीन्द्र श्रीमाली का वार्ड 33 भी अनारक्षित ओपन है. वहीं प्रमोद सामर का वार्ड भी ओपन है. लेकिन उन्हें निकाय चुनाव का संगठन प्रभारी बनाए जाने से उनके चुनाव लड़ने पर पार्टी के निर्णय का इंतजार है. हालांकि प्रमुख दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है लेकिन देखना होगा कि पार्षद का टिकट लाने में कौन सफल होता है.

उदयपुर नगर निगम में बीते छह बोर्ड में ये रहे हैं महापौर.

कांग्रेस के कई दिग्गजों के भी समीकरण बदल गए हैंकांग्रेस में कई दिग्गजों के समीकरण बदले हैं. शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ जिस वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी में थे वह अनारक्षित महिला हो गया. पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष गोपाल शर्मा का वार्ड 6 ओबीसी ओपन आरक्षित हुआ है. उनकी बहू हिंताशी शर्मा वार्ड 73 से दावेदारी कर सकती हैं. वह अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हुआ है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष मोहसिन खान और कांग्रेस नेता दिनेश श्रीमाली के वार्ड भी महिला आरक्षित होने से उन्हें नए वार्ड तलाशने होंगे. वहीं अरुण टांक का वार्ड 3 अनारक्षित ओपन आने से उनकी दावेदारी मजबूत हुई है.

बीजेपी में टिकटों को लेकर हो सकती है खींचतानभाजपा संगठन में भी टिकट को लेकर खींचतान के आसार हैं. शहर भाजपा के 12 मंडलों में से करीब 8 मंडल अध्यक्ष खुद या परिवार के सदस्यों के लिए चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. कन्हैया वैष्णव, महेश पुरी गोस्वामी, रणजीत दिग्पाल, अमृत मेनारिया, रुचिका चौधरी, विजय आहूजा और प्रताप सिंह समेत कई मंडल अध्यक्षों की दावेदारी सामने आई है. वहीं कुछ मंडल अध्यक्षों का फोकस पंचायती राज चुनावों पर है. हालांकि मंडल अध्यक्षों को दावेदारों के पैनल की लिस्ट भेजनी होती है. लेकिन जब वे ही चुनाव लड़ने की मंशा रख रहे हैं तो कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि पार्टी के एक व्यक्ति एक पद की विचारधारा कैसे सफल होगी.

आरक्षण लॉटरी ने कई वार्डों में कर दिया बड़ा फेरबदलमंडल अध्यक्षों की दावेदारी से संगठन के सामने टिकट वितरण में संतुलन बनाने की चुनौती रहेगी. टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों में नाराजगी, गुटबाजी और बगावत रोकना दोनों दलों के लिए अहम होगा. वार्ड आरक्षण लॉटरी ने कई नेताओं की राह आसान की है तो कई दावेदारों को अब नए वार्ड में सियासी जमीन तलाशनी होगी. आरक्षण लॉटरी में कई वार्डों में बड़ा फेरबदल हो गया है. इससे महापौर और उपमहापौर के दावेदारों के साथ ही पार्षद पद के लिए दावेदारी जताने वाले दावेदारों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…

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Udaipur,Udaipur,Rajasthan

First Published :

August 20, 2026, 12:31 IST

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