जहां उगता था बाजरा, अब महकेगा चंदन! दोस्त की सलाह से युवा मनोज ने रेगिस्तान में रच दिया इतिहास

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जहां उगता था बाजरा, अब महकेगा चंदन! दोस्त की सलाह से मनोज ने रच दिया इतिहास
Last Updated:July 03, 2026, 12:23 IST
Sikar Farmer Manoj Hooda Success Story: सीकर के युवा किसान मनोज हुड्डा ने यह साबित कर दिया है कि नई सोच और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर रेगिस्तान में भी चंदन की खेती सफल हो सकती है. उन्होंने कर्नाटक से 103 पौधे मंगवाकर अपने खेत में लगाए और आज सभी पौधे सुरक्षित हैं. चंदन का पेड़ करीब 12 वर्षों में तैयार होकर लाखों रुपये की आय दे सकता है. मनोज का यह प्रयोग किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. कई किसान उनके खेत पहुंचकर चंदन की खेती की जानकारी ले रहे हैं और इसे भविष्य की लाभदायक खेती के रूप में देख रहे हैं.
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सीकर के युवा किसान मनोज हुड्डा ने वैज्ञानिक तरीके अपनाकर रेगिस्तान में भी चंदन की खेती को सफल बनाया
सीकर. राजस्थान की पहचान लंबे समय तक रेतीले धोरों, बाजरे और सरसों की खेती से रही है, लेकिन अब बदलते दौर में प्रदेश के किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर नई और लाभदायक फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक तस्वीर सीकर जिले के गांगियासर गांव से सामने आई है, जहां युवा किसान मनोज हुड्डा ने रेतीली जमीन पर चंदन की खेती कर एक नई मिसाल कायम की है. जिस जमीन पर लोग चंदन की खेती की कल्पना भी नहीं करते थे, वहां आज चंदन के पौधे लहलहा रहे हैं.
यह क्षेत्र में अपनी तरह का अनोखा प्रयास माना जा रहा है. मनोज का कहना है कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए और सही योजना के साथ काम किया जाए तो रेगिस्तान की धरती भी किसानों को बेहतर मुनाफा दे सकती है. मनोज हुड्डा ने बताया कि चंदन की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की. सबसे पहले अपने खेत की मिट्टी और पानी की वैज्ञानिक जांच करवाई. जांच रिपोर्ट आने के बाद जब विशेषज्ञों ने खेती के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताईं, तब उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया.
कर्नाटक से 103 चंदन के पौधे मंगवाकर खेत में लगाए
मनोज हुड्डा ने बताया कि कर्नाटक से 103 चंदन के पौधे मंगवाकर खेत में लगाए. यह विचार उन्हें उनके एक मित्र की सलाह से मिला, जिसके बाद उन्होंने चंदन की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई और पूरी तैयारी के साथ इसकी शुरुआत की. करीब एक साल पहले लगाए गए सभी 103 पौधे आज सुरक्षित हैं और अच्छी तरह विकसित हो रहे हैं. पौधों की सफलता ने मनोज का आत्मविश्वास बढ़ाया है. उनका कहना है कि शुरुआत में कई लोगों ने इस प्रयोग को जोखिम भरा बताया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार पौधों की देखभाल करते रहे. नियमित सिंचाई, पोषण और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रबंधन की बदौलत पौधे स्वस्थ हैं.
सही से देखभाल करने पर 12 में तैयार हो जाता है चंदन का पेड़
मनोज के अनुसार, चंदन की खेती लंबी अवधि का निवेश है, लेकिन इसका लाभ भी उतना ही बड़ा है. उचित देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में करीब 12 वर्ष बाद तैयार होने वाला एक चंदन का पेड़ लाखों रुपये तक का मूल्य दे सकता है. यही वजह है कि देश के कई राज्यों में किसान अब चंदन की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. मनोज हुड्डा का यह प्रयोग अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है. कई किसान उनके खेत पर पहुंचकर चंदन की खेती की जानकारी ले रहे हैं और इसकी संभावनाओं को समझ रहे हैं. मनोज का मानना है कि यदि किसान परंपरागत खेती के साथ नई और उच्च मूल्य वाली फसलों को भी अपनाएं, तो उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों, वैज्ञानिक सोच और मेहनत के दम पर रेतीले धोरों में भी चंदन की खुशबू महकाई जा सकती है.
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Location :
Sikar,Rajasthan



