Rajasthan

नागौरी बैलों का जलवा बरकरार, वीर तेजा पशु मेले में पंजाब-हरियाणा से पहुंच रहे खरीदार

Last Updated:August 29, 2026, 17:46 IST

Nagaur News : परबतसर में वीर तेजा पशु मेला शुरू, नागौरी बैल मुख्य आकर्षण. एसडीएम बलवीर सिंह चौहान ने किया ध्वजारोहण. पशुओं की आवक बढ़ी, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों से व्यापारी इन बैलों की खरीद के लिए परबतसर पहुंच रहे हैं. खास तौर पर पंजाब के व्यापारियों की नागौरी बैलों में दिलचस्पी रहती है.

राजस्थान की पहचान और परबतसर की वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़े प्रसिद्ध वीर तेजा पशु मेले का आज दूसरा दिन है. शुक्रवार को ध्वजारोहण के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ था. इसके बाद से ही मेला मैदान में पशुपालकों और व्यापारियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है. शुक्रवार शाम तक 666 पशुओं की आवक दर्ज की गई. शनिवार को आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पशुपालकों के पहुंच रहे हैं. आज हजरों की संख्या में पशुपालक अपने पशुओं को लेकर पहुंचे हैं.

मेले की सबसे खास पहचान इस बार भी नागौरी नस्ल के बैल बने हुए हैं. अपनी मजबूत कद-काठी, तेज रफ्तार और आकर्षक शरीर के कारण नागौरी बैलों की मांग राजस्थान के बाहर भी बनी हुई है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों से व्यापारी इन बैलों की खरीद के लिए परबतसर पहुंच रहे हैं. खास तौर पर पंजाब के व्यापारियों की नागौरी बैलों में दिलचस्पी रहती है, क्योंकि कई खरीदार इन्हें दौड़ और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए भी ले जाते हैं.

वीर तेजा पशु मेले का शुक्रवार को एसडीएम बलवीर सिंह चौहान की ओर से मेला मैदान में झंडारोहण कर शुभारंभ किया गया. इसके बाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक वीर तेजा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. शुभारंभ के साथ ही मैदान में पशुओं के साथ लकड़ी, बांस और तिरपाल सहित विभिन्न सामानों की दुकानें भी सजने लगीं. शनिवार को पशुओं की आवक बढ़ने के साथ मेले में ग्रामीणों की भी भीड़ बढ़ने लगी है.

Add as Preferred Source on Google

एक समय ऐसा था जब वीर तेजा पशु मेले में करीब एक लाख तक पशु पहुंचते थे और पशु व्यापार का बड़ा केंद्र बन जाता था. अब मेले की पशु आवक पहले की तुलना में काफी सीमित हो गई है. वर्तमान में यहां करीब 2000 से 3000 पशुओं की आवक रह गई है. पशु व्यापारियों का कहना है कि पहले जैसी खरीद-फरोख्त और भीड़ अब दिखाई नहीं देती, लेकिन नागौरी बैलों की पहचान आज भी मेले की पुरानी रौनक को काफी हद तक कायम रखे हुए है.

नागौरी बैलों की कीमतों में भी पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. व्यापारियों के अनुसार करीब 12 साल पहले नागौरी बैलों की एक अच्छी जोड़ी करीब 2.21 लाख रुपए तक में बिक जाती थी. अब इसी तरह की जोड़ी की कीमत करीब 80 से 85 हजार रुपए तक रह गई है. कीमतों में आई इस गिरावट से पशु व्यापार में कमी और मेले कर स्वरूप बदला है. इसके बावजूद दूसरे राज्यों से आने वाले व्यापारी अच्छी नस्ल और मजबूत कद-काठी वाले बैलों की तलाश में यहां पहुंच रहे हैं.

दूसरे दिन पशुओं की बढ़ती आवक के साथ मेला प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को संभालने की चुनौती भी बढ़ गई है. पशुपालन विभाग और प्रशासन की ओर से बिजली, पानी, साफ-सफाई और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है. यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की मौजूदगी भी बढ़ाई गई है. बाहर से आए व्यापारियों ने मेला क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने और भीड़ वाले स्थानों पर निगरानी मजबूत करने की मांग की है.

रविवार को मेले के दूसरे दिन पशुओं की आवक और बढ़ने की उम्मीद है. आसपास के गांवों के पशुपालकों के साथ बाहरी व्यापारियों की मौजूदगी से मेला मैदान के और गुलजार होने की संभावना है. हालांकि कभी लाखों की खरीद-फरोख्त और हजारों पशुओं की भीड़ से पहचाने जाने वाले इस मेले की रौनक अब पहले जैसी नहीं रही, लेकिन नागौरी बैलों की लगातार बनी मांग इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यही नस्ल आज भी वीर तेजा पशु मेले को देशभर के पशु व्यापारियों के बीच अलग पहचान दिला रही है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :

August 29, 2026, 17:46 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj