56 दिन की जांच, 30 गवाह और सालों की पीड़ा! मोदरान केस में आखिर आया फैसला, दोनों दोषियों को मौत की सजा

Last Updated:December 10, 2025, 16:38 IST
Jalore News : मोदरान डबल मर्डर केस में भीनमाल कोर्ट ने दो दोषियों को दुर्लभ से दुर्लभतर श्रेणी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है. ढाई साल से अधिक समय बाद आया यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए राहत और न्याय दोनों लेकर आया. पारिवारिक विवाद से शुरू हुआ यह खूनी कांड पूरे क्षेत्र को झकझोर देने वाला था. अदालत ने कहा कि इस तरह की निर्मम हत्या पर नरमी समाज के साथ विश्वासघात होगा.
ख़बरें फटाफट

रेवाशंकर रावल/जालोर. मोदरान डबल मर्डर केस में भीनमाल कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है, जिसने पूरे जालोर जिले ही नहीं बल्कि प्रदेशभर में न्याय व्यवस्था को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है. 3 अप्रैल 2023 को हुए इस दिल दहला देने वाले दोहरे हत्याकांड में आखिरकार 2 साल 8 माह बाद न्याय मिला है, और वह भी इतने कठोर रूप में कि अदालत ने इसे दुर्लभ से दुर्लभतर अपराध मानते हुए दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. कोर्टरूम में मौजूद लोग जैसे ही फैसला सुनकर बाहर आए, वहां माहौल भावुक हो उठा. परिजनों की आंखों से बहते आंसुओं में दर्द भी था और न्याय मिलने का सुकून भी.
भीनमाल स्थित अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश राजेंद्र सहू ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए अभियुक्त डुंगरसिंह और पहाड़सिंह पुत्र परबतसिंह राजपूत निवासी मोदरान को मृत्युदंड और 10 लाख रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया. कोर्ट ने कहा कि यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है और इससे कम सजा देना न्याय के साथ समझौता होगा.
परिवारिक विवाद से शुरू हुआ खूनी घटनाक्रमइस कांड की शुरुआत एक परिवारिक विवाद से हुई थी. पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी अविवाहित थे और विवाह की मांग को लेकर अपने बड़े भाई रतनसिंह पर दबाव डाल रहे थे. उम्र अधिक हो जाने, बेरोजगारी और राजपूत समाज में प्रचलित आटा–साटा प्रथा के कारण उनका विवाह नहीं हो पाया था. रतनसिंह द्वारा अपनी पुत्री रिंकु कंवर को साटे में देने से इनकार करने पर दोनों भाइयों के भीतर रंजिश बढ़ती गई. यह रंजिश प्रतिशोध में बदली और 3 अप्रैल 2023 की शाम को भयावह रूप में सामने आई, जब डुंगरसिंह और पहाड़सिंह ने कुल्हाड़ियों से हमला कर अपनी भाभी इंदिरा कंवर की हत्या कर दी. बीच बचाव करने आई भतीजी रिंकु कंवर और भतीजे जसवंतसिंह पर भी उन्होंने हमला किया. घटना रोकने आए पड़ोसी हरिसिंह को भी मार डाला. पुलिस टीम के पहुंचने पर भी उन्होंने प्रतिरोध किया, जिसमें ASI सुरेन्द्रसिंह घायल हुए.
सिर्फ 56 दिनों में पूरी हुई जांचमामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इस केस को केस ऑफिसर योजना में शामिल किया. तत्कालीन और वर्तमान थानाधिकारी अरविंद सिंह ने वैज्ञानिक विश्लेषण व पुख्ता साक्ष्य जुटाकर केवल 56 दिनों में अनुसंधान पूरा कर आरोपपत्र पेश किया. यही तेज कार्रवाई इस केस में त्वरित न्याय की नींव बनी.
कोर्ट स्टाफ और अभियोजन की भूमिका सराही गईन्यायालय ने कोर्ट मुंशी अशोक कुमार की दस्तावेज़ प्रबंधन, सतर्कता और 30 गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए प्रशंसा की. अपर लोक अभियोजक भरत आर्य ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी कर दोष सिद्धि सुनिश्चित की. परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता पृथ्वीसिंह ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
परिजनों की आंखों में आंसू, पर राहत का सुकूननिर्णय सुनते ही इंदिरा कंवर के पिता और मृतक हरिसिंह की पत्नी भावुक हो उठे. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी और मेरे पति को जिस क्रूरता से मौत के घाट उतारा गया, उस दर्द ने परिवार को टूटकर रख दिया. ढाई साल से हर दिन न्याय की उम्मीद में जी रहे थे. आज अदालत ने हमारी पुकार सुनी है. अब इंदिरा और हरिसिंह की आत्मा को शांति मिलेगी, अब उन्हें मोक्ष मिलेगा.
न्याय व्यवस्था में बढ़ा विश्वासफैसले के बाद क्षेत्र में लोगों ने कहा कि पुलिस, न्यायालय स्टाफ और अभियोजन की संयुक्त मेहनत ने त्वरित न्याय का उदाहरण पेश किया है. 2 साल 8 माह में मिला यह न्याय लोगों के मन में न्यायपालिका के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
Location :
Jalor,Rajasthan
First Published :
December 10, 2025, 16:38 IST
homecrime
56 दिन की जांच, 30 गवाह, सालों की पीड़ा; मोदरान केस में दोषियों को मौत की सजा!



