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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे खुलते ही बन गया ‘कमाई का कॉरिडोर’, आखिर कैसे?

Delhi Dehradun Expressway opening: अगर आप 2026 में प्रॉपर्टी में निवेश का प्लान बना रहे हैं, तो यह सिर्फ घर खरीदने का समय नहीं, बल्कि सही मौके को पहचानने का समय है. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब केवल एक सड़क नहीं, बल्कि ऐसा इकोनॉमिक कॉरिडोर बन रहा है, जो रास्ते में पड़ने वाले शहरों, कस्बों और गांवों की तस्वीर बदल सकता है. जो लोग आज इन लोकेशन पर निवेश करेंगे, आने वाले 3-5 साल में वही सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं.

एक्सप्रेसवे: इंफ्रास्ट्रक्चर से इकोनॉमिक ग्रोथ तककरीब 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 2026 में शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर 6-7 घंटे से घटाकर करीब 2.5 घंटे कर देगा. लेकिन असली बदलाव सिर्फ समय में नहीं, बल्कि पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था में देखने को मिलेगा.

• 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश
• कई शहरों को सीधी कनेक्टिविटी
• लॉजिस्टिक्स, टूरिज्म और इंडस्ट्री को बढ़ावा
• ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से मजबूत कनेक्शन

अब शहर नहीं, पूरा कॉरिडोर बनेगा निवेश का आधाररियल एस्टेट का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है. अब लोग सिर्फ दिल्ली, नोएडा या गुरुग्राम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे कॉरिडोर में निवेश की सोच रहे हैं.पूर्वी दिल्ली से लेकर देहरादून तक का पूरा बेल्ट अब “ग्रोथ बेल्ट” के रूप में उभर रहा है.

किन इलाकों में बन रहा है बड़ा मौका?

पूर्वी दिल्ली:यह कॉरिडोर का एंट्री पॉइंट है, जहां पहले से मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर है.आने वाले समय में यहां रिटेल, ऑफिस स्पेस और रेंटल हाउसिंग की डिमांड तेजी से बढ़ सकती है.
बागपत:दिल्ली के पास होने के बावजूद अभी भी किफायती है. प्लॉटिंग, फार्महाउस और लो-राइज डेवलपमेंट के लिए यह सबसे हॉट लोकेशन बनता जा रहा है.
मुजफ्फरनगर और शामली:ये शहर अब लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के नए हब बन रहे हैं. ई-कॉमर्स कंपनियों और सप्लाई चेन नेटवर्क की बढ़ती दिलचस्पी यहां साफ दिख रही है.
सहारनपुर:इसे इस कॉरिडोर का “डार्क हॉर्स” माना जा रहा है. यहां इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेक्टर में बड़े निवेश की संभावनाएं बन रही हैं.
देहरादून:अब सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि सेकेंड होम और वीकेंड लिविंग का बड़ा सेंटर बन रहा है.मसूरी रोड और सहस्त्रधारा रोड जैसे इलाकों में तेजी से विकास हो रहा है.

गांवों तक पहुंचेगा विकासइस एक्सप्रेसवे का असर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के गांवों में भी बड़ा बदलाव लाएगा.

• 50 से ज्यादा गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी
• किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच
• छोटे व्यापारियों के लिए नए अवसर
• शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच

एक्सपर्ट क्या कहते हैं? मिगसन ग्रुप के एमडी,यश मिगलानी कहते हैं कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को सिर्फ एक सड़क के रूप में देखना इस प्रोजेक्ट की अहमियत को कम आंकना होगा. यह एक पूरा इकोनॉमिक कॉरिडोर है, जो आने वाले समय में रियल एस्टेट, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और इंडस्ट्रियल सेक्टर को एक साथ गति देगा. खासतौर पर मिड-कॉरिडोर वाले शहर जैसे मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स की डिमांड तेजी से बढ़ेगी. इससे न केवल जमीन की कीमतों में 20-30% तक बढ़ोतरी होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. निवेशकों के लिए यह सही समय है कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर के शुरुआती फेज में ही एंट्री लें, ताकि भविष्य में बेहतर रिटर्न मिल सके.

संचित जैन, डायरेक्टर, सर्वोत्तम इंडिया कहते हैं कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक उभरता हुआ ग्रोथ कॉरिडोर है, जहां अभी निवेश के लिहाज से शुरुआती मौके मौजूद हैं. 2026 ऐसे निवेशकों के लिए सही समय है, जो कम कीमत पर एंट्री लेकर भविष्य में बेहतर रिटर्न चाहते हैं.जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी मजबूत होगी, इस कॉरिडोर में प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. खासकर मिड-कॉरिडोर और देहरादून जैसे क्षेत्रों में लॉन्ग टर्म निवेश करने वालों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है.

अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर, कुशाग्र अंसल का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट हमेशा रियल एस्टेट ग्रोथ का सबसे बड़ा ट्रिगर रहा है और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे इसका ताजा उदाहरण है. इस कॉरिडोर पर आने वाले समय में इंटीग्रेटेड टाउनशिप, प्लॉटेड डेवलपमेंट और मिक्स्ड-यूज प्रोजेक्ट्स तेजी से विकसित होंगे. खास बात यह है कि अब डेवलपमेंट सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रोजेक्ट्स देखने को मिलेंगे. इससे एंड-यूजर और निवेशक दोनों के लिए नए विकल्प तैयार होंगे.

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी ने लोगों की लाइफस्टाइल और रहने की पसंद को बदल दिया है. दिल्ली-एनसीआर के लोग अब भीड़भाड़ से दूर, शांत और नेचर के करीब रहने के विकल्प तलाश रहे हैं. देहरादून और इसके आसपास के इलाके इस ट्रेंड का सबसे बड़ा फायदा उठाने जा रहे हैं. सेकेंड होम, वीकेंड हाउस और रेंटल प्रॉपर्टी की डिमांड लगातार बढ़ रही है. आने वाले समय में यह मार्केट प्रीमियम सेगमेंट में तब्दील हो सकता है, जहां निवेशकों को लंबे समय में अच्छा रिटर्न और स्थिर आय दोनों मिल सकती हैं.

निवेश का ट्रेंड क्या कहता है?• 2-3 साल में 20-40% तक कीमत बढ़ने की संभावना• रेंटल और सेकेंड होम मार्केट मजबूत• छोटे शहर बन रहे बड़े निवेश केंद्र• NCR से बाहर किफायती विकल्पों की मांग तेजी से बढ़ी

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सिर्फ दो शहरों को जोड़ने वाला प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय का “रियल एस्टेट गेम चेंजर” बन सकता है. अगर आप सही समय पर सही जगह निवेश करते हैं, तो यही एक्सप्रेसवे आपके लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा रिटर्न देने वाला कॉरिडोर साबित हो सकता है.

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