अब हर प्लॉट होगा डिजिटल! सरकार देगी 14 अंकों का यूनिक भू-आधार, राजस्थान में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट

Last Updated:April 18, 2026, 12:20 IST
Rajasthan Land Stack Scheme: भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए सरकार अब डिजिटल “लैंड स्टैक” सिस्टम ला रही है. इसमें हर प्लॉट को एक यूनिक 14 अंकों का भू-आधार नंबर दिया जाएगा, जिससे जमीन की पूरी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी. यह प्लेटफॉर्म जीआईएस तकनीक पर आधारित होगा, जहां भूमि रिकॉर्ड, स्वामित्व और उपयोग से जुड़ा डेटा एकीकृत रहेगा. इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. महिला और पुरुष मालिकाना हक का अलग रिकॉर्ड भी रखा जाएगा, जिससे नीतियां बनाने में मदद मिलेगी. राजस्थान के गुमानपुरा गांव में इसका पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसकी सफलता के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा.
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उदयपुर. भूमि और संपत्ति से जुड़े बढ़ते विवादों और धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है. अब कृषि भूमि की तरह ही आवासीय और अकृषि भूखंडों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा. इसके तहत हर प्लॉट को 14 अंकों का एक यूनिक “भू-आधार कार्ड” दिया जाएगा, जिससे जमीन की पहचान और मालिकाना हक स्पष्ट हो सकेगा. यह पहल ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि संसाधन विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे “लैंड स्टैक” प्रोजेक्ट का हिस्सा है.
यह एक जीआईएस आधारित एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जहां जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां एक ही जगह उपलब्ध होंगी. अभी तक लोगों को जमीन के रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन इस सिस्टम से यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी. लैंड स्टैक के जरिए भूमि अभिलेखों को डिजिटाइज और एकीकृत किया जाएगा. इसमें प्लॉट से जुड़ी जानकारी जैसे स्वामित्व, रजिस्ट्रेशन, भवन निर्माण, उपयोगिता सेवाएं आदि शामिल होंगी. हर भूखंड को एक विशिष्ट पहचान संख्या यानी भू-आधार मिलेगा, जिससे रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम होगी.
महिला और पुरुष स्वामित्व का डेटा अलग-अलग रिकॉर्ड होंगे
इस योजना की एक खास बात यह भी है कि इसमें महिला और पुरुष स्वामित्व का डेटा अलग-अलग रिकॉर्ड किया जाएगा. इससे सरकार को महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी का सही आंकड़ा मिलेगा और भविष्य में उनके लिए योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही ऑनलाइन फाइलिंग और रियल टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं से राजस्व न्यायालयों के मामलों में भी तेजी आएगी. डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है. साथ ही हवाई सर्वेक्षण के जरिए दुर्गम क्षेत्रों के नक्शों को भी सटीक बनाया जाएगा. इससे मानचित्रण में लगने वाला समय बचेगा और जमीन से जुड़ी जानकारी अधिक स्पष्ट होगी.
पायलट प्रोजेक्ट में उनियारा तहसील के गुमानपुरा गांव शामिल
इस योजना के तहत राजस्थान में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उनियारा तहसील के गुमानपुरा गांव को शामिल किया गया है. यहां पर प्रोजेक्ट के दौरान आने वाली चुनौतियों की पहचान की जाएगी और उनके समाधान पर काम किया जाएगा. इसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा. इसके लिए राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं, जो विभागीय समन्वय और निगरानी का काम करेंगे. आने वाले समय में लैंड स्टैक के जरिए जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Udaipur,Rajasthan
First Published :
April 18, 2026, 12:20 IST



