संसद में चर्चा से पहले महिलाओं की आवाज- क्या सच में मिलेगा बराबरी का हक?

Last Updated:April 15, 2026, 22:32 IST
Nari Shakti Vandan Bill Public Opinion: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा व विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण प्रस्तावित, भीलवाड़ा की कई महिलाएं इसे ऐतिहासिक कदम बता रही हैं. इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें निर्णय लेने के स्तर पर मजबूत स्थान मिलेगा.
भीलवाड़ा. आज के आधुनिक दौर में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. चाहे वह शिक्षा हो, खेल हो या राजनीतिक क्षेत्र, हर जगह महिलाएं अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं. इसी दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को एक अहम कदम माना जा रहा है, जो खास तौर पर महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया है. हालांकि यह बिल अभी लंबित है और इसे लेकर संसद में चर्चा होने वाली है.
इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें निर्णय लेने के स्तर पर मजबूत स्थान मिलेगा. इस कानून का उद्देश्य सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देना भी है. हालांकि इसके लागू होने की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इसे महिलाओं के अधिकार और समानता की दिशा में एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर महिलाओं की रायलोकल 18 से बातचीत में भीलवाड़ा के अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं ने इस अधिनियम को लेकर अपनी राय साझा की. ज्यादातर महिलाओं का मानना है कि यह कानून राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा. इससे महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी का अवसर मिलेगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है.
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी डॉक्टर रेखा शर्मा ने बताया कि इस अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. उनका कहना है कि जिस तरह महिलाएं शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान दे रही हैं, उसी तरह अब वे राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकेंगी.
राजनीति में भागीदारी से बदलेगा परिदृश्यवहीं कल्याणी फाउंडेशन की अध्यक्ष दिव्या बोरदिया और शिक्षिका ज्योति आशीर्वाद का कहना है कि यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है. उनके अनुसार, यह सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि उन संघर्षों का सम्मान है, जो महिलाएं वर्षों से करती आ रही हैं. पंचायत से लेकर संसद तक अब महिलाएं केवल मौजूदगी ही नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका भी निभा सकेंगी.
राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना किशोरी सेन ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से महिलाएं संसद में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेंगी. उन्होंने कहा कि जैसे वह अपने क्षेत्र में देश का नाम रोशन करना चाहती हैं, वैसे ही अन्य महिलाएं भी राजनीति में आकर देश के विकास में योगदान दे सकती हैं.
About the AuthorAnand Pandey
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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Location :
Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
April 15, 2026, 22:32 IST



