एक ही दिन टूटी दो सांसें… जिगरी दोस्ती ऐसी कि 12 घंटे में दोनों ने ली आखिरी विदाई, भन्दर गांव रह गया सन्न

Last Updated:April 28, 2026, 13:35 IST
Pali News Hindi : पाली जिले के बाली क्षेत्र के भन्दर गांव से दोस्ती की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. 68 वर्षीय धनराज त्रिवेदी और 74 वर्षीय देवराज दवे, जिन्होंने जीवनभर हर सुख-दुख साथ जिया, दुनिया से भी एक ही दिन विदा हो गए. महज 12 घंटे के अंतराल में दोनों दोस्तों की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया और उनकी दोस्ती को एक अमर मिसाल बना दिया.
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Two childhood friends die within 12 hours in pali
पाली : राजस्थान के पाली जिले के बाली क्षेत्र के भन्दर गांव से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने सच्ची दोस्ती के मायने ही बदल दिए. यहां दो बुजुर्ग मित्र – 68 वर्षीय धनराज त्रिवेदी और 74 वर्षीय देवराज दवे – ने न केवल जीवनभर हर पल साथ बिताया, बल्कि दुनिया को अलविदा भी एक ही दिन कहा. महज 12 घंटे के अंतराल में दोनों की मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया.
धनराज त्रिवेदी और देवराज दवे की दोस्ती बचपन से शुरू हुई थी. दोनों ने गांव के स्कूल में साथ पढ़ाई की और वहीं से उनकी गहरी दोस्ती की नींव पड़ी. समय के साथ यह रिश्ता और मजबूत होता गया. युवावस्था में बेहतर भविष्य की तलाश में दोनों मुंबई चले गए, जहां उन्होंने कपड़ों के व्यापार में साथ काम किया. सालों तक उन्होंने एक-दूसरे का साथ निभाया और हर चुनौती का सामना मिलकर किया.
साथ जीने वाले दोस्त, गांव लौटकर फिर हुए करीबउनकी दोस्ती सिर्फ उनके बीच ही सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार भी आपस में घुल-मिल गए. गांव में भी उनके घर एक ही गली में स्थित थे, जिससे उनका रोजाना मिलना-जुलना जारी रहा. कोरोना काल के बाद जब जीवन की रफ्तार बदली, तो दोनों मित्र वापस अपने पैतृक गांव लौट आए और खेती-बाड़ी में समय बिताने लगे. यह उनका सुकून भरा दौर था, जहां वे एक-दूसरे के साथ जीवन के शांत पल जी रहे थे. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. रविवार तड़के करीब 4 बजे धनराज त्रिवेदी को दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनका निधन हो गया. इस दुखद खबर ने पूरे गांव को झकझोर दिया. जैसे ही उनके घनिष्ठ मित्र देवराज दवे को इस घटना की जानकारी मिली, वे गहरे सदमे में आ गए.
दोस्त की मौत का सदमा, 12 घंटे में दूसरे ने भी दम तोड़ाबताया जा रहा है कि वे सुमेरपुर से भन्दर लौट रहे थे, तभी रास्ते में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. हालत गंभीर होने पर उन्हें संभालने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ ही घंटों में उन्होंने भी दम तोड़ दिया. दोनों दोस्तों की मौत के बीच महज 12 घंटे का अंतर था, जिसने इस घटना को और भी भावुक बना दिया. गांव में शोक की लहर दौड़ गई और हर कोई इस अटूट दोस्ती की चर्चा करने लगा. सोमवार का दिन भन्दर गांव के लिए बेहद भारी रहा. परिजनों ने निर्णय लिया कि जीवनभर साथ निभाने वाले इन दोस्तों का अंतिम संस्कार भी एक ही दिन किया जाए.
एक दिन, दो अंतिम संस्कार… दोस्ती ने दिल छू लियाभीषण गर्मी को देखते हुए शवों को सुरक्षित रखने के लिए डी-फ्रीजर की व्यवस्था की गई. सुबह सबसे पहले धनराज त्रिवेदी का अंतिम संस्कार किया गया. इसके बाद, कुछ घंटों के अंतराल में देवराज दवे को भी मुखाग्नि दी गई. श्मशान घाट पर उमड़ी भीड़ और माहौल की खामोशी इस बात की गवाह थी कि यह सिर्फ दो लोगों की विदाई नहीं, बल्कि एक ऐसी दोस्ती का अंत था, जो जीवन और मृत्यु की सीमाओं से परे थी. भन्दर गांव की यह घटना आज हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि सच्ची दोस्ती सिर्फ साथ जीने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह अंत तक साथ निभाने का वादा भी निभाती है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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First Published :
April 28, 2026, 13:35 IST



