कोटे की कच्ची कैरी की बढ़ती डिमांड! स्वाद ऐसा कि नाम सुनते ही टूट पड़ते हैं लोग, अचार के लिए तो है सबसे बेस्ट

Last Updated:April 28, 2026, 12:55 IST
Karauli News Hindi : राजस्थान के करौली जिले का छोटा सा कोटे गांव आज अपनी खास कैरी के लिए देशभर में पहचान बना चुका है. यहां 10 हजार से ज्यादा कच्चे आम के पेड़ हैं, जिनका स्वाद बेहद अलग और लाजवाब है. अचार बनाने के लिए इसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है. यह कैरी गांव की पहचान और लोगों की आजीविका का अहम हिस्सा बन चुकी है.
करौली जिले का छोटा सा कोटे गांव आज अपनी एक खास पहचान के कारण राजस्थान ही नहीं देश में अपनी एक खास पहचान रखता है. यहां की पहचान है यहां के कच्चे आम यानी कैरी. इस गांव की मिट्टी में जैसे कैरी की खुशबू रची-बसी हो. चारों ओर नजर डालें तो दूर-दूर तक सिर्फ आम के पेड़ ही दिखाई देते हैं, मानो प्रकृति ने इस गांव को खास तौर पर कैरी के लिए ही संवार दिया हो.
कोटे गांव में आज भी 10 हजार से ज्यादा कच्चे आम के पेड़ मौजूद हैं. खास बात यह है कि यहां की कैरी का स्वाद इतना अलग और लाजवाब है कि जो एक बार इसे चख लेता है, वह इसे कभी भूल नहीं पाता. यही वजह है कि इस गांव की कैरी केवल फल नहीं, बल्कि एक ब्रांड बन चुकी है, जो नाम से बाजार में बिकती है.
गांव के स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे सवाई माधोपुर का अमरूद अपनी खास पहचान रखता है, उसी तरह कोटे गांव की कैरी भी पूरे राजस्थान में मशहूर है. बाजारों में जब कोटे की कैरी नाम से आवाज लगती है, लोग बिना मोलभाव किए इसे खरीदना पसंद करते हैं.खास तौर पर अचार बनाने के लिए इस कैरी की मांग सबसे ज्यादा रहती है.
Add as Preferred Source on Google
कोटे गांव की यह कैरी केवल एक फल नहीं, बल्कि यहां की पहचान, परंपरा और लोगों की मेहनत का प्रतीक बन चुकी है. अगर इसी तरह इसका संरक्षण और प्रचार होता रहा, तो आने वाले समय में यह कैरी राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना सकती है.
इस गांव की मिट्टी और जलवायु कच्चे आम के लिए बेहद अनुकूल है. यही कारण है कि यहां की कैरी में एक खास तरह का स्वाद और गुणवत्ता देखने को मिलती है, जो अचार के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है.
गांव के निवासी गोलू बताते हैं कि यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही है. हालांकि समय के साथ कुछ पेड़ कम जरूर हुए हैं, लेकिन आज भी हजारों की संख्या में पेड़ गांव की पहचान को जिंदा रखे हुए हैं. हर साल यहां कच्चे आम की अच्छी पैदावार होती है, जिससे गांव के कई परिवारों की आजीविका भी जुड़ी हुई है.
गांव की महिलाओं के लिए भी यह कैरी खास मायने रखती है. भमरो देवी बताती हैं कि यहां की कैरी से बना अचार सालभर तक खराब नहीं होता. इसका खट्टा-तीखा स्वाद इतना दमदार होता है कि खाने का जायका ही बदल जाता है. यही वजह है कि दूर-दराज के लोग खुद गांव आकर कैरी खरीदते हैं और घर ले जाकर अचार बनाते हैं.
First Published :
April 28, 2026, 12:55 IST



