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107 Year Old Mystery Discovered: Divers discover old mystery| 107 साल नींद से जागकर लौटा वो 1918 से हो रही थी तलाश बैठा था गहराइयों में

Last Updated:May 01, 2026, 14:12 IST

107 Year Old Mystery Discovered: कई बार ऐसा होता है कोई रहस्य या तो समुद्र की गहराइयों में या फिर जमीन के नीचे दबा रह जाता है. फिर वो अचानक एक दिन हमारे सामने आ जाता है. उसके साथ ही वो पुरानी कहानियां भी उजागर हो जाती हैं, जो उसके साथ जुड़ी होंगी

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107 साल नींद से जागकर लौटा वो, 1918 से हो रही थी तलाश, बैठा था गहराई में Zoom107 साल पुराना रहस्य आया सामने.

26 सितंबर 1918 … शाम का वक्त, जब दक्षिणी इंग्लैंड के तट के पास एक जर्मन पनडुब्बी ने अमेरिका के एक जहाज को इस जहाज को निशाना बनाया. दुश्मन की नजर में आते ही एक टॉरपीडो दागा गया. कुछ ही पलों में तेज धमाका हुआ और सिर्फ तीन मिनट के अंदर अमेरिका का जहाज ‘टाम्पा’ समंदर की गहराई में समा गया. जहाज पर सवार सभी 131 लोग उसी के साथ हमेशा के लिए खो गए. बहुत तलाश हुई लेकिन समंदर ही उनकी कब्र बन गया.

यह हादसा उस समय अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ा नौसैनिक नुकसान साबित हुआ. इसके बाद सालों तक यह जहाज और उसमें सवार लोगों का कोई सुराग नहीं मिला, पर अब 107 साल बाद, इस कहानी का अधूरा अध्याय पूरा हो गया है. ब्रिटेन की Gasperados Dive Team नाम की एक गोताखोर टीम ने कॉर्नवाल तट से करीब 80 किलोमीटर दूर, 91 मीटर गहराई में इस मलबे को खोज निकाला. यह टीम पिछले तीन साल से लगातार इसकी तलाश कर रही थी. कई असफल कोशिशों के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिली.

कैसे बना इतिहास का काला अध्याय?

इतिहास में टाम्पा के शौर्य के बारे में बताया गया है. ‘टाम्पा’ उस दिन एक काफिले को सुरक्षा दे रहा था, लेकिन कोयले की कमी के कारण उसे बीच रास्ते से ही वेल्स की ओर लौटना पड़ा. इसी दौरान जर्मन पनडुब्बी UB-41 ने उस पर हमला कर दिया. टॉरपीडो के बाद हुए दूसरे विस्फोट ने जहाज को पूरी तरह तबाह कर दिया.
इस जहाज में 111 अमेरिकी कोस्ट गार्ड कर्मी, 4 नौसेना के जवान और 16 ब्रिटिश नागरिक सवार थे. इन सभी की मौत ने उस समय पूरे अमेरिका को झकझोर दिया था. अब जब इस जहाज का मलबा मिल गया है, तो इसे शहीदों का अंतिम विश्राम स्थल माना जा रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह खोज उन लोगों की कुर्बानी को याद करने का एक अहम मौका है.

अब जाकर सामने आया रहस्य

आने वाले समय में आधुनिक तकनीक और रोबोट की मदद से इस मलबे का और गहराई से अध्ययन किया जाएगा. एक बात साफ है. समंदर ने 107 साल बाद सही, पर इतिहास का यह दर्दनाक सच आखिरकार दुनिया के सामने ला ही दिया. प्रथम विश्व युद्ध का एक दर्दनाक रहस्य, जो एक सदी से भी ज्यादा समय तक समंदर की गहराइयों में छिपा रहा, वो दुनिया के सामने चीख-चीखकर अपनी कहानी कह रहा है. भले ही उसमें मौजूद लोगों का पता कभी नहीं चला लेकिन ये मलबा उनकी कहानियां कहता रहेगा.

About the AuthorPrateeti Pandey

में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें

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