एक परिवार, दो साल और ‘डॉक्टर’ बनने का खेल… अब जयपुर का बीवाल परिवार CBI के रडार पर

जयपुर: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और हैरान कर देने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. अब जांच एजेंसी के रडार पर जयपुर के जामवारामगढ़ का बीवाल परिवार आ गया है, जहां एक ही परिवार के पांच बच्चों के डॉक्टर बनने पर सवाल खड़े हो गए हैं. CBI अब यह जांच कर रही है कि क्या वर्ष 2025 में भी इसी परिवार ने फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हासिल किया था.
CBI सूत्रों के मुताबिक, जामवारामगढ़ निवासी दिनेश बीवाल उर्फ ‘दिनेश लंबे’ इस पूरे नेटवर्क का मुख्य किरदार है. जांच में सामने आया है कि दिनेश काफी समय से परीक्षाओं के पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के संपर्क में था. इस साल उसने अपने भाई मांगीलाल बीवाल के साथ मिलकर NEET पेपर लीक की साजिश रची थी. जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों भाइयों ने मिलकर छात्रों तक पेपर पहुंचाने और मोटी रकम कमाने का नेटवर्क तैयार किया था.
नीट पेपर लीक मामले में दौसा से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां मुख्य आरोपी मांगीलाल बिवाल की बेटी प्रगति बिवाल के तार इस घोटाले से जुड़ते दिख रहे हैं. प्रगति वर्तमान में दौसा के पंडित नवल किशोर शर्मा मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है, लेकिन पेपर लीक कांड में पिता का नाम आने के बाद से ही वह कॉलेज से गायब है. जानकारी के अनुसार, प्रगति ने कल ही कॉलेज प्रशासन को घर जाने का प्रार्थना पत्र दिया था और आज वह अपनी क्लास में भी उपस्थित नहीं हुई. बिवाल ब्रदर्स के परिवार का नीट कनेक्शन काफी गहरा है, क्योंकि वर्ष 2024 और 2025 के बीच उनके परिवार के कुल चार सदस्यों (तीन बेटियां और एक बेटा) का चयन नीट में हुआ था. इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए सीबीआई की टीम जल्द ही दौसा मेडिकल कॉलेज पहुंचकर प्रगति से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की जांच कर सकती है, जिसका इनपुट कॉलेज प्रशासन को मिल चुका है.
खुद बना डॉक्टर, फिर बना ‘मिडलमैन’इस पूरे मामले में सबसे मुख्य नाम विकास का सामने आया है, जो मांगीलाल का बेटा है. CBI जांच में खुलासा हुआ कि विकास ने पिछले साल 2025 में खुद कथित तौर पर पेपर खरीदकर NEET पास किया था और वर्तमान में सवाई माधोपुर से MBBS की पढ़ाई कर रहा है. बताया जा रहा है कि विकास ने ही इस साल गुरुग्राम के यश यादव से पेपर की डील की और उसे अपने पिता मांगीलाल और चाचा दिनेश तक पहुंचाया. इसके बाद यह पेपर आगे छात्रों में फैलाया गया.
ऋषि और सीकर का कोचिंग नेटवर्कपेपर लीक का सबसे बड़ा केंद्र सीकर बनकर सामने आया है. जांच के अनुसार दिनेश के बेटे ऋषि, जो सीकर में NEET की तैयारी कर रहा था, उस तक यह पेपर पहुंचाया गया था.
ऋषि ने अपने दोस्तों का एक ग्रुप बनाकर उन्हें भी पेपर बेचा. बाद में यह पेपर राकेश नामक कंसल्टेंसी संचालक तक पहुंचा और वहां से सीकर के कई कोचिंग नेटवर्क में फैला. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में लगी हुई हैं कि इस नेटवर्क से कितने छात्र जुड़े हुए थे.
एक ही परिवार के 5 बच्चों का चयन जांच के घेरे मेंCBI को सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह लगी कि साल 2025 में इसी परिवार के पांच बच्चों का सिलेक्शन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हुआ था. इनमें विकास के अलावा परिवार की तीन अन्य बेटियां और रिश्तेदार शामिल हैं. मिली जानकारी के अनुसार, दिनेश लंबे ने नवंबर 2025 में सोशल मीडिया पर इस सफलता का जश्न भी मनाया था और इसे परिवार की उपलब्धि बताया था. लेकिन अब यही चयन जांच एजेंसियों के लिए शक का बड़ा आधार बना है.
यश यादव और CLC कनेक्शन ने खोली परतेंजांच में गुरुग्राम निवासी यश यादव का नाम भी सामने आया है. बताया जा रहा है कि यश और विकास दोनों सीकर के CLC कोचिंग सेंटर में साथ पढ़ते थे.
हालांकि यश खुद NEET पास नहीं कर पाया, लेकिन वह पेपर माफियाओं और बीवाल परिवार के बीच की मुख्य कड़ी बन हुआ है. इसी दोस्ती के जरिए यह परिवार पेपर लीक सिंडिकेट तक पहुंचा है.
CBI जोड़ रहीकई कड़ियांCBI अब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, सोशल मीडिया चैट और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है. एजेंसी को शक है कि यह नेटवर्क सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ था.



