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दुनिया का कौन सा शहर आग लगने की घटनाओं से सबसे बेहतर तरीके से निपटता है

दुनिया में कोई शहर अगर आग लगने की घटनाओं को तेजी से रोकता है, तेजी से मौके पर पहुंचता है, तेजी से क्षमताएं दिखाता है, उसके दमकल कर्मचारियों की मिसाल दी जाती है, उन्होंने जो सिस्टम विकसित किया है, उसे बेमिसाल कहा जाता है… तो बताइए वो शहर कौन होगा, जो फायरसेफ्टी में नंबर वन है.

ऐसे शहर के तौर पर दुनियाभर में एक ही नाम लिया जाता है, वो है तोक्यो. इस शहर को दुनिया का सबसे बेहतरीन अग्नि-सुरक्षित शहर माना जाता है, हालांकि उसने इसके सबक सदियों के विनाशकारी अनुभवों से लिया है. ये वो शहर रहा है जहां भूकंप के बाद खूब आग लग जाया करती थी.

1923 के भीषण भूकंप और उसके बाद दूसरे वर्ल्ड वार में हुई बमबारी में आग ने पूरे तोक्यो को तबाह कर दिया था. जापान में आमतौर पर लकड़ी के ही मकान बनते हैं. इन आपदाओं ने स्पष्ट कर दिया कि जापान में आग से बचाव के इंतजाम पर्याप्त नहीं है. शहर को इस तरह डिजाइन करना होगा कि आग फैले ही नहीं. इसके बाद टोक्यो ने ‘आग’ को शहरी विकास का केंद्रीय मुद्दा बनाया.

सबसे पहले यहां के असरदार और बहुत तेज तोक्यो फायर डिपार्टमेंट की बात करते हैं. इसे दुनिया का सबसे बड़ा अग्निशमन विभाग भी माना जाता है. ये अपने आकार, संगठनात्मक क्षमता और आधुनिक तकनीक के जरिए ये बहुत असरदार फोर्स के रूप में काम करता है.

तोक्यो फायर डिपार्टमेंट के पास विशाल संसाधन और व्यापक नेटवर्क है, इसे दुनिया में सबसे बेहतरीन फायर डिपार्टमेंट माना जाता है. AI Photo

सबसे बड़ा फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट

तोक्यो फायर डिपार्टमेंट के पास विशाल संसाधन और व्यापक नेटवर्क है, जो विश्व के सबसे घनी आबादी वाले शहर तोक्यो की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. इसके पास 18,839 कर्मचारी हैं, जो दुनिया के किसी भी अन्य अग्निशमन विभाग से अधिक हैं. तोक्यो में 81 फायर स्टेशन हैं, जो बखूबी पूरे महानगर की स्थिति को संभालते हैं.

सालाना बजट 1500 करोड़ रुपए

इस डिपार्टमेंट वार्षिक बजट करीब 1,500 करोड़ रुपये है, जो भारत के इसी विभाग की तुलना में कई गुना ज्यादा होगा. ये बजट उसकी क्षमताओं और संसाधनों में किए गए भारी निवेश को दिखाता है, ये भी बताता कि जापान सरकार इसे लेकर कितनी गंभीर रहती है. उपकरणों की उनके पास कमी नहीं. 673 फायर इंजन, 91 सीढ़ी वाहन, 393 एम्बुलेंस, 50 रेस्क्यू वाहन, 9 जलयान और 7 विमान शामिल हैं.

तोक्यो में पहले बहुत आग लगती थी लेकिन अब तोक्यो फायर डिपार्टमेंट इतना मजबूत और संसाधनयुक्त है कि वो 90 फीसदी मामलों में आग को ज्यादा आगे बढ़ने ही नहीं देता. AI Photo

भारत में क्या स्थिति

भारत में फायर ब्रिगेड सर्विस राज्य और नगरपालिका विषय है, इसलिए इसका सालाना बजट राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग होता है.वैसे केंद्र सरकार ने राज्यों की फायर सर्विस के आधुनिकीकरण के लिए ₹5,000 करोड़ का प्रावधान रखा था, जो 2021-22 से लेकर 2025-26 तक की अवधि के लिए है. 31 जनवरी 2026 में इस योजना के तहत राज्यों को ₹1,798.20 करोड़ जारी किए जा चुके थे. दिल्ली फायर सर्विस का वर्ष 2025-26 का बजट ₹125 करोड़ का था.

तोक्यो फायर ब्रिगेड के कई विशेष दस्ते भी

तोक्यो फायर डिपार्टमेंट सुव्यवस्थित संगठनात्मक ढांचे के तौर पर काम करता है. तोक्यो को 10 डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर में विभाजित किया गया है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में संचालन का प्रबंधन करते हैं. ये स्थानीय स्तर पर कमांड और तालमेल को बेहतर बनाता है. इसकी कई विशेष इकाइयां भी हैं. जबकि 5 दस्ते उन्नत तकनीकी बचाव कार्यों में माहिर हैं. जो भूकंपीय आग, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदाएं, और भूस्खलन से जुड़े कामों को करते हैं. इसके साथ एक खास मोबिलिटी एंबुलेंस टास्क फोर्स भी जुड़ी रहती है.

तोक्यो शहर में अब बड़े पैमाने पर अग्निरोधक इमारतों की ‘दीवारें’ खड़ी हैं. इसका सबसे अनोखा उदाहरण हिगाशी-शिराहिगे आवासीय परिसर है. AI Photo

शहर में बड़े पैमाने पर अग्निरोधी दीवारें

टोक्यो की सबसे बड़ी ताकत उसका भौतिक बुनियादी ढांचा भी है, जो आग को रोकने के लिए बनाया गया है. शहर ने बड़े पैमाने पर अग्निरोधक इमारतों की ‘दीवारें’ खड़ी की हैं. इसका सबसे अनोखा उदाहरण हिगाशी-शिराहिगे आवासीय परिसर है, जो 1.2 किलोमीटर लंबी 18 मंजिला इमारतों की एक श्रृंखला है. इसे सुमिदा नदी के किनारे एक विशाल अग्नि अवरोधक के रूप में डिजाइन किया गया है, जो पुराने लकड़ी के मोहल्लों को आधुनिक इमारतों से अलग करता है.

लकड़ी के मकान कम किए जा रहे

सरकार घनी आबादी वाले लकड़ी के इलाकों को कम करने के लिए लगातार काम कर रही है. 2010 के बाद से इन क्षेत्रों में 50% से अधिक की कमी आई है. सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है. खाली जगहों को आपदा रोकथाम पार्कों में बदला जा रहा है, जो आग फैलने पर बफर जोन का काम करते हैं. इन पार्कों में बेंचों के नीचे पानी की नली और मैनहोल जो आपातकाल में शौचालय बन सकते हैं, जैसी सुविधाएं हैं.

तोक्यो हर साल कितनी आग की घटनाएं

टोक्यो में करीब 4,300 आग की घटनाएं सालाना होती हैं. इनमें बहुत कम बड़ी आग का रूप ले पाती हैं. औसतन हर आग की घटना में जला हुआ क्षेत्र केवल करीब 4 वर्ग मीटर पड़ता है, जो दिखाता है कि आग अक्सर एक कमरे या सीमित हिस्से तक ही रहती है.

एक जापानी अध्ययन में पाया गया कि यदि आग छत तक फैलने से पहले बुझाने की कोशिश शुरू हो जाए, तो अग्निशामक यंत्र, बाल्टी या पानी की नली से आग बुझाने की सफलता दर 50% से अधिक होती है. स्प्रिंकलर और स्वचालित अलार्म इसे और बेहतर बनाते हैं. मोटे तौर पर समझें तो तोक्यो में औसतन रोज 12 आग लगने की घटनाएं रिपोर्ट होती हैं, इसमें से 90 फीसदी आग बड़ी शहरी आपदा में नहीं बदलती, बुझा ली जाती है. अधिकतर घटनाएं कुछ मिनटों से लेकर एक घंटे के भीतर नियंत्रण में आ जाती हैं. बहुत कम मामलों में दर्जनों फायर इंजन या कई घंटों तक चलने वाले अभियान की जरूरत पड़ती है. वहां का लक्ष्य “बड़ी आग को बुझाना” नहीं बल्कि “आग को बड़ी बनने ही न देना” है.

इसके आग से रोकथाम के काम में सिंगापुर, कोपेनहेगेन, न्यू यॉर्क सिटी, सियोल, ओसाका जैसे शहर भी आग से निपटने काफी कारगर माने जाते हैे. भारत का कोई भी शहर अभी तोक्यो की श्रेणी में नहीं है. अलबत्ता मुंबई शहर को भारत का सबसे सक्षम फायर सर्विस नेटवर्क वाला शहर माना जाता है.

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