AICTE Orders Closure of 58 Engineering Colleges: इंजीनियरिंग कॉलेजों पर बड़ा एक्शन! AICTE ने बंद किए 58 संस्थान और 950 कोर्स

Last Updated:July 06, 2026, 12:05 IST
AICTE Orders Closure of 58 Engineering Colleges: इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर! एआईसीटीई ने देशभर के 58 इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया है. यूपी और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा गाज गिरी है. जानिए इन इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रहे स्टूडेंट्स का अब क्या होगा और यह फैसला क्यों लिया गया.AICTE Orders Closure of 58 Engineering Colleges: देशभर के कई इंजीनियरिंग कॉलेज बंद कर दिए गए हैं
नई दिल्ली (Engineering Colleges Shut). अगर आप इंजीनियरिंग स्टूडेंट हैं या इस साल टेक्निकल कॉलेज में एडमिशन लेने वाले हैं तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है. ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान देशभर के 58 इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेज बंद करने का आदेश जारी किया है. अचानक आई इस खबर के बाद से हर कोई परेशान है. सब जानने को बेताब हैं कि आखिर यह फैसला क्यों लिया गया.
राहत की बात सिर्फ इतनी है कि जिन छात्रों का एडमिशन पहले से इन कॉलेजों में है, उन्हें बीच में नहीं छोड़ा जाएगा. AICTE ने साफ किया है कि इन संस्थानों को Progressive Closure के तहत बंद किया जा रहा है. इसका मतलब है कि कॉलेज पूरी तरह ठप नहीं होंगे, बस नए एडमिशन लेने पर तुरंत रोक लगा दी गई है. जो पहले से वहां पढ़ाई कर रहे हैं, वे अपना कोर्स और डिग्री बिना रुकावट के पूरी कर सकेंगे. जानिए आखिर किस राज्य के कितने कॉलेजों पर गाज गिरी है और 950 से ज्यादा कोर्सेज बंद क्यों करने पड़े.
यूपी और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा गाज, देखें अपने राज्य का हाल
AICTE के सीनियर अधिकारी के मुताबिक, बंद होने वाले इन 58 कॉलेजों में सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की है. इन दोनों ही राज्यों में 12-12 कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया गया है. इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है, जहां 8 कॉलेज बंद हुए हैं. तेलंगाना और पंजाब में 4-4, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में 3-3, जबकि गुजरात और कर्नाटक में 2-2 कॉलेज बंद किए गए हैं. इसके अलावा हरियाणा, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी 1-1 कॉलेज पर ताला लटका है.
सरकारी या प्राइवेट: किन कॉलेजों पर गिरी बिजली?
इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा नुकसान प्राइवेट कॉलेजों को हुआ है. आंकड़ों पर नजर डालें तो बंद होने वाले कुल 58 संस्थानों में से 55 कॉलेज प्राइवेट यानी निजी फंड से चलने वाले थे. सिर्फ 3 कॉलेज सरकारी सहायता प्राप्त (Government-Aided) थे. इससे स्पष्ट हो जाता है कि प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में सुविधाओं और नियमों को लेकर कितनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही थी, जिस पर अब नकेल कसी गई है.
सिर्फ कॉलेज ही नहीं, 950 से ज्यादा कोर्स भी बंद
एआईसीटीई के अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि यह कार्रवाई सिर्फ कॉलेज बंद करने तक सीमित नहीं है. इसी दौरान देशभर के अलग-अलग तकनीकी संस्थानों में चल रहे 950 से ज्यादा कोर्सेज (Technical and Engineering Courses) को भी हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. जिन कोर्सेज में स्टूडेंट्स की रुचि नहीं थी या जिन्हें चलाने के लिए कॉलेज के पास सही रिसोर्स नहीं थे, उन्हें लिस्ट से बाहर कर दिया गया है.
आखिर क्यों बंद करने पड़े इतने सारे कॉलेज?
AICTE ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कॉलेज को बंद करने का फैसला अचानक नहीं लिया जाता. इसके पीछे कई बड़ी वजहें होती हैं:
स्टूडेंट्स की कमी: कई कॉलेजों में सीटें खाली पड़ी थीं और उन्हें कोई पूछने वाला नहीं था.
प्रोफेसर्स की कमी: नियमों के मुताबिक जितने योग्य फैकल्टी और प्रोफेसर्स होने चाहिए, कॉलेज उन्हें रखने में नाकाम रहे.
खराब इंफ्रास्ट्रक्चर: लैब, लाइब्रेरी और क्लासरूम जैसी बेसिक सुविधाएं नियमों के मुताबिक नहीं थीं.
About the AuthorDeepali PorwalSenior Sub Editor
Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें
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