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हरियाणाः घटना के दौरान युवक ने पी थी शराब, थाने में नहीं हुआ था कुकुर्म, कैंसर वाली बात भी झूठ, केवल पुलिस वालों ने पीटा था

कुरुक्षेत्र. हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कथित कैंसर पीड़ित मरीज के साथ यौन शोषण मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. एसपी कुरुक्षेत्र चंद्र मोहन शर्मा ने बड़ा खुलासा किया है. लाडवा थाने के पुलिस कर्मियों पर आरोप लगे थे और तीन जवानों सस्पेंड किया गया.

एसपी कुरुक्षेत्र चंद्र मोहन  ने बताया कि पंद्रह दिन इस मामले को हो चुके हैं और पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट के मामले में लाडवा थाने के तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

सोमवार को एसपी ने बताया कि 17 औ 18 जून की रात की यह घटना हुई थी और नाके पर युवक को शराब पीने की वजह से डिटेन किया था और मेडिकल में शराब पीने की पुष्टि हुई है. एसपी ने कहा कि पूरी रात को युवक को लॉकअप में रखा गया था और सीसीटीवी में यह सब कैद है. युवक को केवल 10 मिनट के लिए लॉकअप से निकाला गया था. हालांकि, उसके साथ मारपीट की गई थी. क्योंकि उसने पुलिस कर्मियों के साथ गाली गलौज और उल्टा सीधा कहा था.

एसपी ने बताया कि युवक को बोन कैंसर नहीं था और पीजीआई तक से हमने वैरिफाई किया है और थाने में कुकुर्म नहीं हुआ. कपड़ों और मेडिकल जांच में कुछ नहीं हुआ. यहां तक कि पुलिस कर्मियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया और उसके रिजल्ट में भी कुकुर्म नहीं हुआ था, यह बात सामने आई. एसपी बताते हैं कि आरोप लगाने वाले युवक ने लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने से इंकार किया है. एसपी ने बताया कि जांच के दौरान लिए गए स्वैब नमूनों और कपड़ों की डीएनए जांच में यौन उत्पीड़न के कोई संकेत नहीं मिले. उन्होंने कहा कि आरोपित सभी पुलिसकर्मियों ने स्वेच्छा से लाई डिटेक्टर (पॉलीग्राफ) परीक्षण कराया और उसके परिणामों ने उनके इन आरोपों से इनकार का समर्थन किया.

पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आरोप सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और निष्पक्ष जांच के लिए लाडवा के पुलिस उपाधीक्षक की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया गया.

उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक जांच, डीएनए परीक्षण तथा अन्य वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया गया. उन्होंने बताया कि मारपीट में कथित रूप से शामिल पाए गए तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शिकायतकर्ता ने शुरुआत में चिकित्सकीय परीक्षण कराने से इनकार किया था, हालांकि बाद में विधिवत गठित चिकित्सा बोर्ड ने उसकी जांच की. उन्होंने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई चिकित्सकीय रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि शिकायतकर्ता हड्डी के कैंसर से पीड़ित था या उसने कीमोथेरेपी कराई थी.

खून निकलने के आरोपों पर एसपी ने कहा कि फोरेंसिक जांच और सीसीटीवी फुटेज में हवालात, थाने के कमरों या घटना वाली रात शिकायतकर्ता के कपड़ों पर खून के कोई निशान नहीं मिले. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चिकित्सा बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि अगली सुबह देखा गया रक्तस्राव पहले से मौजूद गुदा विदर (एनल फिशर), कब्ज और बवासीर की समस्या के कारण हुआ था, न कि मारपीट या यौन उत्पीड़न के कारण.

उन्होंने कहा कि जांच में कुछ पुलिसकर्मियों की ओर से शिकायतकर्ता के साथ मारपीट किए जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन हिरासत में यौन उत्पीड़न या शिकायतकर्ता के हड्डी के कैंसर से पीड़ित होने के दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक या चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं मिला.

पुलिस अधीक्षक ने मीडिया से भी संवेदनशील आपराधिक मामलों की खबरें प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करने और संयम बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि अपुष्ट खबरों से संबंधित व्यक्तियों और उनके परिवारों की प्रतिष्ठा तथा सामाजिक जीवन को नुकसान पहुंच सकता है. मीडिया की अपुष्ट खबरों पर एसपी ने नाराजगी जताई.

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