National

Hormuz Crisis | Indian Ship Hormuz Crisis | होर्मुज में अमेरिका और ईरान खूब दाग रहे थे बम, तब कैसे सुरक्षित निकल आए भारत के 60 जहाज? सरकार ने बताया आज

अमेरिका और ईरान के बीच जंग से खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए तनाव के दौरान भारत ने अपने सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने में बड़ी सफलता हासिल की. संसद में सरकार ने बताया कि सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद भारत के लिए सामान लेकर आने वाले 60 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरे. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) को सुरक्षित वापस लाया गया.

सरकार ने पहली बार संसद में इस पूरे ऑपरेशन से जुड़े आधिकारिक आंकड़े साझा किए हैं. इन आंकड़ों से पता चलता है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत ने अपनी एनर्जी सप्लाई और समुद्री कारोबार को प्रभावित नहीं होने दिया.

दुनिया का सबसे अहम समुद्री रूट है होर्मुज

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले इस संकरे रास्ते से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है.

भारत के लिए यह मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इस रास्ते से आयात करता है. इसमें बड़ा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता है.

ऐसे में अगर इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक बाधा आती, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ सकता था, जहाजों का बीमा महंगा हो सकता था और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता था.

हालांकि सरकार ने बताया कि तमाम सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद भारत के लिए रवाना हुए सभी 60 मालवाहक जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचने में सफल रहे. इससे साफ है कि संकट के दौरान भी भारत की सप्लाई चेन लगभग सामान्य बनी रही.

हजारों भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया

संसद में सरकार ने यह भी बताया कि इस संकट के दौरान 3,972 भारतीय नाविकों को खाड़ी क्षेत्र से सुरक्षित वापस लाया गया. भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां से बड़ी संख्या में मर्चेंट नेवी के कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करते हैं. क्षेत्र में संघर्ष या युद्ध जैसी स्थिति बनने पर ये नाविक सीधे खतरे वाले समुद्री इलाकों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं, भले ही उनका किसी सैन्य अभियान से कोई संबंध न हो.

24 घंटे एक्टिव रहा कंट्रोल रूम

सरकार ने बताया कि संकट शुरू होते ही 24 घंटे काम करने वाला विशेष कंट्रोल रूम और महानिदेशक शिपिंग का कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) लगातार सक्रिय रखा गया. इमरजेंसी व्यवस्था के तहत सभी जहाजों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने सबसे नजदीकी भारतीय नौसेना या सहयोगी देशों के युद्धपोत से VHF चैनल-16 पर संपर्क करें. साथ ही महानिदेशक शिपिंग कम्युनिकेशन सेंटर, इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) को भी तुरंत जानकारी दें.

हजारों कॉल और ईमेल से संभाला गया संकट

सरकार के अनुसार, कंट्रोल रूम शुरू होने के बाद से अब तक 15,771 टेलीफोन कॉल और 36,499 ईमेल प्राप्त हुए. ये संदेश भारतीय नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों की ओर से आए थे.

इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि खाड़ी संकट के दौरान कितनी बड़ी संख्या में लोग सहायता और जानकारी के लिए सरकार से संपर्क कर रहे थे. साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि संकट के दौरान लगातार समन्वय और निगरानी के जरिए भारत ने अपने समुद्री हितों, व्यापार और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj