क्या खतरे में है झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार? जानिए छात्रों की मांगें, विधानसभा का घेराव और गठबंधन का गणित!

रांची. झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन 16-17 दिनों चल रहा है. अभी तक शांति से चल रहा भूख हड़ताल और आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह कभी भी उग्र रूप ले सकता है. राजधानी रांची में भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के बाद छात्र संगठनों ने 10 अगस्त को राज्य विधानसभा के घेराव का आह्वान किया है. इस बड़े छात्र आंदोलन के कारण राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या युवाओं के इस आक्रोश से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार गिर सकती है या उस पर कोई संवैधानिक संकट आ सकता है?
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या-क्या हैं?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC CGL) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की मांगें कई हैं. पहला, हालिया भर्ती परीक्षाओं में हुए पेपर लीक, ओएमआर (OMR) शीट में कथित गड़बड़ियों और मूल्यांकन त्रुटियों की सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराई जाए. दूसरा, धांधली के आरोपों से घिरी परीक्षाओं को रद्द कर पूरी शुचिता और नए सिरे से परीक्षाएं आयोजित की जाएं. तीसरा, पेपर लीक में शामिल भू-माफिया और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए. मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि सरकार जांच के प्रति संवेदनशील है और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करेगी, हालांकि छात्र ठोस लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं.
JPSC Protest में देवेंद्र महतो के साथ कौन-कौन से 7 युवा भूख हड़ताल पर हैं? (फोटो PTI)
क्या छात्र आंदोलन से हेमंत सरकार गिर सकती है?
केवल छात्र आंदोलन के कारण हेमंत सोरेन सरकार के गिरने का कोई तात्कालिक संवैधानिक या तकनीकी खतरा फिलहाल नहीं है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारें विधानसभा में बहुमत नंबर गेम के आधार पर चलती या गिरती हैं. छात्र आंदोलन से सरकार पर भारी नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक दबाव बनता है तथा चुनावी साख को नुकसान पहुंचता है, लेकिन जब तक विधानसभा के भीतर गठबंधन के सहयोगी दल समर्थन वापस न लें, सरकार नहीं गिरती.
हेमंत सरकार में गठबंधन का गणित और सहयोगी दल
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं, जहां बहुमत का जादूई आंकड़ा 41 सीटों का है. वर्तमान में हेमंत सोरेन को सदन में पूर्ण बहुमत है. सरकार के पास 56 सीटों का भारी बहुमत हासिल है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16 औऱ राष्ट्रीय जनता दल 4 विधायक हैं. वहीं, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के 2 सीटें हैं. वहीं बीजेपी के पास 21 और अन्य पार्टियों के पास 4 सीटें हैं.
बिहार में छात्रों के मुद्दे पर मुखर तेजस्वी यादव झारखंड के JPSC-JSSC आंदोलन पर चुप क्यों हैं? (फोटो PTI)
किसी पार्टी के समर्थन वापस लेने से सरकार गिर सकती है?
गणित के हिसाब से यदि आरजेडी 4 सीटें या सीपीआई-एमएल के 2 विधायकों ने छात्रों के इस आंदोलन को समर्थन दिया है. लेकिन इनसे समर्थन वापस लेने पर भी सरकार नहीं गिरेगी. क्योंकि तब भी जेएमएम के पास 34 और कांग्रेस के 16 को मिलाकर सत्तारूढ़ दल के पास 50 सीटें बचेंगी, जो बहुमत 41 से काफी अधिक है. सरकार केवल तभी गिर सकती है जब कांग्रेस 16 विधायक या जेएमएम के अपने विधायकों का बड़ा धड़ा बगावत कर दे, जिसकी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है क्योंकि कांग्रेस और आरजेडी दोनों ही सरकार की कैबिनेट में हिस्सेदार हैं.
आंदोलन को किन-किन दलों और संगठनों का समर्थन है?
राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी, आजसू और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा जैसे दल छात्रों की मांगों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं और सरकार की नीतियों पर हमला बोल रहे हैं. वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के कई विधायक भी दबे स्वर में स्वीकार कर रहे हैं कि युवाओं की मांगें जायज हैं और सरकार को जल्द से जल्द संवाद स्थापित कर गतिरोध दूर करना चाहिए. लेकिन सरकार अभी तक छात्रों की मांगें नहीं मान रही है.



