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83 की उम्र में जो बाइडेन का प्रोस्टेट कैंसर हड्डियों में पहुंचा, बुजुर्गों में कितना खतरनाक, डॉक्टर से जानें आम इंसान के बचने के कितने चांस

Last Updated:August 12, 2026, 16:49 IST

Prostate Cancer in Elder: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को एक साल पहले प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था. लेकिन अब यह कैंसर हड्डियों तक पहुंच गया है. जो बाइडेन 83 साल के हो चुके हैं. इस उम्र में मामूली बीमारी भी जानलेवा बन सकती है लेकिन जो बाइडेन का इलाज बेहतर चल रहा है. पर सवाल यह है कि अगर इस उम्र में किसी आम इंसान को यह बीमारी हो जाए तो क्या उसका इलाज हो पाएगा. इस विषय पर हमने कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. रवि शंकर से बात की.
Amazon Prime DayTop Deals Inside83 की उम्र में जो बाइडेन का प्रोस्टेट कैंसर हड्डियों में पहुंचा, कितना चांस  Zoomजो बाइडेन के प्रोस्टेट कैंसर का क्या इलाज है.

Prostate Cancer in Elder: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रोस्टेट कैंसर अब हड्डियों में पहुंचा गया है. उनके बेटे हंटर बाइडन ने बीबीसी को दिए एक हालिया इंटरव्यू में बताया कि बीमारी दर्दनाक और बेहद तकलीफदेह है. बाइडन को मई 2025 में प्रोस्टेट कैंसर के आक्रामक रूप का पता चला था. बाइडन में पाए गए कैंसर का ग्रेड 9 है. यह बेहद खतरनाक है. ग्रेड स्कोर यह बताता है कि माइक्रोस्कोप के नीचे प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाएं कितनी असामान्य दिखाई देती हैं और उनके तेजी से बढ़ने व फैलने की कितनी आशंका है. 8–10 का ग्लीसन स्कोर हाई-ग्रेड प्रोस्टेट कैंसर माना जाता है और इसमें शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर फैलने यानी मेटास्टेसिस का जोखिम अधिक होता है.यही कारण है कि जो बाइडेन का प्रोस्टेट कैंसर हड्डियों में पहुंच गया है. जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं. इसलिए उनके इलाज भी दुनिया में सबसे हाई क्वालिटी वाला होगा. पर सवाल यह है कि अगर आम इंसान को यही बीमारी हो जाए तो इसके इलाज की कितनी संभावना है. इस विषय पर हमने मैक्स अस्पताल में कैंसर डिपार्टमेंट के सीनियर कंस्लटेंट डॉ. रवि शंकर से बात की.

हड्डियों में कैंसर पहुंचने का क्या मतलबडॉ. रवि शंकर बताते हैं कि अक्सर प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर हड्डियों तक पहुंच जाता है. इसे मेडिकल टर्म में बोन मेटास्टेसिस कहा जाता है. बोन मेटास्टेसिस तब होता है, जब मूल ट्यूमर की कैंसर कोशिकाएं वहां से निकलकर हड्डियों तक पहुंचती हैं और वहां बढ़ने लगती हैं. प्रोस्टेट कैंसर में ये कोशिकाएं खून या लिंफेटिक सिस्टम के जरिए फैल सकती हैं. यह आमतौर पर रीढ़ की हड्डी, पेल्विस, कूल्हों और पसलियों को प्रभावित करती हैं. हालांकि बोन मेटास्टेसिस का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को नया बोन कैंसर हो गया है. इसका अर्थ है कि प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं ने हड्डियों में सेकेंडरी ट्यूमर बना लिया है.

बाइडेन को किस तरह का कैंसरजो बाइडेन को एडवांस्ड मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर है. यानी यह कैंसर स्टेज-4 कैंसर माना जाता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि बोन मेटास्टेसिस और प्राइमरी बोन कैंसर एक ही चीज नहीं हैं. हड्डी में पहुंचने के बाद भी कैंसर कोशिकाएं प्रोस्टेट कैंसर की ही रहती हैं, भले ही वे शरीर के दूसरे हिस्से में बढ़ रही हों. प्रोस्टेट कैंसर तब मेटास्टेटिक बन सकता है, जब कैंसर कोशिकाएं प्रोस्टेट से बाहर निकलकर शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचने और वहां ट्यूमर बनाने की क्षमता हासिल कर लेती हैं. एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर के दूर के अंगों और ऊतकों, खासकर हड्डियों तक फैलने की संभावना अधिक होती है. बाइडन का ग्लीसन स्कोर 9 यह दर्शाता है कि उनकी कैंसर कोशिकाओं में आक्रामक व्यवहार से जुड़े लक्षण थे. हड्डियों में मेटास्टेसिस होने से उनकी सामान्य संरचना और कामकाज प्रभावित हो सकता है और कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं.

इस कैंसर के क्या लक्षण हैएडवांस स्टेज वाले कैंसर में लगातार दर्द होता रहता है जो काफी कष्टप्रद है. यह दर्द रात में या चलने-फिरने के दौरान बढ़ सकता है और नींद व रोजमर्रा की गतिविधियों को काफी प्रभावित कर सकता है. यह कैंसर हड्डियों को कमजोर कर सकता है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. कई बार मामूली चोट या गिरने पर भी हड्डी टूट सकती है. हड्डियों को नुकसान पहुंचने से कैल्शियम खून में अधिक मात्रा में पहुंच सकता है. इसके कारण मतली, बहुत अधिक प्यास लगना, डिहाइड्रेशन, कब्ज, कमजोरी और भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

क्या बोन मेटास्टेसिस का इलाज संभव है?डॉ. रविशंकर बताते हैं कि जितने भी तरह के कैंसर होते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर में बचने की संभावना ज्यादा होती है. अगर यह आम आदमी को जाए तो भी इसमें इलाज की काफी संभावना है. डॉक्टर प्रोस्टेट कैंसर के लिए हार्मोन थेरेपी, एंड्रोजन डेप्रिवेशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड ट्रीटमेंट और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.कुछ दवाइयों की मदद से भी इसे नियंत्रित किया जा सकता है. हालांकि इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कोशिकाएं कहां तक प्रभावित है और किस अंग तक पहुंचा है, ट्यूमर कितना बड़ा है. शरीर को दवाई ग्रहण करने की क्षमता कितनी है, मरीज को और क्या-क्या बीमारियां हैं. इन बातों के आधार पर कैंसर विशेषज्ञ यह निर्णय लेते हैं कि मरीज का इलाज किस तरह से किया जाए. हालांकि मेटास्टेटिक प्रोस्टेट कैंसर को आमतौर पर पूरी तरह ठीक होने वाला कैंसर नहीं माना जाता लेकिन इलाज से कैंसर की बढ़ोतरी को धीमा किया जा सकता है, लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर किया जा सकता है.

About the AuthorLakshmi Narayan

लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता जगत का ऐसा नाम हैं, जो भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांप लेते हैं. मीडिया में 20 साल का अनुभव है और वर्तमान में न्यूज 18 …

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August 12, 2026, 16:49 IST

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