पैरासिटामोल लेने के बावजूद क्यों नहीं उतरता बुखार? नॉर्मल है या चिंता की बात, डॉक्टर से जानें इमरजेंसी गाइड

Last Updated:August 13, 2026, 19:14 IST
Fever After Paracetamol: आजकल सीजनल बुखार की चपेट में ज्यादातर लोग हैं. यह समय डेंगू, मलेरिया, टायफायड जैसे सीजनल बुखारों का है. लेकिन आजकल कुछ अजीब देखने को मिल रहा है. अस्पतालों में कुछ ऐसे मरीज आ रहे हैं जो बुखार उतारने के लिए पैरासिटामोल दवा तो खा लेते हैं लेकिन बुखार उतरने के बजाय उल्टा बुखार बढ़ता ही चला जाता है. आखिर ऐसा क्यों होता है. क्या यह चिंता की बात है. इसे समझने के लिए हमने मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के डायरेक्टर डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा से बात की.पैरासिटामोल खाने के बाद भी कम नहीं होता.
Fever After Paracetamol: इस समय सीजनल बीमारियों का आतंक मचा है. आपके आसपास कई ऐसे लोग मिल जाएंगे जिन्हें डेंगू, मलेरिया, टायफॉयड, स्वाइन फ्लू, इंफ्लूएंजा में से किसी एक से ग्रस्त होगा. जब भी बुखार लगता है लोग आमतौर पर पैरासिटामोल दवा खा लेते हैं. लेकिन इन दिनों कई मरीजों की शिकायत हो रही है कि पैरासिटामोल दवा बुखार उतारने के बजाय और बढ़ा देती है. पैरासिटामोल लेने के बाद अचानक या कुछ देर के लिए बुखार बढ़ता हुआ महसूस होना कई लोगों को डरा सकता है लेकिन इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और मेडिकल कारण हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे क्या कारण है, इसके लिए हमने मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसीन के डायरेक्टर डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा से बात की.
पैरासिटामोल लेने के बाद बुखार क्यों बढ़ता
डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा ने न्यूज 18 डिजिटल को बताया कि जब पैरासिटामोल लेने के बाद बुखार बढ़ता ही जाए तो इसके कई कारण हो सकते हैं और यह बहुत घबराने की बात नहीं है. यह शरीर का नॉर्मल प्रोसेस है. अगर शरीर में इंफेक्शन की वजह से ज्यादा टॉक्सिन जमा हो गया है या इंफेक्शन बहुत ज्यादा तेज है तो शुरुआती चरण में बुखार बढ़ता ही जाता है. इंफेक्शन के पहले चरण में यानी जब एक्यूट इंफेक्शन शुरू होता है तो उसके पहले और कभी-कभी दूसरे दिन में ऐसा नॉर्मल है. दूसरा आपको यह भी समझना चाहिए कि पैरासिटामोल दवा शरीर में किसी असामान्य या जटिल तरीके से काम नहीं करती बल्कि यह हमारे शरीर की अपनी स्वाभाविक प्रणाली को ही सक्रिय करके तापमान को वापस सामान्य स्तर पर लाती है. तीसरा- पैरासिटामोल का शरीर में असर होने में 30-45 मिनट तक का समय लग सकता है. क्योंकि जब भी हम ओरल दवा लेते हैं तो वह हमारे पेट में जाकर पहले टूटता है. फिर वह मेटाबोलाइज होता है. फिर खून में पहुंचता है. इस क्रम को होने में समय लगता है. इसलिए इस अवधि में यदि बुखार का क्रम बढ़ रहा है तो यह बढ़ता ही जाएगा. पैरासिटामोल कोई मैजिक पिल नहीं है और न ही यह शरीर के साथ कोई जबरदस्ती करती है. यह बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे इसे शरीर के पाचन और इम्यून सिस्टम के साथ मिलकर काम करना चाहिए. अब यह समझिए कि पैरासिटामोल काम कैसे करती है.
पैरासिटामोल काम कैसे करती है
इससे पहले हमें बुखार को समझना होगा. बुखार क्यों होता है. डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा ने बताया कि जब हमारे शरीर में कोई वायरस, बैक्टीरिया या पैरासाइट का हमला होता है तो शरीर में बहुत सारे टॉक्सिन को छोड़ता है. इस बाहरी हमले और टॉक्सिन को शरीर से हटाने के लिए हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम उससे लड़ने के लिए तैयार हो जाता है. इसके लिए प्रोस्टाग्लैंडिंस नाम का रसायन रिलीज होता है. यह रसायन हमारे दिमाग में मौजूद शरीर के थर्मास्टेट को यह संदेश भेजता है कि शरीर का तापमान बढ़ा दिया जाए ताकि वायरस या बैक्टीरिया के लिए इतनी गर्मी में पनपने का माहौल नहीं मिल सके और टॉक्सिन बाहर निकले. कुछ मामलों में इस गर्मी को बाहरी जीव बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और वे मर जाते हैं. पैरासिटामोल दवा सीधे संक्रमण पर हमला नहीं करती बल्कि दिमाग के उस सिग्नल को रोक देती है जो तापमान बढ़ाता है. बुखार हो, इसके लिए प्रोस्टाग्लैंडिंस रसायन सिग्नल भेजता है. इस सिग्नल भेजन में COX एंजाइम रास्ता देने का काम करता है. पैरासिटामोल इसे COX एंजाइम को ब्लॉक कर देता है. इससे सिग्नल रुक जाती है. सिग्नल रुकते ही दिमाग का थर्मास्टेट तापमान को वापस नॉर्मल तापमान पर सेट कर देता है. इसके बाद शरीर पसीना बहाकर और त्वचा की ओर खून का बहाव बढ़ाकर गर्मी बाहर निकाल देता है.
पैरासिटामोल काम क्यों नहीं करती
शरीर की अपनी गति : हमारा शरीर जटिल प्रक्रियाओं वाली मशीन है. जब हम पैरासिटामोल लेते हैं तो हमारे शरीर में एक के बाद एक जैविक प्रक्रियाएं होती हैं. इसे मेडिकल साइंस में कास्केड प्रोसेस कहा जाता है. इसमें समय लगता है. यानी हर किसी का शरीर अपनी गति से काम करता है. चूंकि पैरासिटामोल शरीर में कुछ भी जबर्दस्ती नहीं करता और स्वाभाविक प्रणाली को ही सक्रिय करता है, इसलिए बुखार को उतरने में समय लगता है.
डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड : इन स्थितियों में बुखार चक्र में आता है. जब मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ते हैं तो शरीर में अचानक बहुत तेज बुखार चढ़ता है जिसे पैरासिटामोल की सामान्य खुराक तुरंत नहीं रोक पाती.
डेंगू और टाइफाइड: इन बीमारियों में शरीर में सूजन बढ़ाने वाले साइटोकाइन्स बहुत भारी मात्रा में बनते हैं, जिससे बुखार बार-बार और तेजी से बढ़ता है. इसलिए पैरासिटामोल लेने के बाद भी बुखार नहीं उतरता.
गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन : यूरिन इंफेक्शन, निमोनिया या खून में संक्रमण होने पर जब तक एंटीबायोटिक दवाएं शुरू नहीं होतीं तब तक केवल पैरासिटामोल से बुखार नियंत्रित नहीं होता और बढ़ता रहता है.
पानी की कमी : यदि मरीज के शरीर में पानी की बहुत कमी है तो शरीर पसीने के ज़रिए गर्मी को बाहर नहीं निकाल पाता. ऐसी स्थिति में पैरासिटामोल खाने के बाद भी बुखार कम होने के बजाय बना रहता है या बढ़ता है.
बुखार न उतरे तो क्या करें
डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा ने बताया कि दुनिया में कोई ऐसा बुखार नहीं है जिसमें पानी की पट्टी से शरीर को पोंछने पर 2 डिग्री तक बुखार न उतरे. अगर आप सिर्फ पानी की पट्टी को माथे पर रख देंगे तो इससे बुखार नहीं उतरेगा. जब भी बुखार तेज हो, साफ सूती कपड़े को नॉर्मल पानी में भिगाएं और मरीज के सिर, पीठ, पेट, हाथ और पैरों को इससे पोंछ दें. कुछ ही देर के अंदर बुखार उतर जाएगा. इसके साथ ही मरीज को पर्याप्त पानी पिलाएं. ओआरएस, नारियल पानी या गुनगुना पानी पिलाते रहें. बिना डॉक्टर की सलाह के पैरासिटामोल की दोहरी खुराक या कोई अन्य पेन किलर जैसे मेफ्टाल या कॉम्बिफ्लेम तुरंत न दें. 2 दिन से ज्यादा बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से दिखाएं. एक दिन में 6 ग्राम से ज्यादा पैरासिटामोल न लें.
About the AuthorLakshmi Narayan
लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता जगत का ऐसा नाम हैं, जो भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांप लेते हैं. मीडिया में 20 साल का अनुभव है और वर्तमान में न्यूज 18 …
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First Published :
August 13, 2026, 19:14 IST



