बरसात में मुर्गी पालन करने वाले किसान ध्यान दें, नमी और गंदगी से ऐसे बचाएं मुर्गियां, अपनाएं ये आसान देसी उपाय

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मुर्गी पालन करने वाले किसान ध्यान दें! नमी और गंदगी से ऐसे बचाएं मुर्गियां
Last Updated:August 17, 2026, 00:03 IST
Animal Husbandry Tips: बारिश में मुर्गी पालन का सबसे बड़ा मंत्र है शेड सूखा रखें, हवा चलती रहे, लिटर गीली न होने दें, साफ पानी दें और बीमार मुर्गी को तुरंत अलग करें. किसान रोज सुबह-शाम कुछ मिनट शेड का निरीक्षण कर लें तो बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है.
भीलवाड़ा – बारिश का मौसम मुर्गी पालकों के लिए थोड़ा चैलेंजिंग भरा रहता है. इस मौसम में हवा में नमी बढ़ने से मुर्गियों के शेड में भी सीलन बढ़ जाती है और गीली लिटर (बिछावन) बीमारी का बड़ा कारण बन सकती है. इसलिए सबसे पहले शेड में बारिश का पानी घुसने से रोकें, छत और दीवारों की लीकेज ठीक करें और हवा का पर्याप्त आवागमन बनाए रखें. शेड को पूरी तरह बंद करने के बजाय ऐसी व्यवस्था रखें कि ताजी हवा आती-जाती रहे.
बारिश में सबसे ज्यादा ध्यान लिटर पर देना चाहिए. जहां भूसा, लकड़ी का बुरादा या धान की भूसी गीली हो गई है. उसे तुरंत निकालकर सूखी लिटर डालें और बीच-बीच में लिटर को उलट-पलट करते रहें. गीली लिटर से बदबू और अमोनिया बढ़ सकता है तथा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. पानी की टंकी, पाइप और ड्रिंकर में लीकेज न हो, यह भी रोज जांचें, क्योंकि टपकता पानी लिटर को लगातार गीला करता रहता है.
इस मौसम में मुर्गियों में दस्त, सांस की परेशानी, आंख-नाक से पानी आना, कमजोरी, भूख कम होना और कोक्सीडियोसिस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. गंदा पानी, गीली लिटर और खराब सफाई से बीमारी फैलने का खतरा और बढ़ जाता है. अगर कोई मुर्गी सुस्त दिखे, अलग बैठी रहे या उसका मल असामान्य हो तो उसे तुरंत बाकी मुर्गियों से अलग करें. बीमारी की सही पहचान बिना जांच के करना मुश्किल होता है, इसलिए लगातार बीमारी या ज्यादा मौत होने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है.
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देसी उपाय के तौर पर सबसे जरूरी चीज सफाई और सूखापन है. शेड में गीली जगह को तुरंत हटाएं, पीने के बर्तन रोज साफ करें और चारे को जमीन से ऊपर, सूखी जगह में रखें. बारिश में गीला या फफूंद लगा चारा बिल्कुल न खिलाएं. मक्खी-मच्छर और चूहे बढ़ने न दें तथा बाहर से आने वाले लोगों और दूसरे पक्षियों का शेड में अनावश्यक प्रवेश रोकें. यानी घरेलू उपायों में नीम की पत्तियां रखने जैसे उपाय किए जाते हैं, लेकिन इन्हें बीमारी का इलाज न समझें; स्वच्छता, सूखी लिटर और जैव-सुरक्षा सबसे कारगर बचाव हैं.
मुर्गियों को साफ और ताजा पानी लगातार उपलब्ध कराएं और उनका नियमित टीकाकरण समय पर कराएं. बरसात के दिनों में पानी और चारे की गुणवत्ता पर खास नजर रखें. फार्म में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, फीडर और ड्रिंकर की नियमित सफाई और उचित डिसइंफेक्शन भी जरूरी है. बीमारी फैलने पर अपने मन से एंटीबायोटिक या दूसरी दवा देना ठीक नहीं है, क्योंकि हर बीमारी का इलाज अलग होता है और गलत दवा नुकसान कर सकती है.
बारिश में मुर्गी पालन का सबसे बड़ा मंत्र है शेड सूखा रखें, हवा चलती रहे, लिटर गीली न होने दें, साफ पानी दें और बीमार मुर्गी को तुरंत अलग करें. किसान रोज सुबह-शाम कुछ मिनट शेड का निरीक्षण कर लें तो बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है. अगर मुर्गियों में अचानक ज्यादा मौत, सांस लेने में गंभीर दिक्कत, गर्दन टेढ़ी होना या बहुत तेजी से बीमारी फैलती दिखाई दे, तो घरेलू इलाज के भरोसे न रहें और तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
First Published :
August 17, 2026, 00:03 IST



