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डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन को बताया ‘अच्छा दोस्त’, दक्षिण कोरिया को दी सजा, मिलिट्री ड्रिल पर कैंची

वॉशिंगटन: अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच दशकों पुराने सैन्य सहयोग में एक नया मोड़ आता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसा ऐलान किया है, जिससे लग रहा है कि वह अब उत्तर कोरिया से रिश्ते सुधारने में लगे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को ‘काफी कम’ करेगा. ट्रंप ने इसके पीछे उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन के साथ अपने ‘बहुत अच्छे रिश्ते’ का हवाला दिया है. इसके अलावा कहा है कि इसमें अमेरिका का ही पैसा खर्च होता है. लेकिन उनके बयान में ईरान का मुद्दा भी अचानक सामने आया. इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमले में दक्षिण कोरिया की तरफ से साथ न दिए जाने की वह सजा दे रहे हैं? ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास काफी महंगे हैं और इनका बड़ा खर्च अमेरिका उठाता है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अभ्यास उत्तर कोरिया को ऐसा संकेत देते हैं, जो उन्हें ‘अनुचित और शत्रुतापूर्ण’ लगता है.

दक्षिण कोरिया से अभ्यास कम क्यों कर रहे ट्रंप?
ट्रंप ने अपने बयान में सीधे कहा कि उनका उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ ‘बहुत अच्छा रिश्ता’ है. यही बात इस फैसले को और दिलचस्प बनाती है, क्योंकि उत्तर कोरिया हाल के दिनों में बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण कर चुका है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित किया है. यानी एक तरफ उत्तर कोरिया मिसाइल टेस्ट के जरिए अपनी आक्रामकता दिखा रहा है, दूसरी तरफ अमेरिका उसके साथ सैन्य तनाव कम करने का संकेत दे रहा है. उत्तर कोरिया ने इसी महीने कई मिसाइल टेस्ट किए हैं. ट्रंप का बयान ऐसे समय में आया है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने किम जोंग के साथ अपनी तस्वीर शेयर की थी.

ईरान पर दक्षिण कोरिया ने नहीं दिया था साथ

ट्रंप के बयान में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात ईरान को लेकर उनकी टिप्पणी है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या उनका देश अमेरिका के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिश में शामिल होना चाहेगा. ट्रंप के मुताबिक, दक्षिण कोरिया ने जवाब दिया- ‘नहीं, शुक्रिया.’ ट्रंप ने खुद इस बात को कुछ हद तक अलग मुद्दा बताया, लेकिन सैन्य अभ्यास कम करने के ऐलान के साथ इसका जिक्र करने से अटकलें तेज हो गई हैं कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान में साथ न देने के कारण ही ट्रंप ये सजा दे रहे हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने जापान, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे दूसरे सहयोगियों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की है, क्योंकि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में सीधे सैन्य या रसद संबंधी मदद देने को लेकर हिचकिचाते रहे हैं.

दक्षिण कोरिया बोला- अभ्यास तय समय पर होगा

ट्रंप के ऐलान के बावजूद दक्षिण कोरिया ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ होने वाला उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास तय कार्यक्रम के मुताबिक ही होगा. यह 11 दिन चलने वाला वार्षिक अभ्यास है. इसमें करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक शामिल होने वाले हैं. ट्रंप ने भी माना कि सोमवार से शुरू होने वाले अभ्यास को अब रद्द करने का फैसला देर माना जाएगा. हालांकि उन्होंने भविष्य में संयुक्त अभ्यासों को काफी कम करने की बात कही है.

उत्तर कोरिया इसे बता चुका है ‘जंग की रिहर्सल’

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर उत्तर कोरिया का रुख हमेशा से बेहद आक्रामक रहा है. प्योंगयांग के विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते इस अभ्यास को ‘आक्रामक युद्ध की रिहर्सल’ बताया था. उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है. 2019 में ट्रंप और किम के बीच बातचीत का दौर टूटने के बाद प्योंगयांग ने इन कार्यक्रमों को और तेज किया है.

उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन.

2018 में भी ट्रंप ने रोक दिए थे अभ्यास

ट्रंप का यह फैसला बिल्कुल नया नहीं है. अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने 2018 में किम जोंग-उन के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता के दौरान अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास पूरी तरह रोक दिए थे. 2020 में कोरोना महामारी के दौरान भी इन अभ्यासों का स्तर कम किया गया था. अब एक बार फिर ट्रंप उसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं. फर्क यह है कि इस बार उनके बयान में किम से रिश्ते, सैन्य खर्च और ईरान के खिलाफ सहयोग तीनों बातें एक साथ दिखाई दे रही हैं.

दक्षिण कोरिया में 28,500 अमेरिकी सैनिक क्यों?

दक्षिण कोरिया में करीब 28,500 अमेरिकी सैन्यकर्मी तैनात हैं. इसकी जड़ कोरियाई युद्ध में है. 1953 में युद्धविराम हुआ था, लेकिन दोनों कोरियाई देशों के बीच औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ. इसलिए तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी का मुख्य मकसद दक्षिण कोरिया की सुरक्षा और उत्तर कोरिया से संभावित सैन्य खतरे के खिलाफ प्रतिरोध बनाए रखना है. इसी वजह से दोनों देशों का संयुक्त सैन्य अभ्यास भी लंबे समय से उनकी रक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है.

दक्षिण कोरिया भी चाहता है शांति

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