Pali News I रोहटगढ़ की विलेज सफारी दे रही दुनिया को अनोखा संदेश

Last Updated:August 17, 2026, 15:06 IST
रोहटगढ़ की विलेज सफारी विदेशी पर्यटकों को राजस्थान के उस असली ग्रामीण जीवन से रूबरू कराती है, जो आज भी अपनी परंपराओं, सादगी और प्राकृतिक खूबसूरती के साथ जीवंत है. बिश्नोई ढाणियों में वन्यजीव संरक्षण से लेकर कुम्हारों, मोचियों और ग्रामीण परिवारों की कला-कुशलता तक, यह सफर पर्यटकों को भारत की मिट्टी और संस्कृति से जोड़ता है. यही अनछुआ अनुभव रोहटगढ़ की विलेज सफारी को विदेशी मेहमानों के लिए राजस्थान यात्रा की यादगार हाईलाइट बना देता है.
पाली जिले के रोहटगढ़ रिसॉर्ट द्वारा आयोजित यह विलेज सफारी कोई बनावटी टूरिस्ट स्पॉट या सेट किया गया शो नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के वास्तविक ग्रामीण जीवन का एक ‘नेचुरल एक्सपीरियंस’ है. यहाँ सब कुछ वैसा ही दिखता है जैसा सदियों से चला आ रहा है. बिना किसी दिखावे के, पर्यटकों को सीधे उन गांवों की ओर ले जाया जाता है जहाँ प्रकृति, परंपरा और जीवन शैली आज भी अपने मूल रूप में सुरक्षित और जीवंत हैं.
जब रोहटगढ़ से खुली जीपें धूल उड़ाती हुई गांवों की ओर निकलती हैं, तो विदेशी सैलानियों के लिए एक नई दुनिया के दरवाजे खुल जाते हैं. सफारी का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है बिश्नोईयों की ढाणी, जहाँ पर्यटक वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति ग्रामीणों का अगाध प्रेम और समर्पण देखते हैं. चिंकारों और हिरणों को अपने परिवार की तरह पालने की यह परंपरा देखकर विदेशी मेहमान आश्चर्यचकित रह जाते हैं.
बिश्नोई ढाणियों के बाद यात्रा पशुपालकों, कुम्हारों और पालीवाल परिवारों के आंगन तक पहुँचती है. कुम्हार के चाक पर मिट्टी को सुंदर बर्तनों में ढलते देखना और मोची के यहाँ चमड़े पर बारीकी से काम होते देखना विदेशी सैलानियों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं होता. मशीनी युग के इन सैलानियों के लिए अपने हाथों से कलाकृतियाँ गढ़ते इन ग्रामीणों की कुशलता एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाती है.
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जब विदेशी मेहमान इन कच्चे मिट्टी के घरों में प्रवेश करते हैं, तो दीवारों पर उकेरे गए सुंदर पारंपरिक मांडने, प्राकृतिक रूप से ठंडे रहने वाले मिट्टी के कमरे और सलीके से सजी स्वच्छ रसोई देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह जाती हैं. सादगी के बीच बसी यह बेमिसाल स्वच्छता कई बार पर्यटकों को इतनी भावुक कर देती है कि उनकी आँखें भर आती हैं. उन्हें अहसास होता है कि असली खुशहाली भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि इस सादगी में है.
सफारी का सबसे खूबसूरत पहलू ग्रामीणों और विदेशी सैलानियों के बीच का सीधा संवाद (इंटरैक्शन) है. भाषा की बाधाओं को दरकिनार करते हुए, ग्रामीणों का गर्मजोशी से स्वागत करना, चेहरे की सच्ची मुस्कान और आतिथ्य सत्कार पर्यटकों के दिलों को जीत लेता है. यह यात्रा केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रहकर, भारत की आत्मा और स्थानीय लोगों की भावना से रूबरू होने का एक बेहतरीन जरिया बन जाती है.
रोहटगढ़ की यह विलेज सफारी पर्यटकों के मन में बनी पुरानी गलत धारणाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर देती है. जब ये मेहमान अपना टूर पूरा करके वापस अपने देश लौटते हैं, तो उनके पास ताज महल या विशाल किलों की तस्वीरों से कहीं अधिक रोहट के इस ग्रामीण सफर की यादें संजोई होती हैं. अधिकांश पर्यटक अपने फीडबैक में दर्ज करते हैं कि पूरे भारत भ्रमण में रोहट की यह विलेज सफारी ही उनकी यात्रा की सबसे बड़ी हाईलाइट थी.
संक्षेप में कहें तो, रोहट की मिट्टी में रचा-बसा यह ग्रामीण जीवन आज पूरी दुनिया को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सादगी से जीने का संदेश दे रहा है. यही वजह है कि रोहटगढ़ की विलेज सफारी न केवल राजस्थान के पर्यटन को एक नई वैश्विक पहचान दे रही है, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों को भारत की इस पावन और अनछुई परंपरा का मुरीद भी बना रही है.
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August 17, 2026, 15:06 IST



