Rajasthan

सिरोही के जंगल में स्थित शानका महादेव मंदिर का इतिहास

Last Updated:August 19, 2026, 05:53 IST

Shanka Mahadev Temple Sirohi: सिरोही के अरावली जंगलों में स्थित प्राचीन शानका महादेव मंदिर अपनी धार्मिक मान्यता और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. आबूरोड के पास उमरणी गांव से डेढ़ किलोमीटर घने जंगल, झरने और पथरीले रास्तों को पार कर भक्त यहां पहुंचते हैं. मान्यता है कि संत की तपस्या के दौरान यहां शिवलिंग प्रकट हुआ था. यह क्षेत्र राजा अम्बरीष की अमरावती नगरी का हिस्सा था. परिसर के कुंड में सालभर पानी रहता है, जिससे भक्त दो शिवलिंगों का अभिषेक करते हैं.

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Sirohi: राजस्थान के सिरोही जिले में श्रावण मास के दौरान शिवालयों में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है. शहर के सुलभ मंदिरों के साथ-साथ अरावली की दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में छिपे प्राचीन शिव मंदिरों में भी भक्त बड़ी श्रद्धा से पहुंच रहे हैं. सिरोही की अरावली श्रृंखला न केवल अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि जंगलों के बीच बने प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए भी जानी जाती है. इन्हीं में से एक बेहद रमणीय और दुर्गम स्थान पर स्थित है प्राचीन शानका महादेव मंदिर. यहां आने वाले शिवभक्तों को दर्शन के साथ-साथ प्रकृति के शांत वातावरण में ईश्वर आराधना का एक अलग ही दिव्य अनुभव प्राप्त होता है.

शानका महादेव मंदिर पहुंचने की राह आसान नहीं है. श्रद्धालुओं को चारों तरफ फैले घने पेड़ों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और बरसाती नालों को पार करते हुए लगभग 2 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है. यह मंदिर पूरी तरह जंगल के बीच बना हुआ है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से दिन के समय ही यहां जाना उचित रहता है. शाम ढलते ही यहां जंगली जानवरों का खतरा काफी बढ़ जाता है क्योंकि कई बार इस इलाके में वन्यजीवों की गतिविधि देखी गई है. मुख्य मार्ग से यात्रा शुरू करने के लिए आबूरोड शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर उमरणी गांव के ऋषिकेश मंदिर तक पहुंचना होता है. इसके बाद शानका महादेव मंदिर तक जाने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर घने जंगल के रास्ते से गुजरना पड़ता है. श्रद्धालुओं को रास्ते में भटकने से बचाने के लिए स्थानीय लोगों और भक्तों ने जगह-जगह पेड़ों और पत्थरों पर केसरिया रंग के निशान बनाए हैं. यात्रा के दौरान झरने और बहते बरसाती नालों को पार करना होता है, जिसके चलते भारी बारिश के समय कई बार यह रास्ता पूरी तरह से बंद भी हो जाता है.

शांत जंगल में संत की तपस्या और ‘शानका महादेव’ नाम का रहस्यस्थानीय श्रद्धालुओं त्रिलोक कुमार और जितेंद्र परिहार के अनुसार, मंदिर से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प मान्यता है. प्राचीन काल में इस शांत और निर्जन जंगल में एक संत कठिन तपस्या कर रहे थे. तपस्या के दौरान ही जमीन की खुदाई में एक शिवलिंग दिखाई दिया. जब स्थानीय लोगों को शांत जंगल में संत की तपस्या करने और वहां प्राचीन शिवलिंग व मंदिर के अवशेष मिलने की जानकारी मिली, तो भक्तों का आना-जाना शुरू हो गया. धीरे-धीरे श्रद्धालुओं ने मिलकर इस स्थान का जीर्णोद्धार करवाया और शांत माहौल में प्रकट होने के कारण इस मंदिर का नाम ‘शानका महादेव’ पड़ा.

राजा अम्बरीष की अमरावती नगरी और महाभारत काल से जुड़ा इतिहासपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में यह पूरा क्षेत्र राजा अम्बरीष की प्रसिद्ध अमरावती नगरी का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था. ऐसा माना जाता है कि उस दौर में यहां इतने विशाल और अनेक मंदिर थे कि एक साथ 999 झालरें बज उठती थीं. इसी ऐतिहासिक क्षेत्र में प्रसिद्ध प्राचीन ऋषिकेश मंदिर और भद्रकाली मंदिर भी स्थित हैं. मान्यता है कि राजा अम्बरीष की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें इसी स्थान पर ऋषिकेश स्वरूप में साक्षात दर्शन दिए थे. इसके अलावा, महाभारत काल के दौरान पांडवों के अपने अज्ञातवास या यात्रा के समय यहां रुकने की धार्मिक मान्यता भी प्रचलित है.

वर्षभर भरा रहने वाला प्राचीन कुंड और दो शिवलिंग का अभिषेकघने जंगल के बीच स्थित होने के बावजूद इस मंदिर परिसर में बेलपत्र के अनेक वृक्ष मौजूद हैं, जो शिव पूजा में विशेष महत्व रखते हैं. मंदिर के पास ही एक बेहद प्राचीन कुंड स्थित है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पूरे साल पानी भरा रहता है. कड़कड़ाती गर्मियों के मौसम में भी इस कुंड का जल कभी नहीं सूखता. मंदिर में दर्शन करने आने वाले सभी भक्त इसी पवित्र कुंड के जल को लाकर मंदिर में स्थापित दो शिवलिंगों का श्रद्धापूर्वक जलभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Sirohi,Sirohi,Rajasthan

First Published :

August 19, 2026, 05:53 IST

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