राहुल मनुस्मृति में फंसे… उधर पीएम मोदी ने अचानक डोभाल, जयशंकर समेत 4 धुरंधर मंत्री चीन-US-रूस-जापान क्यों भेजे?

पीएम मोदी को घेरने के चक्कर में राहुल गांधी के मंच से जो मेलोनी के अपमान वाला कांड हुआ, उसका डैमेज कंट्रोल करने के लिए राहुल गांधी के लिए नया मंच सजाया गया. पूरा नैरेटिव, पूरी स्क्रिप्ट चेंज की गई. राहुल गांधी की नई इमेज बिल्डिंग का पूरा सेट तैयार किया गया, लेकिन राहुल गांधी ने एक भूल को सुधारने के चक्कर में और कांड हो गए. मेलोनी के अपमान वाले कांड को ढकने के लिए राहुल गांधी महिला सम्मान की बात करने लगे. मनुस्मृति की बात करने लगे. लेकिन इस पर भी राहुल गांधी फंस गए. इधर कांग्रेस राहुल गांधी के फैलाए रायते को समटने में लगी है, उधर पीएम मोदी ने डिप्लोमेसी का नया मोर्चा खोल दिया है. पीएम मोदी ने चीन से लेकर रूस, अमेरिका तक ग्लोबल आउटरीच का नया प्रोग्राम शुरू कर दिया है.
आप देखिए कि पीएम मोदी ने कैसे अपनी टीम को लगा दिया है. NSA अजित डोभाल चीन के दौरे पर हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के दौरे पर हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अमेरिका और कनाडा जाने की चर्चा है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 200 बिजनेस डेलीगेशन की बड़ी टीम के साथ जापान में हैं. इसके अलावा अर्जेंटीना, चिली, ब्राजील भी पीएम मोदी के एजेंडे में हैं. यानी पीएम मोदी ने NSA डोभाल और धुरंधर मंत्रियों की टीम उतार दी है. आज आपको बताऊंगा कि पीएम मोदी क्यों एक साथ अपनी टीम को अलग-अलग देशों में भेज रहे हैं, पीएम मोदी कौन से बड़े प्लान पर काम कर रहे हैं.
पीएम मोदी ने एक साथ खोल दिए कई फ्रंट
राहुल गांधी विदेश नीति पर पीएम मोदी को ज्ञान दे रहे थे, और ये बता रहे थे कि पीएम मोदी के लिए विदेश नीति सिर्फ गले लगाना है वो ये देख लें कि पीएम मोदी ने कैसे एक साथ कई फ्रंट खोल दिए हैं. आप देखिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वक्त NSA अजित डोभाल को चीन भेजा है. NSA डोभाल तीन दिन के दौरे पर चीन पहुंचे हैं. ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है. जब अगले महीने दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन होना है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की चर्चा है.
अगर जिनपिंग भारत आए तो ये सात साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी. जिनपिंग के दौरे से पहले अजित डोभाल का चीन जाना एक पॉजिटिव मूव है, क्योंकि इस दौरे को जिनपिंग की विजिट की जमीन तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है. पिछले साल चीन ने भी पीएम मोदी को बुलाने के लिए ऐसा ही किया था.
डोभाल की चीन यात्रा का मकसद क्या?
ब्रिक्स सम्मेलन के अलावा NSA डोभाल, चीन के विदेश मंत्री से बॉर्डर विवाद पर भी बात करेंगे. NSA डोभाल चीन के विदेश मंत्री के न्योते पर ही गए हैं. साल 2003 में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जो मेकानिज्म बना था. उसी तरह 25वें राउंड की बातचीत होगी. इस बातचीत के एजेंडे में LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना, बॉर्डर पर तनाव को कम करना , LAC पर पेट्रोलिंग अरेंजमेंट पर बातचीत शामिल है. इसके अलावा द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने पर बात होगी. वहीं अंतररष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी वार्ता होगी.
पुतिन जयशंकर की मुलाकात में क्या हुआ?
इधर NSA डोभाल चीन के दौरे पर हैं, उधर पीएम मोदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को रूस भेजा हुआ है. विदेश मंत्री ने आज रूस में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की है. विदेश मंत्री ने रूस के राष्ट्रपति से मिलकर पीएम मोदी का संदेश राष्ट्रपति पुतिन को दिया. उन्हें अगले महीने भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए न्योता दिया. इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने भी पीएम मोदी के लिए अपना खास संदेश भेजा है.
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वो किर्गिस्तान में होने वाली SCO की बैठक में पीएम मोदी से मिलने को उत्सुक हैं. पुतिन ने कहा कि दोनों देश व्यापार समेत लगभग हर क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं. पुतिन ने कहा कि 2025 में थोड़ी गिरावट के बाद इस साल दोनों देशों के बीच व्यापार फिर बढ़ रहा है. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत रुचि को भी अहम बताया
जापान गए पीयूष गोयल
चीन के साथ भारत सीमा विवाद सुलझा रहा है, रूस से व्यापार बढ़ा रहा है, दूसरी तरफ पीएम मोदी ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को जापान भेजा है. जापान यात्रा का मकसद भारत में निवेश बढ़ाना है..यानी पीएम मोदी की डिप्लोमेसी का सेंटर प्वाइंट है, भारत की आर्थिक ताकत को बढ़ाना है. इसके लिए पीयूष गोयल सबसे बड़ा बिजनेस डेलीगेशन लेकर जापान गए हैं. 200 मेंबर वाले इस डेलीगेशन में सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, स्टील, हेल्थकेयर, स्टार्टअप के सेक्टर के लोग हैं. जापान से व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर बात होगी. भारत के लिए जापान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा सोर्स है. जापान ने भारत में अगले 10 साल के लिए 60 हजार करोड़ के निवेश का टारगेट रखा है. इस टारगेट को अचीव करने के लिए पीएम मोदी ने अपनी टीम को लगा दिया है. भारत की इकॉनमी को और मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम शुरू किया है. जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतें, व्यापार, निवेश को बढ़ाया जा सके.
कनाडा-यूएस से भी निवेश पर बात
व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए कनाडा से भी बात होने वाली है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 26 और 27 अगस्त को कनाडा जाने वाली हैं. इसके बाद वो G20 के वित्त मंत्रियों की बैठक के लिए अमेरिका जाएंगी. इसके अलावा कॉमर्स सेक्रेटरी को अर्जेंटीना, चिली और ब्राजील के दौरे पर भेजा जाएगा. चिली के साथ भारत का ट्रेड एग्रीमेंट पूरा होने की कगार पर है. इस एग्रीमेंट से भारत को चिली के क्रिटिकल मिनिरल्स की मार्केट का एक्सेस मिलेगा. इसके अलावा भारत साउथ अमेरिकन ट्रेड ब्लॉक Mercosur (मरकोसुर) के साथ भी ट्रेड एग्रीमेंट करने वाला है. इस ट्रेड ब्लॉक में अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, बोलीविया जैसे देश शामिल हैं. अर्जेंटीना और ब्राजील बड़े देश हैं, बड़ी मार्केट हैं, ये देश चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहते हैं.
यानी पीएम मोदी ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिए हैं, पीएम मोदी के सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर ना रहे..साथ ही साथ बैक टू बैक ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए नए नए मार्केट भारत के लिए खुले. आज की डेट में बड़े-बड़े देश भारत के साथ डील करने के लिए उत्सुक हैं और ये सब इसलिए हो पा रहा है कि क्योंकि पीएम मोदी ने भारत की इकॉनमी को रॉकेट बनाया हुआ है. पीएम मोदी ने इसके लिए हर सेक्टर में होमवर्क किया है.
बैंकिंग सेक्टर बता रहा भारत की आर्थिक स्थिति
आप देखिए कि किसी भी देश की आर्थिक स्थिति उसके बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से भी पता चलती है, और इस मामले में पीएम मोदी ने पूरा गेम ही पलट दिया है. 2014 से पहले डूबे हुए लोन को लेकर बैंक्स परेशान रहते थे. बैंकों का NPA (Non-Performing Asset) बहुत बढ़ गया था. लेकिन पीएम मोदी ने इसे ठीक किया है. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विफ फर्म के मुताबिक, भारत के बैंक पिछले 10 सालों में सबसे बेस्ट शेप में है.
आप देखिए कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले क्वार्टर में किसी भी लिस्टेड बैंक का नेट NPA (Non-Performing Asset) 1 प्रतिशत से पार नहीं गया है. आसान शब्दों में कहें तो बैंक जो लोन दे रहे हैं उसका 1 प्रतिशत लोन ही उस कैटेगिरी में है जिसकी वसूली में दिक्कत है. बैंकिंग सेक्टर में इसे मजबूती का संकेत माना जाता है. पिछले साल की तुलना में कुल NPA में 11.76 प्रतिशत की कमी आई है. Net NPA की रकम 84,293 करोड़ पर आ गई है, जो पिछले साल की तुलना में 9.51 प्रतिशत कम है. इसके अलावा बैंकों को डूबने वाले कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए कुछ पैसा अलग रखना पड़ता है, वो घटकर 25,448 करोड़ हो गया है. ये पिछले साल की तुलना में 41.61 प्रतिशत की कमी आई है. बैंकिंग इंडस्ट्री का नेट प्रॉफिट 19.01 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है.



