जापान ने एक साल में क्यों मार डाले 14,000 भालू? अब 8,800 फिर निशाने पर, बदलता मौसम बना मुसीबत

Last Updated:August 27, 2026, 14:49 IST
जापान में इंसानों और भालुओं के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक 14 हजार से ज्यादा भालू मारे गए, फिर भी हमले नहीं थमे. अब सरकार ने 8,800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य रखा है. विशेषज्ञों के मुताबिक जंगलों में भोजन की कमी, जलवायु बदलाव और इंसानी बस्तियों का विस्तार समस्या बढ़ा रहे हैं.जापान में एक साल के अंदर 14000 से ज्यादा भालू मारे गए (Reuters).
टोक्यो: जापान में इंसानों और भालुओं के बीच का संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. हालात इतने बिगड़े कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच देश में 14 हजार से ज्यादा भालुओं को मार दिया गया, लेकिन इसके बाद भी हमले थम नहीं पाए. अप्रैल से अब तक कम से कम 6 लोगों की मौत और 35 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. इसके बावजूद सरकार ने इस वित्त वर्ष में करीब 8,800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य रखा है. यही वजह है कि अब जापान की नीति पर सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञ पूछ रहे हैं कि अगर हजारों भालुओं को मारने के बाद भी इंसानों पर हमले जारी हैं, तो क्या सिर्फ भालुओं की संख्या घटाना समस्या का सही इलाज है?
जापान में भालुओं ने क्यों मचाई दहशत?
जापान में पिछले साल भालुओं के हमलों ने रिकॉर्ड बना दिया था. 230 से ज्यादा लोगों पर हमला हुआ और 13 लोगों की मौत हुई. यह देश में भालुओं के हमलों का सबसे घातक साल रहा. खासकर जापान के उत्तरी पहाड़ी इलाकों अकिता और इवाते में हालात ज्यादा खराब रहे. इसकी एक बड़ी वजह जंगलों में भालुओं का खाना कम होना बताई गई. भीषण गर्मी का असर बीच नट्स और बलूत पर पड़ा, जो भालुओं के लिए सर्दियों से पहले शरीर में पर्याप्त ऊर्जा जमा करने का अहम भोजन है. जब जंगल में खाना कम हुआ तो भालू पहाड़ों से नीचे उतरकर इंसानी बस्तियों की तरफ आने लगे.
जापान में मारे जा रहे भालू.
संरक्षणकर्ताओं ने जापान के जंगलों में मंगोलियन ओक के पेड़ों के सूखने, बलूत को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों, जापानी बीच के पेड़ों में कम बीज बनने और परागण करने वाले कीड़ों की संख्या घटने जैसी घटनाओं पर चिंता जताई है. इसका सीधा असर भालुओं के भोजन पर पड़ता है. जब जंगल में पर्याप्त खाना नहीं मिलता, तो भालू इंसानी इलाकों में फल, कचरा और दूसरी खाद्य चीजें तलाशने लगते हैं.
खाली गांव बने भालुओं का घर
इस कहानी का एक अजीब पहलू भी है. जापान में पिछले कई दशकों में बड़ी संख्या में लोग गांवों से शहरों की ओर चले गए. कई खेत और बागान खाली हो गए. धीरे-धीरे इन इलाकों में फिर से जंगल फैलने लगा. इससे भालुओं के रहने की जगह आपस में जुड़ती चली गई. यानी जिस संरक्षण नीति ने एशियाई काले भालुओं को दोबारा बढ़ने और अपने पुराने इलाकों में लौटने में मदद की, वही अब इंसानों और भालुओं के बीच टकराव की वजहों में से एक बन गई है.
फिर शुरू हुआ बड़ा शिकार अभियान
भालुओं के हमले बढ़ने के बाद जापान की सरकार ने आबादी वाले इलाकों में भालुओं को मारने के नियमों में ढील दी. नतीजा यह हुआ कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 14,000 से ज्यादा भालू मारे गए. इनमें करीब 12 हजार एशियाई काले भालू और करीब 2 हजार भूरे भालू शामिल थे. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. इतने बड़े पैमाने पर भालुओं को मारे जाने के बावजूद इंसानों पर हमले जारी रहे. अप्रैल के बाद कम से कम 9 प्रांतों में 6 लोगों की मौत और 35 से ज्यादा लोगों पर हमले दर्ज किए गए.
अब 8,800 और भालुओं पर नजर
सरकार ने इस वित्त वर्ष में 8,800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य तय किया है. किन संरक्षण संगठनों का कहना है कि यह रास्ता लंबे समय में समस्या को खत्म नहीं करेगा. जापान बीयर एंड फॉरेस्ट सोसाइटी की अध्यक्ष युको मुरोया का कहना है कि अगर इसी तरह बड़े पैमाने पर भालुओं को पकड़ा और मारा जाता रहा तो कुछ इलाकों से उनकी पूरी आबादी खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है.
About the AuthorYogendra Mishra
Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…
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August 27, 2026, 14:49 IST



