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हार्मोन या हैबिट्स: कौन चलाता है महिलाओं का मूड और दिमाग?

Last Updated:September 12, 2026, 08:34 IST

मह‍िलाओं के हार्मोन, पुरुषों के शरीर की तरह स्‍थ‍िर नहीं होते. हर महीने के पीर‍ियड्स हों या फिर प्रेग्‍नेंसी और मॉनोपॉज जैसे फेस, औरतों में हार्मोंस का उतार-चढ़ाव चलता ही रहता है. क्‍योंकि ये सब मर्दों के शरीर से अलग होता है, यही वजह है कि उनके ल‍िए मह‍िलाओं के मूड स्‍व‍िंग समझने में काफी परेशानी होती है. पर क्‍या औरतों का बदलता हुआ स्‍वभाव और मूड स‍िर्फ हार्मोन के हावाले है या इसका ‘हैब‍िट्स’ यानी आदतों से भी कनेक्‍शन है? सवाल पेचीदा है पर इसे समझा जा सकता है. हार्मोन या हैबिट्स: कौन चलाता है महिलाओं का मूड और दिमाग?Zoomसेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे “मूड-गुड” न्यूरोट्रांसमीटर को बढ़ाता है

इंस्‍टाग्राम पर आपने कई सारी रील्‍स देखी होंगी, ज‍िनमें ‘च‍िल्‍लाती और गुस्‍से में चीखती मां’ को फनी अवतार में द‍िखाया जाता है. आजकल तो लड़क‍ियों के च‍िड़च‍िड़ेपन पर या छोटी-मोटी बातों पर भी ज्‍यादा गुस्‍सा होने पर अचानक लोग पूछ बैठते हैं, ‘पीर‍ियड्स हैं क्‍या?’ दरअसल ये सवाल वाज‍िब भी है, क्‍योंक‍ि पुरुषों के शरीर में जहां हार्मोंस समुंद्र की तरह स्‍थ‍िर होते हैं. वहीं इसके व‍िपरीत, मह‍िलाओं के शरीर में हार्मोंस की जैसे नद‍िया बहती हैं, जो हर महीने पीर‍ियड्स की वह से, प्रेग्‍नेंसी में तो कभी मोनोपॉज की वजह से थोड़े-थोड़े समय में उबाल मारती रहती हैं. दरअसल महिलाओं के ब‍दलते मूड और उनके इमोशंस को कभी हार्मोन से जोड़ा जाता है, तो कभी उनकी हैब‍िट यानी आदतों से. पर जब विज्ञान के नजरिए से हम इस सवाल को समझना चाहते हैं तो इसका जवाब स‍िर्फ हां या न में नहीं म‍िल सकता.

सच्चाई यह है कि हार्मोन और हैबिट्स (आदतें/लाइफस्टाइल) ये दोनों ही मिलाकर महिलाओं के मूड और दिमाग को चलाते हैं.हार्मोन मूड, एनर्जी, नींद और तनाव ये सभी चीजें आपके र‍िएक्‍शंस को कंट्रोल करती हैं. जबकि आपकी हैबिट्स (नींद, व्यायाम, डाइट, सोशल कनेक्शन, माइंडफुलनेस) इन हार्मोनल उतार-चढ़ाव को संभालने की क्षमता तय करती हैं.

हार्मोन कैसे असर डालते हैं?

एस्ट्रोजन: सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे “मूड-गुड” न्यूरोट्रांसमीटर को बढ़ाता है. इसमें गिरावट से चिड़चिड़ापन, उदासी या ब्रेन फॉग आ सकता है. न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. लिजा मॉस्कोनी “The XX Brain” में बताती हैं कि एस्ट्रोजन मस्तिष्क के मेटाबॉलिज्म और मूड रेगुलेशन में सेंटर है. वे जोर देती हैं कि “हार्मोनल ट्रांजिशन (पीरियड्स, प्रेगनेंसी, मेनोपॉज) में लाइफस्टाइल इंटरवेंशन—नींद, एक्सरसाइज, न्यूट्रिशन—मेंटल हेल्थ को स्थिर रखने में निर्णायक होते हैं.”
प्रोजेस्टेरोन: नींद और शांति में मदद करता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह सुस्ती या मूड स्विंग भी ला सकता है.कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन): लगातार तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो नींद खराब करता है, भूख बदलता है और मूड को अस्थिर बनाता है.
थायरॉइड हार्मोन: कम या ज्यादा थायरॉइड दोनों ही डिप्रेशन, एंग्जायटी और थकान से जुड़े होते हैं.पीरियड्स, प्रेगनेंसी, पोस्टपार्टम, पेरिमेनोपॉज: इन चरणों में हार्मोनल शिफ्ट्स मूड डिसऑर्डर (PMS, PMDD, पोस्टपार्टम डिप्रेशन) का जोखिम बढ़ाते हैं.

हार्मोन मूड, एनर्जी, नींद और तनाव ये सभी चीजें आपके र‍िएक्‍शंस को कंट्रोल करती हैं.

महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य और मेंटल वेलनेस पर लिखने वाली प्रसिद्ध गायनेक डॉ. क्रिस्टियन नॉर्थरप कहती हैं कि “हार्मोन आपकी भावनाओं को प्रभावित करते हैं, पर आपकी दिनचर्या (नींद, डाइट, तनाव प्रबंधन) तय करती है कि आप इन उतार-चढ़ाव को कैसे झेलेंगी.”

हैबिट्स भी है बेहद जरूरीआदतें, हार्मोनल असर को “बफर” या “बूस्ट” कर सकती हैं. जैसे

नींद: 7–9 घंटे की गहरी नींद हार्मोन बैलेंस और इमोशनल रेगुलेशन के लिए जरूरी है.
एक्‍सरसाइज: एरोबिक + स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एंडोर्फिन बढ़ाते हैं, कोर्टिसोल घटाते हैं और मूड स्थिर रखते हैं.
डाइट: प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (आयरन, विटामिन D, B12, ओमेगा-3) मूड और एनर्जी को सपोर्ट करते हैं.
सूरज की रोशनी और सर्कैडियन रिदम: सुबह की रोशनी मेलाटोनिन/सेरोटोनिन साइकिल सेट करती है, जिससे मूड और नींद बेहतर होती है.
सोशल कनेक्शन और माइंडफुलनेस: दोस्त-परिवार से जुड़ाव, मेडिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज तनाव कम करते हैं और इमोशनल रेजिलिएंस बढ़ाते हैं.

कौन ज्यादा ताकतवर है?महिलाओं में होने वाले हार्मोनल शिफ्ट्स जैसे पीरियड्स के पहले हफ्ते, पोस्टपार्टम मूड पर तेज असर डाल सकते हैं ये बात सही है. लेकिन लॉन्ग टर्म में हैबिट्स ज्यादा ताकतवर होती हैं. क्योंकि वे हार्मोनल सेंस‍िट‍िविटी को कम करती हैं और मूड डिसऑर्डर के जोखिम को घटाती हैं. हार्मोन महिलाओं के मूड और दिमाग को चलाते हैं, लेकिन हैबिट्स तय करती हैं कि इन हार्मोनल बदलावों का असर कितना गहरा होगा. तो अब आपको अपनी आदतों से यह तय करना होगा कि आपके हार्मोन आपके मूड को क‍ितना ब‍िगाड़ने या बनाने वाले हैं.

About the Authorदीप‍िका शर्मा News Editor

दीपिका शर्मा पिछले 8 सालों से Hindi से जुड़ी हुई हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्‍शन की टीम को 4 सालों तक लीड किया. उसके बाद Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम की…

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First Published :

September 12, 2026, 08:34 IST

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