5000 साल पुरानी कांस्य थाली आज भी करती है कमाल? बाड़मेर में 10 मिनट की इस मालिश की खूब चर्चा

Last Updated:September 16, 2026, 12:22 IST
5000-Year-Old Pain Relief Therapy Kansa Thali Massage Barmer: राजस्थान के बाड़मेर में 5000 साल पुरानी कांस्य थाली पद्धति से हाथ-पैरों के दर्द और थकान का अचूक इलाज हो रहा है. बाड़मेर के अंकित कुमार तांबा, जिंक और टिन से बनी थाली व प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल कर पैरों की मालिश करते हैं. 10 मिनट की इस मालिश में एक्यूप्रेशर तकनीक का उपयोग होता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. यह मालिश शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालकर डिटॉक्स करती है, जिससे बिना किसी दवाई के दर्द से तुरंत राहत मिल रही है.
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Barmer: भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित राजस्थान के बाड़मेर जिले में इन दिनों एक बेहद प्राचीन और अनोखी प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. हजारों साल पुरानी यह तकनीक बिना किसी अंग्रेजी दवाई के लोगों के हाथ-पैरों के दर्द और थकान को छूमंतर कर रही है. इस पद्धति को ‘कांस्य थाली मालिश’ के नाम से जाना जाता है. यह करीब 5000 साल पुरानी आयुर्वेद आधारित तकनीक है, जो आज के आधुनिक दौर की बीमारियों और दर्दों में भी बेहद कारगर साबित हो रही है.
बाड़मेर शहर के रहने वाले अंकित कुमार इस प्राचीन कांस्य थाली पद्धति के माध्यम से लोगों का पारंपरिक तरीके से इलाज कर रहे हैं. उनकी इस तकनीक में किसी भी प्रकार की रासायनिक दवा या पेनकिलर का इस्तेमाल नहीं होता है. केवल एक साधारण सी दिखने वाली कांस्य की थाली और विशेष तेलों के मिश्रण से वह मरीजों को दर्द से राहत दिला रहे हैं. लोग दूर-दूर से अपनी शारीरिक थकान, मांसपेशियों की भयंकर जकड़न और पुराने दर्द का सफल इलाज करवाने उनके पास पहुंच रहे हैं.
क्या है कांस्य थाली पद्धति और कैसे होती है मालिश?इस प्राचीन पद्धति में इस्तेमाल होने वाली थाली विशेष रूप से तांबा, जिंक और टिन के खास मिश्रण से बनाई जाती है. मालिश की प्रक्रिया भी बेहद अनोखी और आरामदायक है. इस तकनीक में मरीज के पैरों के तलवों पर अच्छी तरह से सरसों का तेल, तिल का तेल या फिर शुद्ध देसी घी लगाया जाता है. इसके बाद पैरों को कांस्य की थाली पर रखा जाता है. एक विशेष मशीन की मदद से थाली को घुमाया जाता है. मशीन का स्विच चालू करते ही थाली घूमनी शुरू हो जाती है और पैरों के तलवों की बहुत ही विशेष तरीके से मालिश होती है.
एक्यूप्रेशर तकनीक से शरीर को मिलता है तुरंत आरामअंकित कुमार बताते हैं कि यह मालिश पूरी तरह से एक्यूप्रेशर के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर काम करती है. जब कांस्य की थाली पैरों के तलवों पर हल्का और संतुलित दबाव डालती है, तो शरीर के विभिन्न दबाव-बिंदुओं (प्रेशर पॉइंट्स) पर सीधा असर पड़ता है. इस दबाव से न केवल पैरों और हाथों का दर्द तुरंत गायब होता है, बल्कि पूरे शरीर की नसों को गजब का आराम मिलता है. इससे शरीर में रक्त का प्रवाह (ब्लड सर्कुलेशन) भी बहुत बेहतर हो जाता है, जिससे मानसिक और शारीरिक थकान तुरंत दूर हो जाती है.
10 मिनट की मालिश और शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशनइस मालिश की पूरी प्रक्रिया लगभग 10 मिनट की होती है. अंकित कुमार के अनुसार, पहले 5 मिनट तक पैरों की क्लॉकवाइज (घड़ी की दिशा में) मालिश की जाती है और उसके बाद अगले 5 मिनट एंटी-क्लॉकवाइज (विपरीत दिशा में) मालिश की जाती है. इस मालिश का सबसे बड़ा और चमत्कारी फायदा यह है कि यह शरीर से विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालती है. मालिश के दौरान शरीर का डिटॉक्स बाहर निकलने के कारण कांस्य की थाली और तेल का रंग काला पड़ जाता है. यह कालापन इस बात का प्रमाण है कि शरीर के अंदर जमा अशुद्धियां प्राकृतिक रूप से बाहर निकल चुकी हैं. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह पद्धति लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
September 16, 2026, 12:22 IST



