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Agricultural Success Story | किसान श्रीराम काजला की सफलता की कहानी | Shriram Kajla Agriculture Success Story Jhunjhunu

Agriculture Success Story Shriram Kajla Jhunjhunu: राजस्थान के झुंझुनूं जिले का श्रीसरदारपुरा गांव आज एक बड़ी कृषि सफलता का गवाह बन रहा है. यहाँ के निवासी श्रीराम काजला पहले ई-मित्र कियोस्क चलाकर अपना गुजारा करते थे, लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान काम बंद होने पर उन्होंने अपनी पुश्तैनी खेती की ओर रुख किया. शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक फसलें जैसे ग्वार, गेहूं और सरसों उगाईं, लेकिन पानी की कमी और कम मुनाफे के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रही. इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय खेती में नवाचार (Innovation) करने का साहस दिखाया.

झुंझुनूं क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत है, जहाँ ट्यूबवेल 1000 फीट की गहराई पर भी सूख चुके हैं. श्रीराम ने इस समस्या का समाधान ‘फार्म पॉन्ड’ के रूप में निकाला. सरकारी सहायता से उन्होंने 30×30 का फार्म पॉन्ड बनवाया और बारिश के पानी को सहेजना शुरू किया. सिंचाई के लिए उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई, जिससे पानी की लगभग 40 प्रतिशत तक बचत होने लगी. पानी के इस सटीक प्रबंधन ने उन्हें बागवानी फसलों की ओर कदम बढ़ाने का आत्मविश्वास दिया.

नेट हाउस और जैविक खेती से बढ़ा मुनाफाश्रीराम ने अपनी 0.6 हेक्टेयर भूमि के एक हिस्से में 2200 वर्ग मीटर का नेट हाउस तैयार किया. इसमें वे साल में दो बार खीरे की फसल लेते हैं, जिससे उन्हें सालाना 5 लाख रुपए तक की आय हो रही है. रासायनिक खादों के बजाय उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट और डीकंपोजर का उपयोग कर जैविक खेती को प्राथमिकता दी. इसके अलावा उन्होंने मिश्रित खेती (Mixed Farming) के तहत 200 नींबू और पपीते के पेड़ भी लगाए हैं, जिनसे उन्हें डेढ़ से दो लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होती है. प्याज, मिर्च और तरबूज की खेती भी उनकी आय के प्रमुख स्रोत हैं.

क्षेत्र के किसानों के लिए बने रोल मॉडलश्रीराम काजला आज हर दूसरे दिन करीब 8 क्विंटल खीरा सिंघाना मंडी में बेचते हैं. उनकी इस सफलता में उनकी पत्नी का भी बड़ा योगदान है. श्रीराम न केवल स्वयं मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों को मुफ्त बीज और तकनीकी जानकारी देकर जागरूक भी कर रहे हैं. उनकी इस आधुनिक खेती को देखने के लिए अब कृषि वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी भी उनके खेत तक पहुंच रहे हैं. महज 10 लाख की लागत से शुरू हुआ नेट हाउस आज उन्हें सालाना 10 लाख रुपए तक की शुद्ध आय प्रदान कर रहा है.

Q1. श्रीराम काजला ने पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक खेती की ओर कदम क्यों बढ़ाया?Answer: श्रीराम काजला पहले ई-मित्र कियोस्क चलाते थे, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान काम बंद होने से उनकी आय रुक गई. इसके बाद उन्होंने खेती शुरू की, लेकिन ग्वार, गेहूं और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों में पानी की कमी और कम मुनाफे के कारण उन्हें नुकसान हुआ. ऐसी स्थिति में उन्होंने हार मानने के बजाय नवाचार अपनाया और आधुनिक तकनीकों के जरिए खेती को लाभकारी बनाने का फैसला किया.

Q2. पानी की कमी से निपटने के लिए श्रीराम ने कौन-कौन से उपाय अपनाए?Answer: झुंझुनूं क्षेत्र में पानी की भारी कमी को देखते हुए श्रीराम ने फार्म पॉन्ड बनवाया, जिसमें बारिश का पानी इकट्ठा किया जाता है. इसके साथ ही उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई, जिससे पानी की लगभग 40 प्रतिशत बचत होने लगी. इन उपायों से उन्होंने सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग किया और बागवानी फसलों की खेती संभव बना ली.

Q3. नेट हाउस तकनीक से श्रीराम काजला को कितना फायदा हुआ?Answer: श्रीराम ने 2200 वर्ग मीटर क्षेत्र में नेट हाउस स्थापित किया, जिसमें वे साल में दो बार खीरे की फसल लेते हैं. इस तकनीक से उन्हें सालाना करीब 5 लाख रुपए की आय हो रही है. नियंत्रित वातावरण में फसल उगाने से उत्पादन बेहतर होता है और बाजार में अच्छी कीमत भी मिलती है, जिससे उनकी कुल आय में लगातार वृद्धि हुई है.

Q4. जैविक और मिश्रित खेती से उनकी आय कैसे बढ़ी?Answer: श्रीराम ने रासायनिक खादों की जगह वर्मी कम्पोस्ट और डीकंपोजर का उपयोग कर जैविक खेती अपनाई. इसके साथ ही उन्होंने मिश्रित खेती के तहत नींबू और पपीते के करीब 200 पेड़ लगाए. इनसे उन्हें सालाना डेढ़ से दो लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होती है. इसके अलावा प्याज, मिर्च और तरबूज जैसी फसलें भी उनकी आय के मजबूत स्रोत बन गई हैं.

Q5. श्रीराम काजला अन्य किसानों के लिए कैसे प्रेरणा बन गए हैं?Answer: श्रीराम काजला आज अपने क्षेत्र के किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं. वे हर दूसरे दिन 8 क्विंटल खीरा मंडी में बेचते हैं और अच्छी आय कमा रहे हैं. साथ ही वे अन्य किसानों को मुफ्त बीज और आधुनिक खेती की जानकारी देकर उन्हें भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनकी सफलता को देखने अब कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी भी उनके खेतों का दौरा कर रहे हैं.

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