Agriculture | गुलाब की खेती से किसानों की बढ़ेगी कमाई, कृषि महाविद्यालय में सिखाए जा रहे खेती के खास तरीके

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गुलाब की खेती से किसानों की बढ़ेगी कमाई, सिखाए जा रहे खेती के खास तरीके
Last Updated:August 07, 2026, 21:13 IST
Udaipur Rose Cultivation : उदयपुर में किसानों को गुलाब की खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. कृषि महाविद्यालय और हॉर्टिकल्चर विभाग के विशेषज्ञ आधुनिक तकनीक व पॉलीहाउस खेती के फायदे बता रहे हैं. विशेषज्ञ किसानों को बता रहे हैं कि गुलाब की खेती किस तरह पारंपरिक खेती से अलग तरीके से की जा सकती है. गुलाब का इस्तेमाल सजावट, धार्मिक आयोजनों, शादी समारोहों और कई अन्य कामों में होता है, जिसके चलते इसकी मांग बनी रहती है.
पारंपरिक खेती के साथ अब किसान अपनी अतिरिक्त आय बढ़ाने के लिए फूलों की खेती की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं. खास तौर पर गुलाब की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनती जा रही है. बाजार में गुलाब की मांग लगातार बनी रहती है, इसलिए उदयपुर के कृषि महाविद्यालय की ओर से किसानों को गुलाब की खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसमें किसानों को पौधे तैयार करने से लेकर कटिंग, रोपाई और पौधों की देखरेख तक की जानकारी दी जा रही है.
उदयपुर शहर के हॉर्टिकल्चर विभाग के विशेषज्ञ किसानों को बता रहे हैं कि गुलाब की खेती किस तरह पारंपरिक खेती से अलग तरीके से की जा सकती है. किसानों को गुलाब की अलग-अलग किस्मों के बारे में जानकारी देने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता के पौधे तैयार करने और उनकी सही तरीके से देखभाल करने के तरीके भी बताए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही तकनीक और मौसम के अनुसार खेती करें तो कम लागत में भी अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गुलाब के पौधों की कटिंग करने के अलग-अलग तरीकों के बारे में भी बताया जा रहा है. पौधे की सही कटिंग किस समय करनी है, कितनी कटिंग करनी है और कटिंग के बाद पौधे की किस तरह देखभाल करनी है, इसकी जानकारी किसानों को दी जा रही है। इसके अलावा सिंचाई, खाद, पोषक तत्व और पौधों को बीमारी व कीटों से बचाने के उपाय भी समझाए जा रहे हैं. इससे किसान खेत में गुलाब के स्वस्थ पौधे तैयार कर सकें और बेहतर उत्पादन ले सकें.
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उदयपुर जिले के मावली, कुराबड़, झाड़ोल और फलासिया क्षेत्र से भी किसान गुलाब की खेती के पारंपरिक और आधुनिक तरीके सीख रहे हैं. किसानों को बताया जा रहा है कि फूलों की खेती को केवल छोटे स्तर तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है, बल्कि बाजार की मांग को देखते हुए इसे व्यावसायिक स्तर पर भी किया जा सकता है. गुलाब का इस्तेमाल सजावट, धार्मिक आयोजनों, शादी समारोहों और कई अन्य कामों में होता है, जिसके चलते इसकी मांग बनी रहती है.
विशेषज्ञ किसानों को पॉलीहाउस में गुलाब की खेती के फायदे भी बता रहे हैं. पॉलीहाउस में तापमान और वातावरण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे फसल को मौसम के उतार-चढ़ाव से बचाने में मदद मिलती है. साथ ही पौधों की बेहतर देखभाल होने से अच्छी गुणवत्ता के फूल प्राप्त किए जा सकते हैं. किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि पॉलीहाउस तैयार करने के लिए सरकार की ओर से संचालित योजनाओं के तहत किसानों को सब्सिडी का लाभ मिल सकता है.
राज्य सरकार की योजनाओं के अनुसार किसानों को पॉलीहाउस और संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दी जा रही है. पात्रता और योजना के नियमों के अनुसार किसानों को करीब 50 से 70 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है. कृषि विशेषज्ञों की ओर से किसानों को इन योजनाओं की जानकारी देने के साथ आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में भी बताया जा रहा है. इससे किसान कम शुरुआती लागत में आधुनिक तकनीक को अपनाकर फूलों की खेती शुरू कर सकते हैं.
आने वाले समय में गुलाब समेत अन्य फूलों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा विकल्प बन सकती है. खासकर ऐसे किसान जो पारंपरिक फसलों के साथ कुछ नया करना चाहते हैं, उनके लिए फूलों की खेती फायदेमंद साबित हो सकती है.उदयपुर में किसानों को दिए जा रहे इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना और खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के नए रास्ते दिखाना है.
First Published :
August 07, 2026, 21:13 IST



