Agriculture Tips | Bajra Leaf Spot Disease | बाजरे पर लीफ स्पॉट का खतरा, जानें बचाव के उपाय

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Agriculture Tips: बाजरे पर लीफ स्पॉट का खतरा, जानें बचाव के उपाय
Last Updated:August 10, 2026, 08:33 IST
Agriculture Tips: नागौर जिले में बारिश के बाद नमी बढ़ने से बाजरे की फसल में लीफ स्पॉट (पत्ती धब्बा) रोग के लक्षण दिखे हैं. कृषि विभाग ने किसानों को चेतावनी जारी करते हुए नियमित निगरानी और फफूंदनाशक छिड़काव की सलाह दी है. जिले में 1.56 लाख हेक्टेयर से अधिक में बाजरे की बुवाई हुई है और 20 लाख क्विंटल उत्पादन का अनुमान है. रोग नियंत्रण के लिए मैनकोजेब या एजॉक्सीस्ट्रोबिन के प्रयोग की सिफारिश की गई है.
बारिश के बाद बाजरे की फसल में लगातार बढ़ी नमी के कारण अब फफूंदजनित रोगों का खतरा भी बढ़ने लगा है. नागौर जिले के कई क्षेत्रों में बाजरे की पत्तियों पर पत्ती धब्बा यानी लीफ स्पॉट रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे हैं. खेतों में पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे नजर आ रहे हैं. ऐसे में किसानों को अभी से फसल की नियमित निगरानी करने की जरूरत है. वहीं, फसल में रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही समय रहते नियंत्रण के उचित उपाय अपनाने चाहिए.
कृषि विभाग नागौर के सहायक निदेशक शंकर राम सियाग ने बताया कि मैदानी निरीक्षण के दौरान सामने आया है कि लीफ स्पॉट रोग की शुरुआत बाजरे की पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बों के रूप में होती है. शुरुआत में ये धब्बे भूरे, पीले, सफेद या गहरे रंग के दिखाई दे सकते हैं और धीरे-धीरे इनका आकार बढ़ सकता है. लगातार बारिश, खेत में अधिक नमी और वातावरण में आर्द्रता रहने पर इस रोग के तेजी से फैलने की आशंका रहती है. संक्रमण अधिक होने पर बाजरे की पत्तियां कमजोर होकर सूखने लगती हैं.
उन्होंने बताया कि पत्तियों पर अधिक संक्रमण होने से पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित होती है. इसका सीधा असर पौधे की बढ़वार, दाने के विकास और उसकी गुणवत्ता पर पड़ सकता है. यदि रोग को शुरुआती अवस्था में नियंत्रित नहीं किया गया तो संक्रमण पत्तियों के बड़े हिस्से तक फैल सकता है. इससे पौधे की भोजन बनाने की क्षमता कम होने के साथ बाजरे की उपज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
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इस बार जिले में बाजरे की बुवाई निर्धारित लक्ष्य से अधिक क्षेत्र में हुई है. कृषि विभाग की ओर से बाजरा बुवाई का लक्ष्य 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया था, जबकि किसानों ने करीब 1 लाख 56 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरे की बुवाई की है. इस क्षेत्र से करीब 20 लाख क्विंटल तक बाजरा उत्पादन होने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में यदि फसल में लीफ स्पॉट रोग का प्रकोप बढ़ता है तो उत्पादन प्रभावित होने की चिंता किसानों के बीच बढ़ गई है.
कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें. पत्तियों पर रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर उचित फफूंदनाशक का प्रयोग करें. कृषि विभाग के अनुसार शुरुआती स्तर पर रोग की पहचान कर समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाने से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है. इसी क्रम में कृषि विभाग की टीम बाजरे के खेतों का निरीक्षण कर रही है और किसानों को रोग से बचाव एवं नियंत्रण के संबंध में आवश्यक जानकारी दे रही है.
सहायक निदेशक कृषि विभाग नागौर शंकर राम सियाग ने बताया कि पत्ती धब्बा रोग को नजरअंदाज करने पर इसका संक्रमण तेजी से फैल सकता है. सामान्य प्रकोप की स्थिति में मैनकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी या हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत ईसी की 1 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है. अधिक प्रकोप की स्थिति में एजॉक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत + डाइफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एससी की 1 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है.
उन्होंने बताया कि फफूंदनाशक का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना अधिक प्रभावी रहता है. आवश्यकता पड़ने पर 10 से 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि किसानों को दवाओं का प्रयोग कृषि विशेषज्ञ की सलाह और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए. सियाग ने कहा कि रोग की समय पर पहचान और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उपचार करने से किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है.
First Published :
August 10, 2026, 08:33 IST



