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Barmer | Rajasthan | पाकिस्तान जाता था पानी… बाड़मेर में जमीन के नीचे बना पूरा नेटवर्क, 300 फीट गहराई में सुरंग और कमरा, कहानी चौंकाने वाली

Last Updated:May 04, 2026, 15:39 IST

Story Of Barmer British Era Surang Attached To Pakistan: बाड़मेर के गडरारोड़ में 150 साल पुराना ऐतिहासिक कुआं है. बताया जाता है कि इसमें 300 फीट गहरी सुरंग है. कहा जाता है कि भाप इंजन ट्रेनों के लिए जोधपुर से पाकिस्तान हैदराबाद तक पानी सप्लाई करता था. रेलवे टैंकरों के जरिए पानी पाकिस्तान के न्यू छोर, बाड़मेर, समदड़ी और लूणी तक पहुंचाया जाता था. यहां दो रेलकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते थे.

बाड़मेर. रेगिस्तान की तपती धरती पर पानी हमेशा से सबसे कीमती संसाधन रहा है, लेकिन बाड़मेर की रेत में छिपा यह करीब 150 साल पुराना कुआं सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि उस दौर की अद्भुत इंजीनियरिंग का नमूना भी है. इस कुएं से जुडी करीब 300 फीट गहरी सुरंग की कहानी आज भी लोगों को हैरान कर देती है.

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गडरारोड़ में स्थित यह ऐतिहासिक कुआं उस समय बनाया गया था, जब आधुनिक तकनीक और मशीनरी का कोई अस्तित्व नहीं था. इसके बावजूद उस दौर के कारीगरों और इंजीनियरों ने ऐसा सिस्टम तैयार किया, जो आज भी किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. बताया जाता है कि इस कुएं के भीतर करीब 300 फीट नीचे एक लंबी सुरंग बनाई गई थी, जो आसपास के जल स्रोतों से जुड़ी हुई थी. इसी वजह से कुएं में लगातार पानी बना रहता था.

सुरंग के भीतर कमरा, 24 घंटे रहती थी निगरानीसाल 1900 के आसपास इस कुएं के समानांतर एक और कुआं खोदा गया और दोनों को सुरंग के जरिए जोड़ दिया गया. उस समय भाप के इंजन से मोटर चलाकर कुएं से पानी बाहर निकाला जाता था. करीब 300 से 400 फीट नीचे बनी इस सुरंग में एक कमरा भी तैयार किया गया था, जहां दो रेलकर्मी 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते थे. वे इस पूरे सिस्टम की निगरानी करते थे, ताकि पानी की आपूर्ति लगातार बनी रहे.

अंग्रेजों ने कराया निर्माण, पाकिस्तान तक जाता था पानीबताया जाता है कि इस कुएं के मीठे पानी का इस्तेमाल जोधपुर से लेकर पाकिस्तान के हैदराबाद तक के रेलवे रूट पर किया जाता था. रेलवे टैंकरों के जरिए पानी पाकिस्तान के न्यू छोर, बाड़मेर, समदड़ी और लूणी तक पहुंचाया जाता था. आजादी के बाद भी लंबे समय तक इसी कुएं से सीमावर्ती इलाकों में पानी की सप्लाई जारी रही.

ब्रिटिश दौर की इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरणब्रिटिश काल में जब जोधपुर से हैदराबाद तक रेल मार्ग पर भाप इंजन चलते थे, तब यह कुआं रेलवे के लिए किसी वॉटर स्टेशन से कम नहीं था. भाप इंजनों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती थी और यह कुआं उस जरूरत को पूरा करता था. ट्रेनें यहां रुकती थीं और इसी कुएं से पानी भरकर आगे की यात्रा पर निकलती थीं.

आज भले ही आधुनिक तकनीक ने पानी की आपूर्ति के नए साधन विकसित कर दिए हों, लेकिन बाड़मेर के गडरारोड़ का यह कुआं उस समय की सोच, मेहनत और तकनीकी समझ का ऐसा उदाहरण है, जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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