सुबह उठते ही धुंधला दिखना हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत, डॉक्टर ने बताए अहम लक्षण

फरीदाबाद: सुबह नींद से उठने के बाद अगर कुछ मिनटों तक आपको धुंधला दिखाई देता है और नजर साफ होने में समय लगता है, तो इसे केवल नींद या थकान का असर मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. कई लोग इसे सामान्य समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं…लेकिन अगर यह परेशानी रोजाना होने लगे तो यह आंखों से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकती है. ऐसे में समय रहते सही जांच और इलाज बेहद जरूरी हो जाता है. आखिर सुबह उठते ही धुंधला क्यों दिखाई देता है, किन लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए और कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है आइए जानते हैं विशेषज्ञ की सलाह.
सुबह उठते ही धुंधला दिखाई देना गंभीर बीमारी का संकेत
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की सीनियर आंखों की डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं कि आंखों का कोई भी लक्षण पूरी तरह सामान्य नहीं माना जाना चाहिए. यदि कभी-कभार सुबह उठने पर हल्का धुंधलापन महसूस हो और कुछ देर बाद अपने आप ठीक हो जाए, तो कई बार इसे सामान्य माना जा सकता है. लेकिन यदि हर रोज सुबह उठते ही धुंधला दिखाई दे और यह परेशानी लगातार बनी रहे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है.
डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं कि यदि रोज सुबह उठने के बाद नजर धुंधली रहती है और धीरे-धीरे दिन चढ़ने के साथ साफ होने लगती है, तो यह आंखों की एक गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है.
आंखों की जांच कराना है जरूरी
डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं हमारी आंख में एक महत्वपूर्ण संरचना होती है, जिसे आम भाषा में काली पुतली कहा जाता है. कुछ बीमारियों में रातभर सोने के दौरान इस हिस्से में सूजन आ सकती है या पानी जमा हो सकता है. इसकी वजह से सुबह उठते समय धुंधला दिखाई देता है, जबकि दिनभर में धीरे-धीरे नजर सामान्य होने लगती है. यदि ऐसा बार-बार हो रहा है, तो आंखों की विस्तृत जांच कराना बेहद जरूरी है.
इन समस्याओं को न करें इग्नोर
डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल भी आंखों पर बुरा असर डाल रहा है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में ड्राइनेस यानी सूखापन बढ़ सकता है. इसकी वजह से आंखों में चुभन होना. पानी आना, आंखें लाल होना, आंखों का बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस होना और सुबह उठते समय बार-बार धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. यदि ये समस्याएं लगातार बनी रहें… तो यह केवल ड्राई आई ही नहीं… बल्कि पुतली से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत भी हो सकती हैं. इसलिए ऐसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.
आई ड्रॉप का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें
डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदकर इस्तेमाल करना बिल्कुल गलत है. कई लोग आंखों में जलन या धुंधलापन होने पर अपने आप आई ड्रॉप डालना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. कुछ आई ड्रॉप्स के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं. इनके गलत इस्तेमाल से आंखों का प्रेशर बढ़ सकता है और सफेद मोतियाबिंद जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं. इसलिए किसी भी आई ड्रॉप का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए.
आंखों की नियमित जांच है जरूरी
डॉ. रश्मि मित्तल बताती हैं 40 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार आंखों की नियमित जांच जरूर करानी चाहिए. काला मोतियाबिंद यानी ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है. कई बार मरीज को तब तक बीमारी का पता नहीं चलता…जब तक आंखों को स्थायी नुकसान नहीं पहुंच जाता. इसलिए समय-समय पर रूटीन स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है. नियमित जांच से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज शुरू कर आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है.



