‘करंट देकर जलाया शव’… भीलवाड़ा में बीमा का खूनी खेल: बेटे ने खोला पिता की हत्या का राज!

Last Updated:May 11, 2026, 18:11 IST
Fake Insurance Murder Case: भीलवाड़ा में सामने आए इस मामले ने सभी को हैरान कर दिया है, जहां एक बीमार व्यक्ति की मौत को बिजली हादसा बताकर बीमा क्लेम लेने की कोशिश का आरोप लगा है. बेटे के बयान और डॉक्टर की सतर्कता ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया, जिसके बाद पुलिस अब बड़े नेटवर्क की जांच में जुट गई है.
मृतक दीपक के बेटे देवांश ने खोली गैंग की सच्चाई
भीलवाड़ा. भीलवाड़ा में एक बीमार व्यक्ति की मौत को बिजली हादसे का रूप देकर बीमा क्लेम हड़पने की साजिश का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अब इस मामले में मृतक के बेटे ने पुलिस के सामने जो खुलासे किए हैं, उसने पूरे घटनाक्रम को और भी गंभीर बना दिया है. बेटे का आरोप है कि पहले उसके पिता का भारी बीमा करवाया गया और फिर उन्हें राजस्थान लाकर मौत के घाट उतार दिया गया. डॉक्टर की सूझबूझ की देन है कि यह मामला साधारण करंट हादसे के बजाय संदिग्ध हत्या के रूप में सामने आ गया. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और गुजरात तक इसकी कड़ियां तलाश रही है.
बताया जा रहा है कि अहमदाबाद निवासी 36 वर्षीय दीपक भाई लंबे समय से बीमार थे. आरोप है कि कुछ लोगों ने उनकी बीमारी और कमजोरी का फायदा उठाया. 7 मई को उन्हें इलाज के बहाने भीलवाड़ा लाया गया. रात के समय उनकी मौत हो गई, लेकिन आरोपियों ने इसे सामान हादसा दिखाने की कोशिश की. शव के साथ छेड़छाड़ कर करंट लगने जैसा माहौल बनाया गया ताकि बीमा क्लेम आसानी से हासिल किया जा सके.
बेटे ने खोला पूरा राजमृतक के बेटे देवांश ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा किया है. उसने पुलिस को बताया कि सूरज, विशाल और अर्जुन नाम के लोग पहले लोगों का बड़ा बीमा करवाते थे. इसके बाद उन्हें गुजरात से राजस्थान लाकर मौत के घाट उतार दिया जाता था. देवांश के अनुसार उसके पिता दीपक भाई को भी करंट दिया गया था. बाद में शव को इस तरह तैयार किया गया ताकि मामला बिजली हादसे जैसा लगे. आरोपी शव को अस्पताल छोड़कर फरार हो गए. लेकिन अस्पाताल में डॉक्टरों ने इस पूरे मामले को उजागर करने में एक बड़ी भूमिका निभाई.
डॉक्टर को ऐसे हुआ शकमांडल अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर तैनात सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. रोहित सेहरावत ने बताया कि रात में एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था. परिजनों ने दावा किया कि खेत में करंट लगने से मौत हुई है, लेकिन जांच के दौरान कई बातें संदिग्ध लगीं. हाथ और पैरों पर जलने के निशान थे, जबकि शरीर पर धुएं जैसा कालापन दिखाई दे रहा था. सीने पर ईसीजी इलेक्ट्रोड के निशान भी मिले. पूछताछ में परिजन संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद डॉक्टर ने तुरंत पुलिस को सूचना दे दी.
पुलिस जांच में जुटीसूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को मोर्चरी में रखवाया गया. सुबह पोस्टमार्टम कराया गया और जरूरी सैंपल जांच के लिए भेजे गए. पुलिस ने विश्वास सूरज सैमुअल, भीखा भाई और डालू गाडरी को गंगरार टोल नाके से हिरासत में लिया. गांधीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस की एक टीम गुजरात भी भेजी गई है, क्योंकि आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से इसी तरह बीमा क्लेम के लिए लोगों को निशाना बना रहा था.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़दीपक भाई पहले से बीमारी से जूझ रहे थे. परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार होगा, लेकिन घर लौटने से पहले ही उनकी मौत की खबर आ गई. मां चंपाबेन बेटे की मौत से टूट चुकी हैं, जबकि छोटा बेटा देवांश अब बिना पिता के जिंदगी बिताने को मजबूर है. इस पूरे मामले ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है.
ऐसे काम करता था गिरोहपुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर, बीमार और शराब के आदी लोगों को निशाना बनाता था. उनके नाम पर भारी बीमा पॉलिसी करवाई जाती थी. इसके बाद इलाज के बहाने राजस्थान लाकर शराब के नशे में रखा जाता और फिर हत्या कर शव को करंट हादसे जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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