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Desi Gulab Farming | Pushkar Rose Farming News Ajmer

Last Updated:April 16, 2026, 08:19 IST

Desi Gulab Farming: तीर्थराज पुष्कर में चेत्र और वैशाख माह के दौरान करीब 2000 बीघा क्षेत्र में देसी गुलाब की बंपर पैदावार हो रही है. यहाँ से रोजाना 3 हजार किलो फूल मंडियों के जरिए अजमेर दरगाह और विभिन्न मंदिरों में सप्लाई किए जा रहे हैं. फूलों के अधिक उत्पादन के कारण यहाँ गुलकंद बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है. गुलाब के साथ-साथ अब किसान गेंदा और मोगरा जैसी अन्य फसलों को भी अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं.

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अजमेर/पुष्कर. तीर्थराज पुष्कर इन दिनों देसी गुलाब की भीनी-भीनी खुशबू से सराबोर है. ब्रह्मा नगरी के नाम से प्रसिद्ध यह पवित्र क्षेत्र न केवल अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की फूलों की खेती भी अपनी एक खास पहचान बना चुकी है. इन दिनों पुष्कर क्षेत्र के करीब 2000 बीघा से अधिक रकबे में देसी गुलाब की बंपर पैदावार हो रही है. चारों तरफ खिले गुलाब के फूल न केवल आँखों को सुकून दे रहे हैं, बल्कि इस खेती ने यहाँ के हजारों किसानों की आजीविका को भी मजबूती प्रदान की है. चेत्र और वैशाख के महीने में होने वाली यह पैदावार पुष्कर को ‘गुलाब की नगरी’ के रूप में और अधिक पहचान दिला रही है.

स्थानीय किसान सुनील के अनुसार, इन दिनों पुष्कर की मंडियों से रोजाना 2 से 3 हजार किलो गुलाब के फूल बाहर भेजे जा रहे हैं. इन फूलों की मांग केवल स्थानीय बाजारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अजमेर की विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह सहित देश के कई बड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर यहाँ के गुलाबों की भारी मांग रहती है. धार्मिक आयोजनों और रस्मों में इन देसी गुलाबों का विशेष महत्व होने के कारण किसानों को सालभर बाजार मिलता रहता है. हालांकि, चेत्र और वैशाख के महीने में आवक बहुत ज्यादा होने के कारण बाजार भाव में थोड़ी गिरावट जरूर आई है, लेकिन उत्पादन अधिक होने से किसान संतुष्ट नजर आ रहे हैं.

गुलकंद और औषधि निर्माण का मुख्य केंद्रपुष्कर के गुलाबों की खासियत यह है कि इनका उपयोग केवल सजावट या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है. सीजन के दौरान यहाँ बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाला गुलकंद तैयार किया जाता है. यहाँ का गुलकंद अपने बेहतरीन स्वाद और औषधीय गुणों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है. किसान बताते हैं कि चेत्र और वैशाख की जलवायु गुलाब के पौधों के लिए सबसे अनुकूल होती है, जिससे फूलों का आकार और खुशबू दोनों ही सर्वश्रेष्ठ स्तर पर होते हैं. यही कारण है कि यहाँ के गुलाब से बने उत्पादों की मांग हमेशा बनी रहती है.

पुष्कर बना फूलों की विविधता का गढ़गुलाब के अलावा पुष्कर क्षेत्र के किसान अब अपनी खेती में विविधता ला रहे हैं. यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल जलवायु को देखते हुए अब गेंदा, मोगरा, जाफरी और कोलकती लेमन जैसे फूलों की भी बड़े स्तर पर खेती की जा रही है. किसान अब पारंपरिक फसलों के स्थान पर फूलों की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि इसमें आय की संभावनाएं अधिक हैं. पुष्कर का यह फूलों का बाजार अब राजस्थान के एक प्रमुख हब के रूप में विकसित हो चुका है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें

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Location :

Pushkar,Ajmer,Rajasthan

First Published :

April 16, 2026, 08:19 IST

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