खेत बने आस्था का केंद्र! धौलपुर के इस गांव में मंदिरों में नहीं, बल्कि खेतों में पकता है भगवान का प्रसाद

धौलपुर के इस गांव में मंदिरों में नहीं,बल्कि खेतों में पकता है भगवान का प्रसाद
Dholpur Hindi News: धौलपुर जिले के लुहारी गांव की एक परंपरा आज भी सबको हैरत में डाल देती है. यहाँ पिछले 1100 वर्षों से एक ऐसी रीत चली आ रही है, जिसके तहत गांव पर आने वाले संकटों को टालने के लिए विशेष आयोजन किया जाता है. इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि भगवान का प्रसाद किसी रसोई या मंदिर के परिसर में नहीं, बल्कि खुले खेतों में तैयार किया जाता है. मान्यता है कि जब भी गांव पर कोई प्राकृतिक आपदा या संकट की आहट होती है, तो पूरा गांव एक साथ मिलकर इस अनुष्ठान को निभाता है. इस दौरान घरों में चूल्हे नहीं जलते और गांव का हर परिवार खेत में जाकर मिट्टी के चूल्हों पर सात्विक भोजन (प्रसाद) तैयार करता है. ग्रामीणों की अटूट आस्था है कि इस सामूहिक पूजा और खेतों में प्रसाद बनाने की परंपरा से देवता प्रसन्न होते हैं और गांव की सुख-समृद्धि बनी रहती है. पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी धौलपुर की सांस्कृतिक पहचान का एक अटूट हिस्सा बनी हुई है




