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GenAI in Real estate| AI in Proprty| AI बताएगा कहां मिलेगा सबसे सस्ता-अच्छा फ्लैट? रियल एस्टेट की लेटेस्ट रिपोर्ट क्या बता रही

GenAI in Property: हो सकता है कि आने वाले दिनों में आप एआई से पूछें कि सबसे सस्ता और अच्छा फ्लैट कहां मिलेगा और एआई आपको जवाब दे दे. वहीं फ्लैट निर्माण करने वाले डेलवलपर्स पूछें कि ग्राहकों को किन सुविधाओं वाले अपार्टमेंट ज्यादा पसंद आ रहे हैं और एआई न केवल जवाब दे बल्कि पूरे के पूरे प्रोजेक्ट का रोडमैप तैयार करके दे दे. दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की एंट्री अब भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में भी हो गई है.

एआई अब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के कामकाज को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है. ईवाई-पार्थेनन और क्रेडाई की संयुक्त रिपोर्ट ‘GenAI in Indian Real Estate’ इसी का खुलासा कर रही है. रिपोर्ट कहती है कि जेनरेटिव एआई (GenAI) की मदद से डेवलपर्स की बिक्री की रफ्तार में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि नए प्रोजेक्ट्स को बाजार में लाने की प्रक्रिया लगभग 30 प्रतिशत तक तेज हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राहक व्यवहार को समझने, डिजाइन प्रक्रिया को स्वचालित बनाने और प्रोजेक्ट की प्रगति पर लगातार नजर रखने जैसी क्षमताओं के कारण रियल एस्टेट सेक्टर पारंपरिक कामकाज से आगे बढ़कर डेटा और तकनीक आधारित निर्णयों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जो डेवलपर्स शुरुआती चरण में GenAI तकनीक को अपनाएंगे, उन्हें परिचालन स्तर पर बड़े फायदे मिल सकते हैं. कर्मचारियों की उत्पादकता में 20 से 50 प्रतिशत तक सुधार होने की संभावना है, वहीं ग्राहकों को जोड़ने की लागत में भी 20 से 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. इसके अलावा, जिन फैसलों को लेने में पहले कई महीने लग जाते थे, वे अब कुछ हफ्तों या दिनों में लिए जा सकेंगे. रिपोर्ट का मानना है कि इससे डेवलपर्स के लिए जमीन की व्यवहार्यता का आकलन करने, परियोजनाओं की योजना बनाने, निर्माण कार्यों का प्रबंधन करने और ग्राहकों के साथ संवाद स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाएगी.

ईवाई-पार्थेनन इंडिया में रियल एस्टेट प्रैक्टिस के पार्टनर चैतन्य सेठ ने कहा कि GenAI तेजी से मूल्य निर्माण और प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने का अहम माध्यम बनता जा रहा है. उन्होंने कहा कि तकनीक को अपनाने में देरी करना अब कंपनियों के लिए रणनीतिक जोखिम साबित हो सकता है. उनके अनुसार GenAI आधारित बदलाव किसी भी रियल एस्टेट कंपनी के मूल्य को अल्प और मध्यम अवधि में दो से तीन गुना तक बढ़ाने की क्षमता रखते हैं. इससे जमीन खरीदने से लेकर प्रोजेक्ट लॉन्च करने तक का समय 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है, बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक तेजी आ सकती है और लागत व समय प्रबंधन में 5 से 20 प्रतिशत तक बेहतर प्रदर्शन हासिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह केवल डिजिटलीकरण का अगला चरण नहीं है, बल्कि पूरे कारोबारी मॉडल, ग्राहक अनुभव और ब्रांड निर्माण की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव का संकेत है.

रिपोर्ट लॉन्च के अवसर पर क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर जी. पटेल ने कहा कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर का अगला विकास चरण केवल बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियों से तय नहीं होगा, बल्कि बेहतर जानकारी, तेज निर्णय क्षमता और परियोजनाओं के पूरे जीवनचक्र के दौरान अधिक प्रभावी प्रबंधन से निर्धारित होगा. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि जेनरेटिव एआई बिक्री बढ़ाने, परियोजनाओं को तेजी से लॉन्च करने और विभिन्न विभागों की उत्पादकता में सुधार लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है. उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि GenAI का प्रभाव केवल परिचालन दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह योजना निर्माण, डिजाइन, निर्माण, बिक्री और ग्राहक सेवाओं के हर चरण को अधिक प्रभावी बनाने की क्षमता रखता है.

उन्होंने कहा कि भारत का रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से शहरीकरण, बढ़ते बुनियादी ढांचे और लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं के दौर से गुजर रहा है. ऐसे समय में तकनीक आधारित समाधानों का उपयोग करके एक अधिक सक्षम, पारदर्शी और टिकाऊ रियल एस्टेट सेक्टर तैयार किया जा सकता है, जो घर खरीदारों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ देश के शहरी विकास लक्ष्यों को भी गति देगा.

रिपोर्ट के अनुसार, अगले सात वर्षों में GenAI भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 14 से 17 अरब अमेरिकी डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है. यह रियल एस्टेट क्षेत्र के कुल मूल्य में लगभग 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि के बराबर होगा. वहीं व्यापक आर्थिक स्तर पर वर्ष 2030 तक GenAI भारत की जीडीपी में 359 से 438 अरब अमेरिकी डॉलर तक का योगदान कर सकता है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर 5.9 से 7.2 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रभाव डाल सकता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि GenAI की मदद से रियल एस्टेट क्षेत्र में सौदों के मूल्यांकन का समय लगभग 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. भूमि अधिग्रहण और सौदों को अंतिम रूप देने में लगने वाला समय 30 से 35 प्रतिशत तक घट सकता है. इसके साथ ही स्वचालित व्यवहार्यता विश्लेषण, विक्रेता मूल्यांकन और निवेश प्रतिफल आधारित मॉडलिंग की सहायता से डेवलपर्स पहले की तुलना में ढाई गुना अधिक सौदों का मूल्यांकन कर सकेंगे.

रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेटिव एआई का उपयोग रियल एस्टेट विकास के लगभग हर चरण में किया जा सकता है. जमीन की व्यवहार्यता जांचने, किसी क्षेत्र की मांग का विश्लेषण करने और वित्तीय मॉडल तैयार करने का काम कुछ मिनटों में पूरा किया जा सकता है. डिजाइन और योजना प्रक्रिया में स्वचालित लेआउट और मात्रा सूची तैयार करने जैसी सुविधाएं समय बचाने में मदद कर सकती हैं. निर्माण कार्यों में ड्रोन आधारित निगरानी, संभावित देरी की पहचान और समयबद्ध नियंत्रण जैसी तकनीकें परियोजनाओं को अधिक कुशल बना सकती हैं. वहीं बिक्री के क्षेत्र में ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप अभियान, बेहतर लीड प्रबंधन और मांग के अनुसार मूल्य निर्धारण जैसी सुविधाएं डेवलपर्स की बिक्री क्षमता बढ़ा सकती हैं. बिक्री के बाद की सेवाओं में भी प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, स्वचालित ग्राहक सहायता और ग्राहक संतुष्टि विश्लेषण जैसी सुविधाएं बेहतर अनुभव प्रदान कर सकती हैं.

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग तेजी से एआई आधारित परिचालन मॉडल की ओर बढ़ रहा है. डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल तकनीक और जेनरेटिव एआई का उपयोग डेवलपर्स को परियोजनाओं के प्रदर्शन में सुधार करने, निवेश संबंधी फैसले बेहतर बनाने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तेजी से काम करने में मदद कर सकता है.

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