जेड प्लस जैसी सुरक्षा के बीच से गायब हुआ गोडावण का 24 दिन का बच्चा, निगरानी के लिए तैनात थे 50 गार्ड्स

Last Updated:April 30, 2026, 13:34 IST
Jaipur News : मरू भूमि राजस्थान के राज्य पक्षी ‘गोडावन’ (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को बचाने के प्रयासों को बड़ा धक्का लगा है. ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक से गुजरात में पैदा हुआ गोडावन का 24 दिन का बच्चा लापता हो गया है. 10 से ज्यादा समय होने आया है लेकिन उसका अभी तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. हैरानी की बात यह है कि गोडावन का यह बच्चा जेड प्लस जैसी सुरक्षा के बीच से लापता हुआ है. उसकी सुरक्षा में 50 गार्ड्स तैनात थे. इस बच्चे के लापता होने के बाद से वन विभाग की सांसें फूली हुई है. 
गोडावन के इस बच्चे का जन्म गुजरात की धरती पर ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक से हुआ है.
जयपुर. राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के लुप्त होने के कगार पर पहुंचने के बाद उसे बचाए रखने की जद्दोजहद के बीच बड़ी खबर सामने आई है. एक करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद राजस्थान से सटे गुजरात की धरती पर ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक से पैदा हुआ पहला ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का बच्चा लापता हो गया है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस नन्हे पक्षी की सुरक्षा में 50 गार्ड्स का पहरा था. उसे देश के वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा के बराबर माना जा रहा था. लेकिन बाड़े की सुरक्षा में हुई एक चूक ने इस लुप्तप्राय प्रजाति के भविष्य पर फिर से संकट खड़ा हो गया है. कच्छ के इस क्षेत्र में अब केवल तीन मादा गोडावण ही बची हैं. वहां कोई नर पक्षी नहीं है.
दरअसल जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के साथ ही ब्रीडिंग सेंटर रामदेवरा और सम में गोडावण संरक्षण का कार्य जारी है. प्राकृतिक तरीके के साथ GIB व AI के जरिए गोडावण का कुनबा बढ़ाया जा रहा है. यहां राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार के साथ ही वन विभाग की ओर से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर गोडावण संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जा रहा है.
‘जंपस्टार्ट’ तकनीक से बचाया गया था
गोडावण को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने जैसलमेर के सम स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से एक ‘फर्टाइल’ अंडा चुना और इस अंडे को एक विशेष उपकरण (पोर्टेबल इनक्यूबेटर) में रखकर जैसलमेर के प्रजनन केंद्र से बीते 21 मार्च को करीब 770 किलोमीटर दूर गुजरात के नलिया (कच्छ) ले जाया गया. यह सफर करीब 19 घंटे बिना रुके तय किया गया ताकि अंडे का तापमान बना रहे. वहां एक जंगली मादा गोडावण के घोंसले में जैसलमेर से लाया गया अंडा रख दिया गया. इसे ‘सेरोगेसी’ या ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक कहा जाता है. 26 मार्च, 2026 को जब इस अंडे से बच्चा बाहर आया तो इसे संरक्षण की सबसे बड़ी जीत माना गया.
Z+ जैसी सुरक्षा भी नहीं रोक सकीइस चूजे के जन्म के बाद गुजरात सरकार और वन विभाग ने इसे अपनी प्राथमिकता बना लिया. घोंसले के चारों ओर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए 50 सदस्यीय विशेष टीम तैनात की गई. उस इलाके की ओर जाने वाली सड़कों को भी सील कर दिया गया और ऊंचे वॉच टावरों से दूरबीन के जरिए नजर रखी जाने लगी. लेकिन बीते 18 अप्रैल के बाद से इस बच्चे को उसकी मां (जो GPS टैग से लैस है) के साथ नहीं देखा तो वन विभाग के पैरों तले से जमीन खिसकने लगी.
अभी तक गोडावण के इस चूजे का कोई अवशेष नहीं मिले हैंवन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुरक्षा घेरे में कुछ जगहें खाली रह गई थी. आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं रास्तों से कोई शिकारी कुत्ता, सियार या जंगली बिल्ली अंदर घुसी और 24 दिन के इस नन्हे गोडावण को अपना शिकार बना लिया. हालांकि अभी तक गोडावण के इस चूजे का कोई अवशेष नहीं मिले हैं. लेकिन इतने दिनों तक गायब होने से उसके जिंदा होने की उम्मीद भी कम मानी जा रही है. केंद्रीय पर्यवारण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस गोडावण के जन्म पर अपने एक्स पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था कि- लुप्त प्रजाति के उद्धार में यह क्रांतिकारी कदम है. वहीं हाल ही में पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में गोडावन संरक्षण का जिक्र करते हुए इसे बचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की थी.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 30, 2026, 13:33 IST



