क्या आपने देखे हैं ठाकुरजी के 24 रूप? जयपुर के कल्याणजी मंदिर में साल में केवल दो बार खुलता है दर्शन का द्वार

Last Updated:June 25, 2026, 12:21 IST
Kalyanji Temple Jaipur: जयपुर का लगभग 200 वर्ष पुराना कल्याणजी मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं और विशेष दर्शनों के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है. यहां भगवान ठाकुरजी के 24 अवतारों के दर्शन कराए जाते हैं, जो मंदिर की सबसे खास परंपराओं में शामिल है. विशेष बात यह है कि यह दुर्लभ दर्शन साल में केवल दो बार ही होते हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. इन विशेष अवसरों पर मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व भी लोगों को आकर्षित करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन विशेष दर्शनों से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
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जयपुर: जयपुर प्राचीन मंदिरों से जुड़ा शहर हैं जहां वर्षों पुराने ऐतिहासिक मंदिर हैं, जहां दर्शन के लिए भक्तों की जमकर भीड़ उमड़ती हैं. ख़ासतौर जयपुर का चारदीवारी बाजार जहां के हर रास्ते में एक प्राचीन मंदिर स्थित हैं, ऐसे ही जयपुर के चांदपोल बाजार में स्थित कल्याणजी के रास्ते में स्थित 200 वर्ष पुराना कल्याणजी मंदिर जो जयपुर के प्राचीन मंदिरों में से एक हैं. जहां ठाकुर जी कल्याणजी के स्वरूप में विराजमान हैं. लोकल-18 ने जयपुर के इस मंदिर में पहुंच कर मंदिर के इतिहास और मान्यताओं को लेकर बात की तो मंदिर के पुजारी अशोक अग्रवाल बताते हैं. यह मंदिर जयपुर के प्राचीन मंदिरों में से एक हैं, जो अपनी अनूठी परंपराओं और धार्मिक महत्व के लिए श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है.
मंदिर की सबसे खास बात यह है कि मंदिर में विराजित भगवान कल्याणजी के विग्रह में भगवान के 24 अवतार उकेरे हुए हैं, जिनके दर्शन भक्तों को साल में केवल दो बार होते हैं. जिसके लिए लोगों की यहां जमकर भीड़ उमड़ती हैं. भक्तों को कल्याणजी के विग्रह में आखा तीज और मंदिर के पाटोत्सव पर इन 24 अवतारों के दर्शन होते हैं.
सिंधी कैंप की बावड़ी से निकली थी कल्याणजी की प्रतिमालोकल-18 से बात करते हुए मंदिर के पुजारी बताते हैं. इस मंदिर और मंदिर में स्थापित कल्याणजी के रूप में विराजमान ठाकुरजी की मूर्ति का इतिहास भी वर्षों पुराना हैं. मंदिर में स्थापित ठाकुरजी मूर्ति सिंधी कैंप क्षेत्र स्थित एक प्राचीन बावड़ी से प्राप्त हुई थी. मंदिर में ठाकुरजी की काले पाषाण की मूर्ति विराजमान है. जिसका विग्रह साढ़े चार फीट का है और ठाकुरजी के एक हाथ में त्रिशूल व दूसरे हाथ में झामर का श्रृंगार है जो खड़गासन अवस्था में है. मंदिर में राधा-कृष्ण और रुक्मणी के विग्रह भी विराजमान हैं. अशोक अग्रवाल बताते हैं कि जयपुर के अन्य प्राचीन मंदिरों की तरह इस मंदिर की वास्तुकला भी बेहद खास हैं जहां मंदिर की छत और गुंबद शीशमहल से सजा हुआ हैं.
मंदिर की पेंटिंग मे हैं भगवान विष्णु के 24 अवतारों का उल्लेखलोकल-18 से बात करते हुए मंदिर के पुजारी बताते हैं कि मंदिर की वास्तुकला में ठाकुरजी के वराहपुराण के 24 अवतारों की झलक अलग-अलग पेंटिंग में दिखाई देती हैं. जिन्हें मंदिर के निमार्ण के समय बनाया गया था। इन पेंटिंग्स में भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार, वराह अवतार, कूर्म अवतार, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार, वेदव्यास अवतार, पृथु अवतार और मनु अवतार जैसे सभी 24 अवतारों का उल्लेख हैं. इन सभी चौबीस अवतारों की लीलाओं में धर्म की स्थापना, भक्तों की रक्षा तथा अधर्म के विनाश के लिए भगवान के विविध दिव्य प्राकट्यों का परिचय देती हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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