जालोर का ऐतिहासिक कोटकास्ता किला

Last Updated:April 26, 2026, 05:58 IST
Kotkasta Fort Jalore: जालोर जिले के भीनमाल में स्थित ऐतिहासिक कोटकास्ता किला आज गंभीर उपेक्षा का शिकार है. यह किला नाथ संप्रदाय की तपोस्थली और जोधपुर के महाराजा मानसिंह की शरणस्थली रहा है. यहाँ हॉलीवुड फिल्म ‘The Warrior’ की शूटिंग भी हो चुकी है, जिससे इसे वैश्विक पहचान मिली थी. हालांकि, वर्तमान में तीन मंजिला राजमहल और किले के बुर्ज जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो रहे हैं. स्थानीय लोगों ने इस 200 साल पुरानी धरोहर को बचाने के लिए संरक्षण की मांग की है, ताकि इस ऐतिहासिक विरासत को नष्ट होने से बचाया जा सके.
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जालोर. राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरें अपनी वास्तुकला और गौरवशाली अतीत के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं, लेकिन जालोर जिले के भीनमाल उपखण्ड से करीब 20 किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर बसा कोटकास्ता किला आज अपनी दुर्दशा की कहानी बयां कर रहा है. कभी राजसी वैभव और नाथ संप्रदाय की तपोस्थली रहा यह दुर्ग अब प्रशासनिक उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे मलबे के ढेर में तब्दील हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉलीवुड फिल्म ‘The Warrior’ की शूटिंग का गवाह बना यह किला आज अपनों की देखरेख का इंतजार कर रहा है.
इतिहास के पन्नों को पलटें तो कोटकास्ता किले का संबंध जोधपुर के महाराजा मानसिंह और नाथ संप्रदाय से काफी गहरा रहा है. यह स्थान गुरु जलंधरनाथ और गोरखनाथ की तपोस्थली माना जाता है. लोक मान्यताओं के अनुसार, जब महाराजा मानसिंह को राजगद्दी से बेदखल कर दिया गया था, तब उन्होंने इसी क्षेत्र में शरण ली थी. यहाँ एक संत के आशीर्वाद और जलंधरनाथ के पदचिह्न प्राप्त होने के बाद उन्हें पुनः अपनी सत्ता प्राप्त हुई थी. इस उपकार के बदले मानसिंह ने नाथ संप्रदाय को अपना गुरु मानते हुए कोटकास्ता सहित कई गांवों को जागीर में सौंप दिया था.
खंडहर होती भव्य वास्तुकला और श्राप की किंवदंतीकोटकास्ता किला अपनी तीन मंजिला राजमहल संरचना, मजबूत परकोटे, विशाल बुर्जों और प्राचीर के लिए प्रसिद्ध है. दुर्ग के भव्य प्रवेश द्वार आज भी इसके वैभवशाली अतीत की गवाही देते हैं, लेकिन अब ये जर्जर हो चुके हैं. स्थानीय निवासी और इतिहास के जानकार बंसीलाल सोनी का कहना है कि यह किला करीब 200 साल पुराना है, लेकिन संरक्षण न होने से इसकी छतें और दीवारें ढहने के कगार पर हैं. किले के साथ एक रहस्यमयी किंवदंती भी जुड़ी है, जिसके अनुसार एक महिला के श्राप के कारण यह किला वीरान हो गया और यहाँ सन्नाटा पसर गया.
संरक्षण की दरकार: सिर्फ तस्वीरों में न रह जाए इतिहासजिस कोटकास्ता किले ने अपनी अद्भुत वास्तुकला के दम पर विदेशी फिल्मकारों को आकर्षित किया, आज वहां का सन्नाटा डराने लगा है. जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते पुरातत्व विभाग या स्थानीय प्रशासन ने इसके जीर्णोद्धार पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियां इस महान धरोहर को केवल इतिहास की किताबों और पुरानी तस्वीरों में ही देख पाएंगी. पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद, संसाधनों की कमी इस किले को गुमनामी के अंधेरे में धकेल रही है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Jalor,Jalor,Rajasthan
First Published :
April 26, 2026, 05:58 IST



