नौकरी छोड़ पति ने बच्चे को संभाला… पत्नी हीरो चौधरी ऐसे बनी स्कूल व्याख्याता, 152वीं रैंक लाकर रचा इतिहास

Last Updated:May 05, 2026, 18:00 IST
Hero Choudhary Success Story: बाड़मेर की हीरो चौधरी ने स्कूल व्याख्याता हिंदी में 152वीं रैंक हासिल कर सफलता की मिसाल पेश की है. उनकी कामयाबी के पीछे पति खेताराम गोदारा का बड़ा त्याग रहा, जिन्होंने पत्नी के सपने को पूरा करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और बच्चे की जिम्मेदारी संभाली. हीरो ने गांव से पढ़ाई शुरू कर मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया. रोज 3 किमी पैदल स्कूल जाने से लेकर पहले प्रयास में सफलता तक का उनका सफर संघर्ष और समर्पण की प्रेरक कहानी है.
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बाड़मेर. सरहदी बाड़मेर जिले के रामदेरिया की हीरो चौधरी ने स्कूल व्याख्याता हिंदी में 152वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अफसर बनने का सपना पूरा किया है, बल्कि अपनी मेहनत से नई मिसाल भी पेश की है. उनकी इस सफलता के पीछे उनके पति का बड़ा त्याग छिपा है, जिन्होंने नौकरी छोड़कर बच्चे की जिम्मेदारी संभाली, ताकि पत्नी हीरो पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान दे सकें. हीरो चौधरी ने इस भरोसे को जीत में बदलते हुए सफलता का परचम लहरा दिया है.
कहते हैं, पति-पत्नी जिंदगी की गाड़ी के दो पहिए होते हैं. जब दोनों एक-दूसरे का साथ निभाते हैं तो मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो जाता है. सरहदी बाड़मेर के रामदेरिया गांव की हीरो चौधरी की शादी 2018 में कगाऊ निवासी खेताराम गोदारा के साथ हुई. खेताराम एक तेल-गैस कंपनी में कार्यरत थे, लेकिन जब उन्होंने पत्नी के अफसर बनने के सपने को देखा, तो बिना हिचकिचाहट अपनी नौकरी छोड़ दी, ताकि घर और बच्चे की जिम्मेदारी संभाल सकें.
पहले प्रयास में हासिल की स्कूल व्याख्याता में 152वी रैंक
हीरो ने भी पति के इस त्याग को व्यर्थ नहीं जाने दिया और हाल ही में जारी हुए हिंदी व्याख्याता स्कूल शिक्षा में पहले ही प्रयास में 152 वी रेंक के साथ सफलता के झंडे गाड़ दिए है. लोकल18 से खास बातचीत में हीरो ने बताया कि उसने 9वीं तक गांव रामदेरिया में पढाई की और फिर 12वीं तक बाड़मेर के मदर टेरेसा स्कूल में पढ़ी. उसने ग्रेजुएशन वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी कोटा से किया.
तीन किलोमीटर पैदल चलकर जाती थी स्कूल
इसके बाद साल 2017 में अजमेर के केकड़ी से बीएसटीसी की. साल 2021 में तृतीय श्रेणी में अध्यापक की नौकरी लगी और फतेहपुरा जाखडो की ढाणी,सनावड़ा में पोस्टिंग मिल गई. स्कूल पक्की सड़क से दूर थी, ऐसे में हीरो चौधरी को स्कूल के लिए रोजाना 3 किमी पैदल आना जाना पड़ता था. हीरो बताती है कि साल 2018 में शादी हो गई और एक बच्चा है. उसके पति निजी कम्पनी में कार्यरत है और जब उसने स्कूल व्याख्याता भर्ती की तैयारी के लिए कोचिंग ली तो उसके पति ने खुद की नोकरी छोड़ दी ताकि बच्चे को रख सके.
पति की त्याग और खुद की मेहनत से पाई सफलता
हीरो बताती हैं कि पति ने मेरे सपनों को अपना सपना मानकर अपनी नौकरी तक छोड़ दी और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी संभाली. जब भी मैं थकती थी, उनका भरोसा मुझे फिर से खड़ा कर देता था. हीरो का कहना है कि मैंने सिर्फ पढ़ाई नहीं की बल्कि उनके त्याग को सफल बनाने के लिए हर दिन खुद को साबित किया.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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