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भारत का सबसे अभागा क्रिकेटर, डेब्यू टेस्ट में ओपनिंग बॉलिंग-बैटिंग, मारा मैच विनिंग चौका, फिर दोबारा नहीं पहन पाया जर्सी

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भारत का सबसे अभागा क्रिकेटर, डेब्यू में रिकॉर्ड, दोबारा नहीं खेला

Last Updated:June 24, 2026, 07:31 IST

साल 2001 का वो दौर जब सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट एक नई करवट ले रहा था और मोहाली के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ एक ऐसा चेहरा उतरा जिसने अपने डेब्यू टेस्ट में अनोखा रिकॉर्ड बना दिया. भारत का सबसे अभागा क्रिकेटर, डेब्यू में रिकॉर्ड, दोबारा नहीं खेलाZoomभारत का सबसे अभागा क्रिकेटर, डेब्यू टेस्ट में रिकॉर्ड, फिर दोबारा नहीं खेला मैच

नई दिल्ली. खेल की दुनिया में महान खिलाड़ियों का आंकलन इस बात से होता है कि कौन सा खिलाड़ी कितने साल तक अपना वर्चस्व बनाए रख पाया वहीं कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हुए जिन्हें किस्मत सिर्फ एक मौका देती है और वो उसी एक मौके में अपनी ऐसी छाप छोड़ जाते हैं जिसे सदियों तक याद रखा जाता है. महाराष्ट्र की मिट्टी से निकले एक ऐसे ही फौलादी इरादों वाले खिलाड़ी थे इकबाल सिद्दीकी जिनकी कहानी आज भी क्रिकेट के किस्मत कनेक्शन को सामने ला देती है.

साल 2001 का वो दौर जब सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट एक नई करवट ले रहा था और मोहाली के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ एक ऐसा चेहरा उतरा जिसने अपनी निडरता से अंग्रेजों के होश उड़ा दिए थे. इकबाल सिद्दीकी सिर्फ एक गेंदबाज या बल्लेबाज नहीं थे बल्कि वो मैदान पर एक सैनिक की तरह नजर आते थे जिनके पास रफ्तार भी थी और स्विंग का जादुई मिश्रण भी था. उस ऐतिहासिक मोहाली टेस्ट में जब उन्हें टीम इंडिया की कैप थमाई गई तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह खिलाड़ी अपने पहले और इकलौते मैच में ही वो कारनामा कर देगा जो क्रिकेट की किताबों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो जाएगा.

पहले टेस्ट में ओपनिंग बॉलिंग-ओपनिंग बैटिंग का रिकॉर्ड

मैच की पहली पारी में जब इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज ग्राहम थोरपे क्रीज पर जमे हुए थे तब इकबाल ने अपनी धारदार गेंदबाजी से उन्हें पवेलियन की राह दिखाकर यह साबित कर दिया था कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचाने का माद्दा हैलेकिन असली ड्रामा तो अभी बाकी था क्योंकि कुदरत ने उनके लिए कुछ और ही खास लिख रखा था. खेल के आखिरी पड़ाव पर जब भारत को जीत के लिए महज 5 रनों की दरकार थी तब कप्तान सौरव गांगुली ने एक ऐसा जुआ खेला जिसने सबको हैरान कर दिया. दादा ने इकबाल सिद्दीकी को ओपनिंग करने के लिए भेज दिया और इस खिलाड़ी ने बिना किसी दबाव के मैथ्यू हॉगार्ड की गेंद पर वो ऐतिहासिक विनिंग चौका जड़ा जिसने भारत को जीत की दहलीज के पार पहुंचा दिया. इकबाल सिद्दीकी दुनिया के उन विरले क्रिकेटरों में शुमार हो गए जिन्होंने अपने एकमात्र टेस्ट मैच में गेंदबाजी की शुरुआत भी की और दूसरी पारी में बल्लेबाजी की शुरुआत यानी ओपनिंग भी की. यह रिकॉर्ड उनकी बहुमुखी प्रतिभा का जीता-जागता प्रमाण है जो बताता है कि वे किसी भी चुनौती से पीछे हटने वालों में से नहीं थे.

किस्मत ने नहीं दिया साथ 

हालांकि किस्मत ने उन्हें दोबारा नीली जर्सी पहनने का मौका नहीं दिया लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका खौफ सातवें आसमान पर रहता था. महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 300 से ज्यादा विकेट चटकाए और निचले क्रम पर आकर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से विपक्षी कप्तानों की रातों की नींद उड़ा दी थी. उनकी गेंदबाजी में वो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं जब लाल गेंद हवा में बात करती थी और बल्लेबाज सिर्फ अंदाजा ही लगा पाते थे. आज के इस टी20 दौर में जहां रिकॉर्ड्स बनते और टूटते रहते हैं वहां इकबाल सिद्दीकी जैसा ‘वन टेस्ट वंडर’ हमें यह सिखाता है कि खेल सिर्फ आंकड़ों का मोहताज नहीं होता बल्कि वह जज्बे और जुनून की कहानी है. हालांकि कुछ जानकार कहते हैं कि इकबाल सिद्दीकी के साथ में न्याय नहीं किया गया था.

About the AuthorRajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें

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