Inspiring Story I jaipur news I जयपुर के ‘डॉग मैन’ वीरेन शर्मा

Last Updated:July 08, 2026, 19:12 IST
Inspiring Story of Viren Sharma: जयपुर के वीरेन शर्मा को लोग प्यार से ‘डॉग मैन’ के नाम से जानते हैं. पिछले 6 सालों में उन्होंने हजारों बेसहारा स्ट्रीट डॉग्स को नया जीवन दिया है. उनके इंटरनेशनल डॉग्स बाजार में घायल और बेघर डॉग्स को इलाज, देखभाल और परिवार का प्यार मिलता है. 7200 से ज्यादा डॉग्स को आशियाना दिलाने वाले वीरेन शर्मा की पहल आज पशु प्रेम और इंसानियत की मिसाल बन चुकी है.
प्राचीन समय से ही डॉग्स मनुष्यों के साथ रहने वाला जानवर रहा हैं इसलिए आज भी लोग ज्यादा से ज्यादा डॉग्स के साथ समय बिताने की ख्वाहिश रखते हैं, क्योंकि उनके साथ समय बिताने और खेलने से ‘हैप्पी हार्मोन’ रिलीज होते हैं, जो हमें मानसिक रूप से अच्छा महसूस कराते हैं. जयपुर में भी ऐसे लोग हैं जिन्हें डॉग्स की उतनी ही चिंता हैं जितनी इंसानों की, जिन्होंने अपने जीवन का एक लंबा समय स्ट्रीट डॉग्स की जिंदगी संवारने में बिता दिया. इन्हीं में से जयपुर के वीरेन शर्मा जिन्हें लोग जयपुर में ‘डॉग मैन’ के नाम से जानते हैं. वीरेन शर्मा ने अब तक 7200 बेजुबान डॉग्स को आशियाना दिया और उनके जीवन को संवारा हैं.
वीरेन शर्मा की कहानी जयपुर की उन गलियों से शुरू होती है, जहां हर साल लाखों बेजुबान देसी पिल्ले जन्म लेते हैं. पैदा होते ही उनके हिस्से में आता है भूख से तड़पना, तेज धूप में हांफना, ठंड में ठिठुरना और तेज रफ्तार गाड़ियों के नीचे आकर दम तोड़ देते हैं. ये छोटे डॉग्स और पपीज हर मिनट जिंदगी के लिए जद्दोजहद करते हैं. सड़कों पर इन मासूमों की किस्मत में सिर्फ दुत्कार लिखी होती है. ऐसे में वीरेन शर्मा ने जयपुर में एक ऐसा बदलाव किया, जिसने इन बेघर डॉग्स के बच्चों की तकदीर ही बदल दी. इसलिए आज जयपुर में वीरेन शर्मा अपने काम और नाम के लिए फेमस हैं.
वीरेन शर्मा ने 6 साल पहले डॉग्स की जिंदगी बदलने को लिए अपने घर से एक छोटी-सी संस्था ‘PAWS’ शप्रोटेक्शन ऑफ एनिमल एंड वेलफेयर सोसायटी की शुरुआत की थी. उनका मकसद साफ था सड़कों पर दम तोड़ते इन मासूमों डॉग्स को एक महफूज जिंदगी देना. वीरेन शर्मा की इस पहल और लगातार मेहनत, पशुप्रेमियों के लगाव का ही नतीजा यह रहा की अब तक जयपुर के हजारों स्ट्रीट पपीज को आलीशान कोठियों और फ्लैट्स में नया परिवार मिल चुके है. कभी कचरे के ढेर के पास बैठने वाले ये देसी डॉग्स आज लोगों के घरों की चौखट ही नहीं, बल्कि उनके दिलों और मखमली बिस्तरों पर रहते हैं.
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वीरेन शर्मा की वर्षों पहले शुरू की गई डॉग्स की इस पहल का आम लोगों पर नहीं बल्कि राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, जयपुर के पुलिस कमिश्नर और कई बड़े प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नामी सेलिब्रिटीज पर भी पड़ा. सैकड़ों नामचीन हस्तियों ने इन डॉग्स को अडोप्ट किया. यहां तक की वीरेन शर्मा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी भारत के हर शहर में एक समर्पित डॉग पार्क,शेल्टर और 24×7 ट्रॉमा हॉस्पिटल बनाने अपनी कर चुके हैं. इस बात को लोगों ने खूब सराहा. वीरेन शर्मा के इंटरनेशनल डॉग्स बाजार कई किर्तिमान स्थापित कर चुका हैं जिसमें भारत में एक ही दिन में सबसे ज्यादा 128 बेघर डॉग्स को गोद दिलवाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी वीरेन शर्मा के नाम दर्ज हैं.
जयपुर का इंटरनेशनल डॉग्स बाजार सिर्फ जयपुर का ही बल्कि अब राजस्थान का वर्ल्ड क्लास पैट सेंटर हैं, जहां डॉग्स को परिवार के सदस्यों की तरह रखा जाता हैं और उनकी देखभाल की जाती हैं. वीरेन शर्मा ने अब तक हजारों डॉग्स को सड़कों से घायल अवस्था में अपने सेंटर तक लेजाकर उनका इलाज, देखभाल और खान-पान का ख्याल रखा हैं. यहां तक की उन्होंने इस सभी डॉग्स को जलेबी, लड्डू, बर्फी, समोसा, कीवी, फीणी जैसे नाम दिए. जयपुर के इंटरनेशनल डॉग्स बाजार में खासतौर पर उन लोगों के लिए शुरू की गई है, जो किसी वजह से घर पर पेट नहीं रख सकते, लेकिन डॉग्स के साथ समय बिताने की ख्वाहिश रखते हैं, यहां लोग कोरिया और चाइना की तरह घंटों के हिसाब से ले सकेंगे डॉग को रेंट पर ले सकते हैं.
आपको बता दें इंटरनेशनल डॉग बाजार में लोग कुछ घंटों से लेकर हमेशा के लिए डॉग्स अडोप्ट की सुविधा मिलती हैं. लेकिन डॉग्स को लेने के लिए पहले लोगों को कुछ फॉर्मेलिटी पूरी करनी होती हैं जिसमें डॉग्स के साथ उन्हें एक किट दी जाती हैं. इसमें डॉग फूड, डॉग की लीश और वैक्सीनेशन डिटेल्स होती हैं, साथ ही सभी डॉग्स में माइक्रोचिप इंप्लांट किए हुए हैं, जिससे उनकी पहचान हो सके. इसके अलावा, उनके कॉलर में जीपीएस ट्रैकर भी लगाया जाएगा, जिससे उनकी लाइव लोकेशन मिलती रहे, लेकिन यहां डॉग्स हर किसी को नहीं दिया जाता. डॉग्स लेने के लिए शपथ दिलाई जाएगी कि वे हमेशा डॉग्स की रक्षा करेंगे और उनका अपने बच्चों की तरह ध्यान रखेंगे, तब ही उन्हें रेंट पर या अडोप्ट करने के लिए डॉग्स दिए जाते हैं. सेंटर प्रवेश करने के लिए भी “पशु क्रूरता ना करूंगा ना करने दूंगा” का शपथ पत्र देना पड़ता हैं.
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