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हार्ट ब्लॉकेज में स्टेंट बेहतर या बायपास? जानिए किन मरीजों के लिए कौन सा इलाज सही

फरीदाबाद: दिल की नसों में रुकावट आने पर ज्यादातर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि स्टेंट लगवाना सही रहेगा या फिर बायपास सर्जरी करानी चाहिए. कई लोग यह मान लेते हैं कि स्टेंट हर मरीज के लिए सबसे अच्छा इलाज है, जबकि कुछ लोगों को लगता है कि बायपास सर्जरी ही हमेशा बेहतर होती है. लेकिन सच्चाई यह है कि दोनों इलाज की जरूरत हर मरीज में अलग-अलग होती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि ब्लॉकेज कितनी है, कितनी नसों में है, ब्लॉकेज कितनी जटिल है, मरीज को हार्ट अटैक आया है या नहीं और दिल कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है. इसलिए बिना पूरी जांच के किसी एक इलाज को सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता. सही फैसला डॉक्टर सभी रिपोर्ट देखने के बाद ही लेते हैं.

स्टेंट और दूसरा बायपास सर्जरी क्या है

Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में हार्ट एंड लंग सर्जरी विभाग के डिविजनल चीफ डॉ. समीर भाटी बताते हैं हार्ट की नसों में ब्लॉकेज का इलाज मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है पहला स्टेंट और दूसरा बायपास सर्जरी. कौन-सा इलाज करना है यह मरीज की बीमारी और ब्लॉकेज की स्थिति देखकर तय किया जाता है. इसलिए हर मरीज के लिए एक जैसा इलाज सही नहीं होता.

कौन सा इलाज है बेस्ट

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि स्टेंट तब लगाया जाता है जब ब्लॉकेज ज्यादा जटिल नहीं होती. अगर एक या दो नसों में ब्लॉकेज है और उसे आसानी से खोला जा सकता है तो स्टेंट अच्छा विकल्प होता है. कई बार मरीज को अचानक जानलेवा हार्ट अटैक आता है. ऐसे समय में तुरंत स्टेंट लगाकर बंद नस को खोला जाता है जिससे दिल तक फिर से खून पहुंचने लगता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है. ऐसे मामलों में स्टेंट बहुत प्रभावी इलाज साबित होता है.

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि बायपास सर्जरी तब ज्यादा जरूरी हो जाती है जब कई नसों में ब्लॉकेज हो…ब्लॉकेज काफी जटिल हो या फिर दिल पहले से कमजोर हो चुका हो. ऐसी स्थिति में सिर्फ स्टेंट लगाना पर्याप्त नहीं होता. बायपास सर्जरी में नई राह बनाकर दिल तक खून पहुंचाया जाता है. ऐसे मरीजों में सर्जरी के बाद लंबे समय तक बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं और मरीज की सेहत भी अच्छी रहती है. इसलिए कई मामलों में बायपास सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प बन जाता है.

सिर्फ स्टेंट लगाना पर्याप्त नहीं होता

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि कई लोगों को लगता है कि एक बार स्टेंट लगने के बाद दोबारा कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा लेकिन ऐसा नहीं है. स्टेंट जिस जगह लगाया जाता है वहां की रुकावट तो खुल जाती है लेकिन दिल की दूसरी नसों में अगर ब्लॉकेज बढ़ती रहती है तो भविष्य में फिर हार्ट अटैक आने का खतरा बना रहता है. इसलिए स्टेंट लगने के बाद भी दवाइयां समय पर लेना… समय पर जांच कराना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी होता है.

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि रिकवरी के मामले में स्टेंट और बायपास दोनों के अपने फायदे हैं. स्टेंट लगने के बाद ज्यादातर मरीज दो से तीन दिन में अस्पताल से घर चले जाते हैं और करीब एक सप्ताह में अपना सामान्य काम शुरू कर सकते हैं. वहीं बायपास सर्जरी के बाद मरीज को लगभग सात दिन अस्पताल में रहना पड़ता है. घर जाने के बाद करीब 10 से 15 दिनों में मरीज धीरे-धीरे अपने रोजमर्रा के काम शुरू कर देता है. सही इलाज मिलने पर दोनों ही मामलों में रिकवरी अच्छी होती है.

हेल्दी लाइफस्टाइल को करें फॉलो

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि बायपास सर्जरी के बाद मरीज बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकता है. अगर मरीज समय पर दवाइयां ले… डॉक्टर की सलाह माने…डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखे और अपनी जीवनशैली में सुधार करे तो 15 से 20 साल तक भी किसी बड़ी परेशानी के बिना स्वस्थ जीवन जी सकता है. ऐसे कई मरीज हैं जिन्होंने बायपास सर्जरी के बाद मैराथन जैसी प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है. यानी सही देखभाल के साथ सामान्य और सक्रिय जीवन पूरी तरह संभव है.

डॉ. समीर भाटी बताते हैं कि हार्ट को स्वस्थ रखने में खानपान और जीवनशैली की सबसे बड़ी भूमिका होती है. ज्यादा तला-भुना और चिकनाई वाला खाना कम खाना चाहिए. अगर डायबिटीज है तो शुगर को नियंत्रण में रखना जरूरी है. साथ ही धूम्रपान से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए. रोज व्यायाम, संतुलित भोजन, वजन नियंत्रित रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है.

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