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पेट खराब हो या सर्दी-जुकाम…बिना दवा ठीक कर देगा जराकुश, गोंडा के वैद्य से जानिए

Last Updated:June 22, 2026, 21:38 IST

Jarakush benefits : आयुर्वेद में जराकुश को चमत्कारी पौधा माना गया है. सेहत के लिए ये वरदान से कम नहीं. इसके कई गुण इसे संजीवनी बूटी की तरह बनाते हैं. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि जराकुश का प्राचीन चिकित्सा में विशेष स्थान रहा है. ग्रामीण इलाकों में यह पौधा लंबे समय से जुकाम, खांसी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोग किया जाता रहा है. मौसम बदलने पर कई लोगों को सर्दी-जुकाम की परेशानी होने लगती है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. वैद्य जमुना प्रसाद बताते हैं कि जराकुश कोई बहुत दुर्लभ पौधा नहीं है. यह कई क्षेत्रों में अपने आप उग आता है.

प्रकृति ने हमें कई ऐसे पौधे दिए हैं, जो औषधीय गुणों से भरपूर हैं और वर्षों से लोगों की सेहत की देखभाल में मदद करते आ रहे हैं. गांवों में आज भी कई लोग छोटी-मोटी बीमारियों के लिए जड़ी-बूटियों का सहारा लेते हैं. ऐसा ही एक औषधीय पौधा है जराकुश, जिसे पारंपरिक चिकित्सा और लोक उपचार में काफी महत्व दिया जाता है. ग्रामीण इलाकों में यह पौधा लंबे समय से जुकाम, खांसी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोग किया जाता रहा है.

लोकल 18 से गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि जराकुश एक ऐसा पौधा है, जिसके पत्ते और अन्य भाग औषधीय गुणों से युक्त माने जाते हैं. हालांकि आधुनिक चिकित्सा के दौर में किसी भी बीमारी का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही कराना चाहिए, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा में इस पौधे का विशेष स्थान रहा है.

वैद्य वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, जराकुश का उपयोग सबसे अधिक जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं में किया जाता है. मौसम बदलने पर कई लोगों को सर्दी-जुकाम की परेशानी होने लगती है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्तों का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. माना जाता है कि इसके गुण गले को आराम पहुंचाने और सर्दी से जुड़ी परेशानियों को कम करने में सहायक हो सकते हैं.

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जराकुश को शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने वाला पौधा भी माना जाता है. आयुर्वेद में कई औषधीय पौधों का उपयोग शरीर को मजबूत बनाने और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है. वैद्य बताते हैं कि नियमित और सही तरीके से उपयोग करने पर यह पौधा शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग पाचन संबंधी समस्याओं में भी जराकुश का उपयोग करते हैं. आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार यह पौधा पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. पेट में गैस, अपच और भोजन ठीक से न पचने जैसी समस्याओं में इसका उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है. हालांकि इसकी मात्रा और उपयोग का तरीका विशेषज्ञ की सलाह से ही अपनाना चाहिए.

जराकुश का उपयोग केवल अंदरूनी स्वास्थ्य समस्याओं तक सीमित नहीं है. कई जगहों पर इसका प्रयोग त्वचा संबंधी परेशानियों में भी किया जाता है. वैद्य बताते हैं कि इसके पत्तों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाया जाता है. माना जाता है कि यह त्वचा को राहत पहुंचाने में सहायक हो सकता है. हालांकि किसी भी प्रकार की त्वचा समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

आज के समय में लोग फिर से प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उपचारों की ओर लौट रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि लोग रासायनिक दवाओं के साथ-साथ प्राकृतिक विकल्पों के बारे में भी जानना चाहते हैं. जराकुश भी ऐसे ही पौधों में शामिल है, जिसकी पहचान एक प्राकृतिक औषधि के रूप में की जाती है. गांवों में बुजुर्ग आज भी इसके गुणों के बारे में नई पीढ़ी को बताते हैं.

वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि जराकुश कोई बहुत दुर्लभ पौधा नहीं है. यह कई क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उग जाता है. इसकी देखभाल भी ज्यादा कठिन नहीं होती. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में लोग इसे पहचानते हैं और जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग भी करते हैं. हालांकि इसके सही पौधे की पहचान होना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई बार लोग दूसरे पौधों को भी इसी नाम से जान लेते हैं.

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